कसम से_आप रो देंगे ये 5 स्टोरी पढ़ कर – 5 Real hindi Story

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भाई भाई का प्यार| Real Story

5 Real hindi Story

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एक बार गांव के एक कुएं में कुछ ऐसा हुआ कि उसमें जो भी डोल डाला जाता वो वापस ना आता सिर्फ रस्सी वापस आती थी,

यह देख सभी लोग बहुत घबरा गएं और कहने लगें कि इस कुएं के अंदर कोई भूत है जो ये काम कर रहा है..

गांव में ऐलान किया गया कि जो भी इस मुसीबत से बचाएगा उसे बहुत इनाम दिया जाएगा…

गांव के एक लड़के ने कहा कि मुझे इनाम नहीं चाहिए बल्कि मैं अपने गांव वालों के लिए ये काम करने को तैयार हूंँ लेकिन मेरी एक शर्त है…?

लोगों ने पूछा कि क्या शर्त है_? तो उसने बताया कि जिस डोल में बिठाकर मुझे नीचे कुएं में उतारा जाए उसकी रस्सी तुम लोगों के साथ मेरा भाई भी पकड़ेगा..

उस लड़के के बड़े भाई को बुलाया गया और फिर एक डोल में बिठाकर उस लड़के को कुएं में नीचे उतार दिया गया… उस लड़के ने नीचे उतरकर देखा तो वहांँ एक बंदर बैठा हुआ था जो नीचे आने वाली हर डोल की रस्सी खोल देता था_

इस लड़के ने अपनी जेब से गुड़ निकाला और बंदर को खिलाया तो बंदर उसका दोस्त बन गया, फिर इस लड़के ने बंदर को अपने कंधे पर सवार किया और रस्सी को हिलाया_ बाहर खड़े गांव वाले समझ गए और उन्होंने रस्सी खींचना शुरू कर दी…

जब गांव वालों ने देखा कि उस लड़के के सर पर बंदर बैठा है तो उन्होंने समझा कि ये कोई भूत है जिसने इस लड़के को मार डाला है और अब रस्सी पकड़कर ऊपर आ रहा है..

ये देखकर सारे गांव वाले रस्सी छोड़कर भाग गएं लेकिन उस लड़के का बड़ा भाई रस्सी को पकड़कर घसीटता रहा…

जब वो लड़का बाहर निकल आया तो उसने गांव वालों को बताया कि ये बंदर है और कुएं के अंदर यही डोल की रस्सी खोल देता था_ और मैंने जो रस्सी खींचने में अपने भाई की शर्त लगाई थी वो इसीलिए कि मुझे पता था कि अगर मेरे साथ कुएं में कुछ बुरा हुआ तो तुम लोग छोड़कर भाग जाओगे लेकिन मेरा भाई मुझे छोड़कर नहीं भागेगा क्योंकि


एक ईमानदार नौकर| Hindi story

Real hindi Story

एक नौकर था, एक दिन वो काम पर नहीं गया, तो उसके मालिक ने सोचा कि मुझे इसकी तनख़ाह बढ़ा देनी चाहिए ताकि ये खुशी-खुशी मेरे पास काम करे..

अगले दिन मालिक ने उसकी तनख्वाह से ज्यादा पैसे उसको दिए तो नौकर ने खामोशी से पैसे रख लिएं,

अगले कुछ दिनों बाद फिर से वो नौकर काम पर नहीं आया तो मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने उसकी तनख्वाह के वो ज़्यादा पैसे काट लिए..

अगले दिन मालिक ने उसकी पुरानी तनख्वाह के बराबर ही पैसे दिए, ये पैसे भी नौकर ने बड़ी खामोशी से अपने पास रख लिएं_

मालिक ने बड़ी हैरानी से पूछा : जरा ये बताओ कि जब मैंने तुमको ज़्यादा पैसे दिए थें तो तुमने खामोशी से रख लिए और अब जब कम पैसे दिएं हैं तो उन्हें भी तुमने खामोशी से रख लिया, इसका क्या मतलब है..?

नौकर ने जवाब दिया : मालिक ! इससे पहले जब मैं एक दिन काम पर नहीं आया था तो उस दिन मेरे घर एक बच्चे की पैदाइश हुई थी_ आपने जब ज़्यादा पैसे दिए तो मैंने समझा कि ये उस बच्चे की रोज़ी है जो ईश्वर ने भेजी है_ और आज मेरे उसी बच्चे की मौत हो गई है_ इसलिए जब आपने कम पैसे दिए तो मैंने दिल में सोचा कि ये उसी बच्चे की रोज़ी थी वो अपने साथ लेकर चला गया…


बूढ़े बाप के आंसू | Sad story

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एक नेक बाबा के पास एक बूढ़ा आदमी आया और कहने लगा : बाबा जी ! मेरे पास बहुत दौलत है, एक बहुत बड़ा बंगला है और हजारों एकड़ जमीन है_ लेकिन मेरी बीवी मर चुकी है सिर्फ एक इकलौता लड़का है, वही मेरी जिंदगी का सहारा है..

शादी के 20 साल बाद तक मेरा कोई लड़का नहीं हुआ, मैं और मेरी पत्नी ईश्वर से बहुत ज्यादा मन्नते और दुआएं मांगते थे कि ऐ ईश्वर ! मुझे एक लड़का दे दो…

जब बहुत दिन गुजर गए और हमारे यहां कोई लड़का नहीं हुआ तो एक दिन गांव के एक आदमी ने मुझसे कहा कि गांव के बाहर जो पीपल का पेड़ है उसके नीचे बैठकर जो भी ईश्वर से कुछ भी मांगता है उसे वो मिल जाता है, इसलिए तुम भी उस पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर ईश्वर से प्रार्थना करो तो तुम्हें भी लड़का मिल जाएगा..

उस दिन के बाद से मैं रोजाना अपनी पत्नी के साथ उस पीपल के पेड़ के नीचे जाता और खूब रो रोकर ईश्वर से एक बेटा मांगता.. ईश्वर ने हमारी सुन ली और हमें एक बेटा दे दिया..

कुछ दिनों के बाद मेरी पत्नी की एक कार एक्सीडेंट से मौत हो गई_ अब मैं और मेरा बेटा ही बचा है, मेरा बेटा जवान हो चुका है लेकिन वो मेरी एक बात नहीं सुनता है और मुझे बहुत परेशान करता है_

यहां तक कि कल उसके एक दोस्त ने आकर के मुझसे बताया कि आपका बेटा कह रहा था कि काश मुझे भी वो पीपल का पेड़ मिल जाता तो मैं भी उसके नीचे बैठकर ईश्वर से प्रार्थना करता कि ऐ ईश्वर ! मेरे बाप को जल्दी से अपने पास बुला लो ताकि मैं उसकी जायदाद का मालिक बन जाऊं और खूब ऐश की ज़िंदगी गुजार सकूं…,


एक भिखारी और फल वाला

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एक भिखारी एक फल वाले के पास गया और कहा, “ईश्वर के नाम पर मुझे कुछ दे दो।” दुकान वाले ने उस फकीर को बहुत घूरकर देखा और फिर एक गला सड़ा आम उठाकर उस फ़कीर की झोली में डाल दिया..

वह बेचारा भिखारी कुछ देर वहीं खड़ा रहा और फिर उसने फल वाले को बीस रुपये निकालकर दिये और कहा, “मुझे बीस रुपये के आम दे दो।

” दुकान वाले ने खूब अच्छे-अच्छे आम छांटे और एक पन्नी में रखकर उस भिखारी को दे दिया.. उस भिखारी ने एक हाथ में अच्छे वाले आम लिएं और दूसरे हाथ में वो गला- सड़ा आम लिया और आकाश की ओर देखकर कहने लगा :-

हे ईश्वर ! देखो इस धनी आदमी ने तुम्हें क्या दिया है और मुझे क्या दिया है…


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