10 चीजों की वजह से घर में बरकत नहीं होती |Gunaaho ka wabal |islamic

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Gunaaho ka wabal |10 चीजों की वजह से घर में बरकत नहीं होती

Gunaaho ka wabal

  दोस्तों ! आज की इस पोस्ट में हम आपको वो 10 चीजें बताएंगे कि जिनकी वजह से हमारे घरों में बेबरकती होती है, आज हर इंसान को इस बात की शिकायत रहती है कि मेरे घर में किसी चीज में बरकत ही नहीं होती, पैसा तो खूब कमाते हैं लेकिन सारा पैसा किधर खर्चा हो जाता है कुछ समझ ही नहीं आता_ तो दोस्तों ! ये सब बे- बरकती की निशानियां है, क्योंकि हम अपनी जिंदगी में कुछ ऐसे काम कर रहे होते हैं कि जिनकी वजह से हमारे घरों से बरकत उठा ली जाती है और फिर ज़्यादा से ज़्यादा चीज़ें भी मौक़ा पड़ने पर कम नजर आने लगती हैं..

दोस्तों ! बेबरकती की कुछ अलामतें ये होती हैं कि ” पैसों में बरकत नहीं होती, घरों में सुकून नहीं होता, घर में हमेशा कोई ना कोई बीमार रहता है और सारा पैसा अस्पतालों में खर्च होता है, घर की मुसीबतें कभी खत्म नहीं होतीं, एक मुसीबत से निजात मिले तो दूसरी मुसीबत शुरू हो जाती है, कारोबार में तरक्की नहीं होती, वगैरह वगैरह…

और बरकत का मतलब भी ये नहीं होता कि हमारी कमाई बढ़ जाएगी, या हमारे घरों में रिज़्क़ की फरावानी हो जाएगी_ बल्कि बरकत तो इस चीज को कहते हैं कि जितना हम कमा रहे हैं और हमारे घरों में जो चीजें मौजूद हैं उसी में हमारे सारे काम निकल जाएंगे और घरों से परेशानियां खत्म हो जाएंगी..

तो आइए दोस्तों ! अब हम आपको उन 10 चीजों के बारे में बताते हैं कि जिनकी वजह से घरों से बरकत उठा ली जाती है :

1 . खाना खाते वक्त़ शरीयत की चीज़ों का ख्याल ना रखना : दोस्तों ! खाना हमारी ज़िंदगी का एक लाजमी हिस्सा है और हम उसी की वजह से जिंदा रहते हैं लेकिन हुज़ूर (स.अ.)ने हमें खाना खाने के कुछ आदाब सिखलाए हैं कि जब भी खाना खाया जाए तो बैठकर खाया जाए, और बिस्मिल्लाह पढ़ कर खाना शुरू किया जाए, और खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धो लिए जाएं_ लेकिन आज हम लोग खाने में कुछ ऐसी कोताहियां करते हैं कि जिनकी वजह से हमारे घरों की बरकत उठा ली जाती है, जैसे खड़े होकर खाना खाना, या जूते पहनकर खाना खाना, या नंगे सर खाना खाना, बिस्मिल्लाह पढ़े बगैर खाना शुरू कर देना, और बगैर हाथ धोए खाना खाने बैठ जाना..

2 . मेहमान की क़दर न करना : दूसरी चीज जिसकी वजह से हमारे घरों में बेबरकती आती है वो ये है कि घर आने वाले मेहमान की क़दर न करना, बहुत से लोगों की आदत होती है कि जब उनके घर कोई मेहमान आता है तो वह खुश होने के बजाय और ज्यादा परेशान हो जाते हैं कि अब हमे इस मेहमान के लिए खाने-पीने का इंतजाम करना पड़ेगा, रात को सोने का इंतजाम करना पड़ेगा और वो लोग मेहमान को बोझ समझते हैं, किताबों में उलमा ए इकराम ने लिखा है कि जो लोग मेहमानों को बोझ समझते हैं तो उनके घरों से बरकत खत्म कर दी जाती है…

3 . खाना खाने के बाद उस बर्तन को साफ ना करना : दोस्तों ! आज इस मसले में भी बहुत ज्यादा कोताही बरती जाती है, आपने शादी ब्याह के मौके पर देखा होगा कि लोग जिस बर्तन में खाना खाते हैं उसको साफ नहीं करते हैं, और बहुत से लोग तो ऐसे होते हैं कि जो बर्तन में आधा खाना छोड़ कर ही उठ जाते हैं, इसी तरह घरों में भी हम लोग इस मामले में बहुत कोताही करते हैं कि खाना खाने के बाद बर्तन को साफ नहीं करतें_ हुज़ूर (स.अ.) ने फरमाया है कि ” ऐ लोगों ! जब भी तुम खाना खाकर उठो तो अपनी प्लेट को अच्छी तरह चाट लिया करो क्योंकि अल्लाह की तरफ से बरकत पूरे खाने पर नहीं उतरती बल्कि खाने के किसी एक हिस्से में बरकत उतारी जाती है..” इस हदीस का मतलब ये है कि हम जो खाना खाते हैं उसमें पूरे खाने में बरकत नहीं होती बल्कि चावलों में से किसी एक चावल में बरकत रखी जाती है और हो सकता है कि हम जब खाना खाकर उठें तो वही चावल हमसे छूट जाए जिसमें अल्लाह ताला ने बरकत रखी थी_ इसी वजह से हमारे घरों में बेबरकती होती है…

4. Toilet मैं नंगे सर जाना या बातें करना : दोस्तों ! यह भी बहुत अहम मसला है और इसमें तो आज 95% फीसद लोग मुब्तिला हैं , अक्सर लोग जब भी टॉयलेट जाते हैं तो अपने सर पर कोई टोपी वगैरह नहीं रखते हैं.. हमें इस्लाम की तरफ से ये आदाब सिखाएं गए हैं कि जब भी हम टॉयलेट जाएं तो अपने सर को ढककर जाए ताकि शैतान हमें अपना शिकार ना बना सके_ इसी तरह दूसरी कोताही जो हम करते हैं वो यह है कि हम टॉयलेट के अंदर बैठकर मोबाइल से बातें करने लगते हैं, इससे भी सख्ती से मना किया गया है कि टॉयलेट के अंदर बैठकर किसी भी तरह बात ना की जाए और जल्दी से जल्दी फारिग़ होकर बाहर निकल आया जाए_ जो लोग इन मसलों में कोताही करते हैं तो उनके घरों में बेबरकती आने लगती है…

5. मस्जिद में बात करना : आज इस मसले में भी हम लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं और इस चीज को जाएज़ समझते हैं, हालांकि हदीस में सख्ती से मना किया गया है कि मस्जिद में दुनिया की बातें नहीं करनी चाहिए_ हम लोग समझते हैं कि सिर्फ नमाज के वक्त मस्जिद में बातें करना मना है और जब नमाज़ हो जाए तो उसके बाद हम मस्जिद में बैठकर दुनिया की बातें कर सकते हैं_ तो दोस्तों ऐसा बिल्कुल भी नहीं है यह हुकुम 24 घंटे के लिए है कि मस्जिद में किसी वक्त भी हम दुनिया की बातें नहीं कर सकते हैं_ लेकिन हां, अगर कोई बहुत जरूरी बात हो तो कम से कम बात करना जायज़ है.. यह चीज़ें बेबरकती का सबब बनती है लेकिन हम इससे भी दो कदम आगे बढ़कर और भी बड़ा गुनाह करते हैं वो यह की मस्जिद नमाज़ पढ़ने जाते ही नहीं हैं, बहुत से लोग तो जुमे की नमाज़ भी नहीं पढ़ते हैं तो दोस्तों ! ऐसे लोगों के घरों में कैसे बरकत होगी..?

6. मगरिब के बाद सोना : छठी चीज़ जो उलमा इकराम ने किताबों में लिखी है कि जिसकी वजह से घरों में बेबरकती आती है वो ये है कि मगरिब के बाद सो जाना और ईशा की नमाज ना पढ़ना_ तो दोस्तों जो लोग ऐसा करते हैं कि ईशा की नमाज़ छोड़कर मगरिब के बाद ही सो जाते हैं तो उन लोगों के घरों से बरकत उठा ली जाती है…

7. फकीर को गुस्से में कुछ देना : हमारा इस्लाम एक ऐसा सुनहरा मज़हब है कि जिसमें गरीबों की मदद करना और उनके लिए सहारा बनना एक अहम जुज़ बतलाया गया है, उसी को हम ज़कात कहते हैं, जिसके बारे में हुजूर ने (स.अ.) ने इरशाद फरमाया है कि ज़कात मालदार लोगों से ली जाएगी और गरीब लोगों पर तक्सीम कर दी जाएगी_ ज़कात के अलावा मोमिनो को हुकुम दिया गया है कि तुम ज़्यादा से ज़्यादा सदका- खैरात भी किया करो_ लेकिन आज एक और कोताही पाई जाती है कि हम किसी गरीब को कुछ भी नहीं देते हैं और अगर देते भी हैं तो बड़ा नापसंद करके और गुस्से में देते हैं, और उस गरीब पर अपना एहसान जतलाते हैं कि देखो मैंने तुम्हारी मदद की है_ तो दोस्तों ! ऐसा करने से हमारे घरों से बरकतें उठा ली जाती हैं, क्योंकि हदीस में आता है कि गरीबों को सदका़ करने से हमारा माल कम नहीं होता बल्कि और ज्यादा बढ़ता है इसलिए सदका़ ज़्यादा से ज़्यादा किया करें..

8. नमाज़ कजा़ करके पढ़ना : दोस्तों बहुत से लोग हैं जो नमाज पढ़ने में बहुत कोताही करते हैं और वक्त पर नमाज़ नहीं पढ़ते हैं बल्कि उसे कजा़ कर देते हैं_ घरों की औरतें इस मसले में बहुत ज्यादा कोताही करती हैं, वो सोचती हैं पहले यह काम कर लूं फिर नमाज़ पढ़ लूंगी तो ऐसा हरगिज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि शैतान जो हमारा खुला हुआ दुश्मन है वो हमें ऐसे काम में मसरूफ कर देता है कि जिसकी वजह से हमारी नमाज कजा हो जाती है और हमें उसकी खबर भी नहीं होती_ इसलिए जैसे ही अज़ान हो तो सारे कामों को छोड़कर सबसे पहले नमाज़ पढ़े और फिर दूसरे काम करें_ मर्द हज़रात भी इस बात की कोशिश करें कि हमारी कोई नमाज़ कजा़ नहीं होनी चाहिए_ लेकिन आज हम तो नमाज़ कजा़ करना तो छोड़ो नमाज़ पढ़ते ही नहीं हैं, बहुत से लोग ऐसे हैं जो नमाज़ के वक्त सोते रहते हैं, घरों में बैठकर बातें करते रहते हैं लेकिन नमाज़ नहीं पढ़ने जातें तो ऐसे लोगों के घरों में बरकत कैसे होगी?…

9. झूठ बोलना : हां दोस्तों, झूठ बोलने की वजह से भी घरों से बरकत उठा ली जाती है, कुछ लोग तो बातों बातों में बहुत ज्यादा झूठ बोलते हैं और जब उनको इस बात पर टोका जाए तो वो कहने लगते हैं कि अरे हम तो मज़ाक कर रहे थें _ तो दोस्तों ! झूठ एक ऐसा संगीन गुनाह है कि जो मज़ाक में भी जायज़ नहीं है, हदीस के अंदर आता है कि हुज़ूर (स.अ.) ने फरमाया कि एक मोमिन बंदा सारे गुनाह कर सकता है लेकिन झूठ नहीं बोल सकता है_ इसलिए खुद को झूठ जैसी संगीन बीमारी से बचाएं ताकि हमारे घरों की बरकत ख़त्म ना होने पाए…

10. गाने सुनना : हां दोस्तों ! गाने सुनने की वजह से भी घरों की बरकत उठा ली जाती है, क्योंकि हम जब अल्लाह की नाफरमानी करेंगे तो हमारे घरों में बरकत कैसे होगी और आजकल तो ऐसे ऐसे गाने बना दिए गए हैं कि जिन्हें सुनने की वजह से लोग इस्लाम से निकल सकते हैं इसलिए खुद को इन गुनाहों से बचाएं…

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दोस्तों ! ये पूरी 10 चीज़ें हैं कि जिनकी वजह से हमारे घरों की बरकत खत्म हो जाती है और हम समझते हैं कि हमारे घरों पर किसी ने दुआ- ताबीज करवा दिया है और इसी वजह से घर में बरकत नहीं हो रही है _ तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है, हमारे घरों पर, या हमारी दुकानों पर या हमारे कारोबार पर कोई भी दुआ ताबीज नहीं करा सकता, सारी ताकत अल्लाह के हाथ में है ये सब हमारे गुनाहों की नहूसत होती है कि जिसकी वजह से हमारी दुकानों में, और हमारे कारोबार में, और हमारे घरों में बेबरकती आती है_ कुरान में अल्लाह तबारक ताला इरशाद फरमाते हैं कि..

ظهر الفساد في البر والبحر بما كسبت ايدي الناس…

मतलब कि ” लोगों के गुनाहों की वजह से ज़मीन में जु़ल्मों- फसाद होता है और अगर ये लोग गुनाहों से रुक जाएं और तोबा कर लें तो ये जुल्मो- फसाद सब खत्म हो जाएगा..”

एक दूसरी जगह इरशाद है कि…

استغفروا ربكم انه كان غفارا، يرسل السماء عليكم مدرارا، ويمددكم باموال وبنين ويجعل لكم جنات ويجعل لكم انهارا…

इसका मफ़हूम है कि ” ऐ लोगों ! तुम अल्लाह के सामने अपने गुनाहों से तौबा करो तो अल्लाह ताला तुम्हारे लिए रिज़्क़ के दरवाजे़ खोल देंगे और तुम्हारे कारोबार में बरकत देंगे और तुम्हारी ज़िंदगी की मुश्किलें खत्म फरमा देंगे…

इसलिए दोस्तों ! अपनी ज़िंदगी को ऐसा बनाएं कि जो अल्लाह ताला को पसंद आ जाए, ऐसी जिंदगी ना गुजा़रें कि जिससे शैतान खुश होता है, अगर हम ऐसी ज़िंदगी गुजारेंगे और शैतान को खुश करेंगे तो हमारे घरों में कभी बरकत नहीं होगी और मरते दम तक परेशान ही रहेंगे..


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