पुराना घर और खौफनाक चुड़ैलें😱| Haunted House Story in Hindi

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  आज की कहानी जो मैं आपको सुनाने जा रहा हूं यह मेरे एक दोस्त ही के साथ बीती एक घटना है, उसने बताया..

‘हम लोग कानपुर में एक छोटे से घर में रहते थे, मालिक मकान बहुत ज्यादा सख्त था, वह हर महीने किराया बढ़ाया करता था इसलिए हमारे पिताजी ने एक दूसरा घर तलाश किया, उसका किराया बहुत कम था लेकिन वह आबादी से बहुत दूर था..

हम तीनो भाई सुबह उठकर उस घर को देखने गए वह घर बड़ा डरावना नजर आ रहा था हम लोग जब घर के अंदर गए तो अजीब सा खौफ महसूस हो रहा था… हमने अपने पिताजी से कहा : “आपको ये घर अजीब नहीं लगता…?”

उन्होंने कहा : नहीं बेटा, ठीक तो है.. शायद पिताजी ये बात इसलिए कह रहे थे क्योंकि उस घर का किराया कम था और पिताजी के पास ज्यादा किराया देने के पैसे नहीं हुआ करते थे, पिताजी की बात की वजह से हम लोगों ने हामी भर ली, और दूसरे दिन अपना सारा सामान लेकर इस नए घर में शिफ्ट हो गए.. इस घर के आस-पास कोई आबादी नहीं थी, पीछे की तरफ से एक घना जंगल था, उस घर के सहन में एक बरगद का पेड़ लगा हुआ था जो बहुत डरावना नजर आता था..

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मैं इस नए घर में आकर बहुत खुश था, लेकिन फिर भी इस घर में डर लगा करता था, क्योंकि इस घर में बहुत डरावनी बिल्लियां रहा करती थी, हैरानी की बात तो ये थी कि वो बिल्लियां हम से डरती भी नहीं थी, अभी सुबह की बात है कि एक काले रंग की बिल्ली घर के जीने के पास आकर बैठ गई, पिताजी ने छड़ी से उसकी तरफ इशारा किया और उसको भगाने की कोशिश की, मगर वो पिताजी को देखकर गुर्राने लगी, ऐसा लगता था मानो उनके ऊपर अभी हमला कर देगी थोड़ी देर के बाद वह खुद-ब-खुद छत के ऊपर चली गई..

अगले दिन हम लोगों ने घर की सफाई शुरू कर दी सफाई के दौरान हमें एक कमरे में कुछ गेंदे के फूल और किसी जानवर की हड्डियां मिली यह देखकर हम बहुत डर गए लेकिन पिताजी ने कहा : अरे पुराना घर है कोई जानवर यहांँ आकर मर गया होगा उसी की हड्डियां होंगी…

दिनभर सफाई करने के बाद हम लोग बहुत थक गए थे और रात का खाना खाकर हम लोग जल्दी से अपने अपने बिस्तरों पर लेट कर सो गए… रात के 12:30 बज रहे होंगे कि हमें बाहर सहन से बिल्लियों की रोने की आवाजें आने लगी जिनको सुनकर हम बहुत डर गए, पिताजी उठकर बाहर गए और उन्होंने बिल्लियों को भगा दिया जिसके बाद हमारी जान में जान आई..

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सुबह जब हम लोग उठे तो हमको बाहर सहन में किसी जानवर का कटा हुआ सर मिला और एक बिल्ली उसे नोच नोच कर खा रही थी, मैंने जब ये देखा तो डर के मारे शोर मचा दिया, अजीब बात तो ये थी कि वो बिल्ली शोर के बावजूद भी वहाँ से नहीं भागी जैसे उस पर कोई फर्क ही ना पड़ा हो.. पिताजी ने लकड़ी की छड़ी दो-तीन बार जमीन पर मारी जिससे वह बिल्ली अपने मुंह में उस जानवर का सिर उठाकर दूर भाग गई..

मुझे हैरानी तो इस बात पर हो रही थी एक बिल्ली कैसे किसी बड़े जानवर का शिकार कर सकती हैं और फिर अपने मुंह में उस बड़े जानवर के सिर को दबाकर कैसे भाग सकती है…? शायद उस जानवर का सर बिल्ली से बड़ा था, हम लोग यह सब देखकर बहुत डर गए, लेकिन पिताजी ने हंसकर कहा : इसमें डरने वाली तो कोई बात नहीं है..

एतवार का दिन था हम लोग स्कूल नहीं गए थे पिताजी ने हमको कुछ पैसे दिए और कहा कि जाओ किसी किराने की दुकान से घर का ये जरूरी सामान ले आओ..! हम तीनों भाई जब वह सामान लेकर वापस लौटे तो देखा घर के सामने जो बरगद का पेड़ लगा हुआ था उस पर वही काली बिल्ली बैठी थी_ वह हम लोगों को बहुत घूर घूर के देख रही थी…

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वैसे तो उस घर में और भी बहुत सी बिल्लियां थी मगर इस काली बिल्ली से अजीब सा डर लगता था क्योंकि वो एक आंख से अंधी भी थी..

ये सर्दियों के दिन थे और हमें उस घर में रहते हुए एक हफ्ता हो गया था, लेकिन रोजाना हमारे साथ कुछ ना कुछ अजीब होता रहता था, कभी ऐसा लगता है कि छत पर बहुत सी औरतें बैठी हंस रही हैं, कभी रात में एकदम से बिल्लियों की रोने की आवाजे आने लगती, कभी ऐसा महसूस होता कि बगल वाले कमरे में कोई दौड़ रहा है…

अब हमारे पिताजी को भी लगने लगा था कि इस घर में जिन्नात और भूतों का साया है, लेकिन फिर भी वह खामोश थे क्योंकि हमारी पूरी फैमिली में एक वही थे जो हम सभी लोगों को संभाले हुए थे… उस दिन रात में हम लोग खाना खाकर कमरे में बैठे हुए थे कि अचानक हमें ऐसा महसूस हुआ जैसे बाहर सहन में कोई औरत घुंघरू बांध कर नाच रही हो…

हम लोग इतना डर गए थे कि हम में से किसी की भी हिम्मत नहीं थी कि बाहर जा करके देखें, अचानक बहुत सी बिल्लियों की रोने की आवाज आने लगी और साथ में ये महसूस होने लगा कि जैसे छत पर बहुत सी लड़कियांँ आपस में बैठी हंस रही है… डर के मारे हम लोगों का बुरा हाल हो रहा था किसी तरह वह रात गुजरी, सुबह हमारे पिताजी मकान मालिक के पास पहुंचे और उनको जाकर के पूरी बातें बताई..

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पहले तो मकान मालिक ने इन सारी बातों का इनकार किया, लेकिन जब पिताजी ने बहुत सख्ती से उनको ये सारी बातें बताई और उनसे हकीकत मालूम की तो उन्होंने बताया कि आप सच कह रहे हैं, लेकिन उस घर में बिल्लियों की शक्ल में जो जिन्नात रहते हैं उन्होंने कभी किसी को वहां पर नुकसान नहीं पहुंचाया है,

हमने इसीलिए तुमको वह घर बहुत कम किराए के ऊपर दे दिया था, मालिक मकान अपनी बात पूरी करता कि उससे पहले पिताजी खड़े हो गए और उससे कहा : “तुमको मौत के कुएं में डालने के लिए हम लोग ही मिले थे…?

इतना कहकर पिताजी घर आ गए और हम लोगों से कहा : ” अब हम इस घर में नहीं रहेंगे, हम जल्द ही शहर में कोई दूसरा घर तलाश कर लेंगे, अगले दिन हम लोगों को शहर में एक दूसरा घर किराए पर मिल गया, शाम तक हम लोग अपना सारा सामान लेकर उस घर में शिफ्ट हो गए..

आज इस बात को 4 साल गुजर चुके हैं लेकिन फिर भी मुझे कभी-कभी बिल्लियों का रोना, औरतों का घुंघरू बांध कर नाचना और छत पर लड़कियों का हंसना याद आता है, और अक्सर मैं ये चीजें ख्वाब में देखकर डर भी जाता हूं…

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