हज़रत हमजा़ की शहादत😭|Hazrat Hamza story in Hindi

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हज़रत हमजा़ की शहादत😭|Hazrat Hamza story in Hindi :-

Hazrat Hamza story in Hindi

… कुरैश ने जब देखा कि अल्लाह के रसूल लोगों को अल्लाह की तरफ बुलाने से नहीं रुक रहे हैं तो फिर उन्होंने गरीब मुसलमानों पर अपना गुस्सा उतारना शुरू कर दिया, जब ठीक दोपहर हो जाती तो यह काफिर गरीब मुसलमानों को पकड़ते और तेज धूप में रेतीली जमीन पर उनको लिटा देते और उनके सीने पर कोई भारी पत्थर रख देते ताकि वह करवट ना बदल सके, उनके जिस्मों पर गरम गरम बालू डाल देते, लोहे की सरिया आग में गर्म करके उनके जिस्मों पर चिपका देते, और कभी उनको पानी में डुबोकर बहुत देर तक उनकी सांस रोक देतें..

मुसलमान इन सारी तकलीफों को बर्दाश्त करते लेकिन अल्लाह के रसूल को ना छोड़ते.. काफिर लोग अल्लाह के रसूल को बहुत ज्यादा परेशान करते थे एक साहिब रिवायत करते हैं कि मैंने देखा कि अल्लाह के रसूल काबे में लोगों को इस्लाम की तरफ दावत दे रहे हैं और कोई उनके ऊपर मिट्टी फेंक रहा है, कोई उन पर थूक रहा है और कोई उनके ऊपर कूड़ा फेंक रहा है, कोई उन्हें पीछे से धक्का दे रहा है और अल्लाह के रसूल की यह हालत देखकर सारे काफिर जोर-जोर से खड़े हंस रहे थें…

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अल्लाह के रसूल पूरा-पूरा दिन लोगों को इस्लाम की दावत देते लेकिन कोई मानने के लिए तैयार नहीं होता, एक रोज अल्लाह के रसूल सफा पहाड़ पर बैठे हुए थे कि अचानक वहां अबू जहल आ गया (काफिरों में अल्लाह के रसूल का सबसे बड़ा दुश्मन अबू जहल ही था) उसने अल्लाह के रसूल को गालियां देनी शुरू कर दीं, अल्लाह के रसूल खामोश बैठे रहें, उसको कोई जवाब ना दिया..

जब अबू जहल ने देखा कि मोहम्मद मुझे कोई जवाब नहीं दे रहे हैं तो उसने एक पत्थर उठाया और अल्लाह के रसूल के सर पर मार दिया जिसकी वजह से अल्लाह के रसूल के सर से खून बहने लगा, अल्लाह के रसूल खामोशी से उठे और काबे की तरफ चले गए, आबे ज़मज़म से जाकर अपने जख्म धोए और फिर अल्लाह के सामने सजदे में गिर गए और रोने लगे…

हुजूर के चाचा हजरत हमजा अभी इस्लाम नहीं लाए थें, वह उस दिन शिकार करने गए हुए थे, हज़रत हमजा़ जब भी शिकार करके शाम को वापस आते तो बड़े अकड़ के चलते थें, उस दिन भी जब वो मक्का के अंदर दाखिल हो रहे थे तो दो गुलाम लड़कियों ने उनसे कहा कि ऐ हमजा़ ! अगर आज तुम अपने भतीजे मुहम्मद की हालत देख लेतें कि अबू जहल ने उनको कैसे मारा था तो शायद तुम ऐसे अकड़ के ना चलतें..,

हज़रत हमजा़ ने उन लड़कियों से सारी बात पूछी तो उन्होंने सब कुछ बता दिया कि आज अबू जहल ने तुम्हारे भतीजे को बहुत गालियां दी और फिर एक पत्थर उठाकर उनके सर पर मारा कि जिसकी वजह से उनके सर से खून बहने लगा.. यह सुनना था कि हज़रत हमजा़ को बहुत तेज गुस्सा आया, तीर-कमान हाथ में लिए सीधे हरम में पहुंचे..

अबू जहल अपने साथियों के साथ हरम में एक टोली बनाए बैठा हुआ था, हज़रत हमजा़ ने जाते ही उसके सर पर बहुत तेज कमान मारी_अबू जहल का सर फट गया, हज़रत हमजा़ ने कहा कि ऐ जाहिल ! क्या तुम यह समझते हो कि मेरा भतीजा लावारिस है जिसका मन करे वह उसे गालियां दें और मारे, ऐसा हरगिज़ नहीं होगा_ अगर दोबारा तूने मेरे भतीजे की तरफ नजर भी उठाई तो तेरा बहुत बुरा हाल होगा…उसके बाद हज़रत हमजा़ अपने भतीजे हुजूर सल्ला वसल्लम को तलाश करने लगें,

हुजू़र (स.अ.) उस वक्त काबे के पास सजदे में पड़े हुए थें और बहुत रो रहे थें, हजरत हमजा उनके पास पहुंचे और कहा_ ऐ मेरे भतीजे..! , लेकिन अल्लाह के रसूल (स.अ.)ने सर ना उठाया_ हजरत हमजा ने दोबारा कहा _ ऐ मेरे भतीजे..! , अल्लाह के रसूल ने फिर भी सर ना उठाया, हजरत हमजा ने तीसरी बार कहा _ ऐ मेरे भतीजे..! , अल्लाह के रसूल ने सर उठाया, आंखों में आंसू भरे हुए थें..

हज़रत हमजा़ ने सर पर हाथ रखते हुए कहा कि ऐ मेरे भतीजे..! परेशान ना हो मैंने तुम्हारे दुश्मन अबू जहल से बदला दे लिया है कि जैसे उसने तुम्हें मारा था मैंने भी उसका सर फाड़ दिया है, अब तो खुश हो जा..!हुज़ूर ने बड़ी बेनियाज़ी से फरमाया कि ऐ मेरे प्यारे चाचा ! मुझे इस बात से कोई खुशी नहीं हुई..

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हजरत हमजा़ ने पूछा कि भतीजे फिर तुझे किस बात से खुशी होगी..? इस पर हुज़ूर ने फ़रमाया कि चाचा जान ! अगर आप इस्लाम कबूल कर लो तो मुझे सबसे ज़्यादा खुशी होगी.. हज़रत हमजा ने कहा_ भतीजे ! फिर देर ना कर, मुझे अभी कलमा पढ़ा दो मैं आज ही मुसलमान होता हूं.. यह सुनकर हुज़ूर का चेहरा खुशी से जगमगा उठा..

हजरत हमजा के इस्लाम लाने से मुसलमानों को बहुत ताक़त मिली, अब कोई भी हुजूर (स.अ.) को परेशान नहीं कर पाता था, हर एक हज़रत हमजा़ से डरता था क्योंकि हज़रत हमजा़ उन बहादुर लोगों में से थें कि जंग में उनसे कोई भी जीत नहीं पाता था.. अल्लाह के रसूल अपने चाचा हज़रत हमजा से बहुत मोहब्बत करते थें…

वफात : हिजरत के बाद जंग ए उहद के मौके पर हज़रत हमजा़ ने बहुत बहादुरी से जंग लड़ी, कोई भी उनके सामने आने की ताकत नहीं रखता था, वह अपने घोड़े पर सवार थें _ उनके दोनों हाथों में तलवारें थीं, उन्होंने अपना घोड़ा काफिरों के लश्कर में घुसा दिया और तलवारों से काफिरों को गाजर मूली की तरह काट रहे थें..

लेकिन उसी वक्त एक गुलाम जिसका नाम ” वहशी ” था उसने यह तीर में ज़हर लगाकर दूर ही से हज़रत हमजा़ पर वार कर दिया, तीर जाकर सीधे हज़रत हमजा़ के पेट में लगा और ज़हर के असर की वजह से हज़रत हमजा़ उसी जगह गिर पड़े उन्हें खून की उल्टी होने लगी और देखते ही देखते उनकी शहादत हो गई..

इस जंग में मुसलमानों को हार का सामना करना पड़ा था इसलिए ” हिंदा ” नाम की एक काफिर औरत को अपनी दुश्मनी निकालने का मौका मिल गया और उसने हज़रत हमजा़ की लाश को तलवार से काट डाला और उनका कलेजा निकालकर चबाने लगी, उनकी नाक -कान काट दिए उनकी आंखें बाहर निकाल ली और उनकी लाश की बहुत बुरी हालत बना दी…

जंग के बाद अल्लाह के रसूल ने सहाबा इकराम से पूछा कि मेरे चाचा हमजा़ कहां है मुझे नजर नहीं आ रहे हैं ? एक सहाबी ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल ! आप खुद ही चल कर देख लीजिए अल्लाह ने उनको शहादत अता फरमा दी है..

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यह सुनकर अल्लाह के रसूल की आंखों से आंसू बहने लगें और उन सहाबी के साथ अल्लाह के रसूल चल दिए, एक पेड़ के पास जाकर उन सहाबी ने एक लाश की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल ! यह आपके चाचा हमजा़ की लाश है, लाश की इतनी बुरी हालत देखकर अल्लाह के रसूल इतना ज्यादा रोने लगें कि आपकी हिचकियां बंध गई_ सहाबी कहते हैं कि अल्लाह के रसूल उस दिन से ज्यादा कभी नहीं रोए थें…

और जब हुज़ूर (स.अ.) ने शोहदा- ए -उहद की नमाजे जनाज़ा पढ़ाई तो हर शहीद की नमाजे़ जनाजा के साथ हज़रत हमज़ा की नमाज भी पढ़ाई , इस लिहाज से हज़रत हमज़ा को ये एज़ाज़ हासिल है कि 70 मर्तबा आपकी जनाज़ा की नमाज अदा की गई…

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इस वाकिए के 7 साल के बाद वही गुलाम जिसने हज़रत हमजा़ को क़त्ल किया था अल्लाह के रसूल के पास आकर मुसलमान हो गया, उनका नाम ” वहशी ” था, अल्लाह के रसूल ने वहशी से पूछा कि तूने मेरे शेर जैसे बहादुर चाचा को कत्ल कैसे किया..?

वहशी ने जवाब दिया कि ऐ अल्लाह के रसूल ! हज़रत हमजा़ जैसे बहादुर आदमी के सामने तो किसी को आने की ताकत नहीं थी उनकी तलवार बिजली की रफ्तार से चलती थी जो भी उनके सामने आता उसका मरना लाजमी था, इसलिए मैंने एक पत्थर के पीछे छुपकर दूर ही से एक तीर पर ज़हर लगाकर उन पर वार कर दिया और उनकी शहादत हो गई..


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