मासूम बच्चा और खूनी जंगल💀 | Child horror Story in Hindi

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Child horror Story in Hindi

  मेरा नाम कामरान है मेरा एक 6 साल का बेटा है उसका नाम ” ज़ीशान ” है.. एक दिन मैं रात के वक्त अपनी पत्नी के साथ शॉपिंग करके घर वापस आ रहा था_ ज़ीशान कार की पिछली सीट पर बैठा वीडियो गेम खेल रहा था, हम लोग जंगल वाले रास्ते पर थें कि तभी अचानक मेरी गाड़ी के सामने अजीब अजीब चीजें आ गई_ मैंने गाड़ी की रोशनी में उन चीजों पर नजर डाली तो वो इंसान नहीं थें सिर्फ इंसानी हड्डियों के ढांचे थें_ वो बहुत ज्यादा थें और बाहर से मेरी गाड़ी को पीट रहे थें…

अचानक मेरी पत्नी पीछे सीट की तरफ देखकर बहुत तेज तेज चिल्लाने लगी : मेरे ज़ीशान को छोड़ दो, उसे मत मारो..! मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वो इंसानी ढांचे कार का शीशा तोड़कर जीशान को अपनी तरफ घसीट रहे थें_ इससे पहले कि मैं जीशान का पैर पकड़कर उसे अपनी तरफ करता उन ढांचों ने पूरी तरह जीशान को बाहर घसीट लिया और उसे लेकर जंगल की तरफ भागने लगें…

हम दोनों पति पत्नी दरवाजा खोलकर जल्दी से उनके पीछे भागें_ वो ढांचे हवा में उड़ते हुए जा रहे थें, मेरा ज़ीशान बहुत दूर से चीख चीखकर मुझे पुकार रहा था_ और फिर अचानक वो चीजें अंधेरे में कहीं गायब हो गईं…

हम दोनों पति पत्नी बहुत ज्यादा परेशान उस घने जंगल में इधर-उधर ज़ीशान को तलाश कर रहे थें लेकिन हमें उसकी कोई आवाज नहीं आ रही थी.. सारी रात इसी तरह गुजर गई…

सुबह के उजाले में हमें दूर एक पत्थर पर कोई बैठा नजर आया_ हम जल्दी से उस पत्थर के पास पहुंचे तो वहांँ एक जोगी बाबा बैठे जाप कर रहे थें, हमें जंगल में इस तरह परेशान देखकर उन्होंने पूछा कि तुम लोगों को क्या हुआ..?, हमने उन्हें सारी बातें बता दीं तो जोगी बाबा कहने लगें : बेटा ! मैं समझ गया हूंँ ये उसी खूनी आत्मा का खेल है_ आज दुर्गाष्टमी की रात है आज की रात वो आत्मा किसी बच्चे की बलि चढ़ाकर उसका खून पिएगी…”

बलि का नाम सुनकर हमारे तो होश उड़ गएं_ हम बहुत जोर जोर से रोने लगें और बाबा का पैर पकड़कर कहने लगें : बाबा ! हमारे बच्चे को बचा लो वो हमारी इकलौती औलाद है वही हम दोनों की जिंदगी का सहारा है उसे बचा लो.. बाबाजी ने कहा : बेटा ! अगर तुम अपने बच्चे को बचाना चाहते हो तो उसका सिर्फ एक ही तरीका कि तुम्हें उस कबर में अंदर जाना होगा, वहां तुम्हें एक गुफा मिलेगी वो आत्मा तुम्हारे बच्चे को उसी कबर में लेकर गई होगी…

बाबाजी ने जंगल के एक कोने की तरफ इशारा करते हुए कहा : वो कबर वहां बनी हुई है अगर तुम चाहो तो अपने बच्चे को जाकर बचा लो_ लेकिन एक बात का ख्याल रखना कि जब तुम्हें उस गुफा में अपना बच्चा दिखाई दे तो उसे छूना मत बल्कि पहले उसके पास रखे हुए चिराग पर अपने खून की बूंदें टपकाना_ तभी तुम अपने बच्चे को बचा सकोगे, और फिर अपने बच्चे को लेकर जल्दी से उस क़बर से बाहर निकल जाना वरना वो क़बर बंद हो जाएगी और तुम लोग हमेशा के लिए जमीन के अंदर ही ज़िंदा दफन हो जाओगे…

हम दोनों पति पत्नी उस कबर की तरफ चल दिएं, आधा घंटा चलने के बाद हमें दूर जंगल में एक वीरान कबर नजर आई उसके ऊपर की मिट्टी हटी हुई थी_ हम दोनों उस कबर में उतर गएं, अंदर एक लंबी सी सुरंग बनी हुई थी और हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा था…

हम लोगों ने एक छोटी सी टॉर्च पकड़ रखी थी_ हम आगे बढ़ते जा रहे थे कि अचानक दूर से हमें कुछ अजीब आवाजें महसूस हुई_ मैंने टॉर्च की रोशनी सामने मारी तो देखा बहुत सी मकड़ियां हमारी तरफ चलती हुई आ रही हैं, ये देखकर हमारे तो होश उड़ गएं, हमने उन मकड़ियों से बचना चाहा लेकिन तभी वो हमारे पास आकर हमसे चिपकने लगीं, मुझे अपने सारे जिस्म में एक जलन सी महसूस हो रही थी लेकिन तभी मुझे बाबा का बताया हुआ वो मंत्र याद आ गया और मैंने उसे पढ़ना शुरू कर दिया_ देखते ही देखते सारी मकड़ियां गायब हो गई और हमने एक सुकून की सांस ली…

थोड़ी दूर चलने के बाद हमें वही इंसानी हड्डियों के ढांचे नजर आने लगें, उन सबके बीच में एक बहुत डरावनी औरत आंखें बंद किए बैठी हुई थी ये सारे ढांचे उसके चारों तरफ नाच रहे थें.. अजीब बात तो ये थी कि हमारे पास पहुंचने पर भी उन चीजों को हमारे आने का कुछ एहसास ना हुआ_ शायद वो कोई जादुई जॉप कर रहे थें इसीलिए उन्हें हमारी आहट भी महसूस ना हुई…

सामने एक कमरा बना हुआ था, उसके दरवाजे पर शैतानी तस्वीरें बनी हुई थीं _ ये वही कमरा था जिसके बारे में बाबा ने हमें बताया था कि उसी कमरे में चुड़ैल ने तुम्हारे बच्चे को लेटाया है, मैंने आगे बढ़कर उस कमरे का दरवाजा खोला और अंदर दाखिल हो गया_ कमरे के अंदर मैंने देखा कि मेरा ज़ीशान एक पत्थर पर पड़ा हुआ है और उसके जिस्म पर नोचने के निशान हैं _उसकी आंखों के पास से खून बह रहा था…

ये देखकर मेरी पत्नी बहुत जोर जोर से रोने लगी, मैंने उसे चुप कराया और सामने रखे चिराग पर अपना हाथ काट कर खून की बूंदें टपकाने लगा_ जैसे ही मैंने उस चिराग़ पर खून टपकाया तो सारी गुफा में तूफान सा आ गया और जमीन हिलने लगी…

मैंने जल्दी से जीशान को गोद में उठाया और अपनी पत्नी के साथ बाहर की तरफ भागा, हमारे पीछे आग की लपट बहुत तेज दौड़ते हुए आ रही थी जिसका साफ मतलब था कि उस गुफा में आग लग चुकी थी..

दौड़ते दौड़ते हम कबर के पास पहुंच चुके थें_ सूरज की रोशनी हमें कबर के बाहर से नजर आ रही थी, वो कब्र खुद ब खुद धीरे-धीरे बंद हो रही थी, मैंने जल्दी से जीशान को बाहर की तरफ फेंका और फिर अपनी पत्नी को धक्का देकर बाहर निकाला_ और फिर मैं खुद बाहर निकलने की कोशिश करने लगा, लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मुझे पीछे से जकड़ रखा है..

मेरी पत्नी बाहर खड़ी बहुत जोर जोर से मुझे पुकार रही थी और मुझसे रो रो कर कह रही थी कि जल्दी से बाहर निकलो वरना कबर बंद हो जाएगी, मैं बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन कुछ अनजान ताकतों ने मुझे बुरी तरह जकड़ रखा था_ मुझे मौत अपने सामने नजर आ रही थी.. मैंने ईश्वर को याद करना शुरू कर दिया और उसके नाम का ज़िक्र करने लगा तभी अचानक वो अंजान ताकतें मुझसे दूर हो गई…

कबर बंद होने में शायद कुछ ही सिकेंड बाकी थें कि मैंने तेजी से बाहर छलांग लगा दी, मेरा पांव जख्मी हो चुका था और उससे बहुत तेज खून बह रहा था जब मुझे होश आया तो मैंने देखा वही नेक बाबा हम लोगों के सामने खड़े हैं और हमें देखकर मुस्कुरा रहे हैं…

उन्होंने मुझे उठाते हुए कहा : बेटा ! मुझे पूरा यकीन था कि तुम अपने बच्चे को ज़रूर उस चुड़ैल से बचा लोगे, अब दुबारा इस जंगल में कभी मत आना_ क्योंकि उस चुड़ैल की नजर तुम पर पड़ चुकी है अगर उसने दोबारा तुम्हें इस जंगल में देख लिया तो तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ेगी…

इतना कहकर वो बाबा पीछे मुड़े और फिर पता नहीं कहांँ हवा में गायब हो गएं…

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