हज़रत मरयम (अ.) और जिब्रील | Hazrat Maryam | Islamic Story in Hindi- read now

4.8/5 - (5 votes)

Hazrat Maryam :-.

अल्लाह की नेक बंदी हज़रत मरयम (अ.) को अल्लाह ताआला ने बहुत से मोजिज़ो से नवाजा़ था_ उसी में से सबसे बड़ा करिश्मा हज़रत ईसा (अ.) की पैदाइश थी, क्योंकि वो बिन बाप के अल्लाह के हुकुम से पैदा हुए थें… वाकि़या कुछ इसतरह हुआ कि ‘ एक दिन हज़रत मरियम (अ.) नहाने की खातिर गुसुलखा़ने में गईं_

अभी वो अंदर पहुंची ही थीं कि हज़रत जिब्रील (अ.) एक आदमी की शक्ल में हज़रत मरयम के सामने आकर खड़े हो गएं.. अपने सामने एक आदमी को देखकर हज़रत मरयम (अ.) बहुत ज़्यादा डर गईं_ जिब्रील(अ.) ने कहा कि ” ऐ अल्लाह की नेक बंदी मरयम ! डरो मत, मैं इंसान नहीं हूं बल्कि अल्लाह का फरिश्ता जिब्रील हूं…

हज़रत मरयम ने पूछा कि तुम यहां मेरे पास क्यों आए हो, जिब्रील(अ.) ने जवाब दिया कि ऐ मरयम ! अल्लाह ताला तुम्हें एक बेटा देना चाहते हैं.. ये सुनकर हज़रत मरयम (अ.) ने हैरानी से पूछा कि ऐ जिब्रील ! अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई है और किसी मर्द ने मुझे आज तक छुआ भी नहीं है तो मेरे पेट में बच्चा कैसे होगा..?

Hazrat Maryam

हज़रत जिब्रील (अ.) ने कहा कि ‘ ऐ मरयम ! ये तुम्हारी नज़र में मुश्किल काम होगा लेकिन अल्लाह के लिए ये करना बिल्कुल आसान है.. और फिर हज़रत जिब्रील दो कदम आगे बढ़ें_ उन्हें अपनी तरफ आता देख हज़रत मरयम(अ.) पीछे हटने लगीं, तो हज़रत जिब्रील (अ.) ने कहा कि ऐ मरयम ! डरो मत, मैं अल्लाह की हुकुम से तुम्हारे पास आया हूं.. और फिर हज़रत जिब्रील ने मरयम (अ.)के आस्तीन में एक फूंक मारी और फिर देखते ही देखते हज़रत मरयम(अ.) के पेट में एक बच्चा आ गया…

अब अगर हज़रत मरयम (अ.) इस बच्चे को पूरे 9 महीने तक अपने पेट में लिए उठाए फिरतीं तो घर और मोहल्ले वाले बुरा भला कहतें और इल्ज़ाम लगातें कि तू किसी मर्द के साथ ज़िना करके आई है तभी तो तुम्हारे पेट में यह बच्चा है… इसलिए हज़रत जिब्रील (अ.) ने एक दूसरी फूंक मारी और फिर अल्लाह की कुदरत से इस बच्चे की 9 महीने की मुद्दत कुछ ही सिकंडो में पूरी हो गई…

अचानक उसी वक्त हज़रत मरयम (अ.) को बच्चे के पैदा होने का दर्द उठा तो हज़रत मरयम दर्द से परेशान होकर एक खजूर के पेड़ के पास आ गईं _ और फिर उसी वक्त अल्लाह के हुक्म से हज़रत मरयम (अ.) ने उस बच्चे को को जन्म दिया.. ये बच्चा हज़रत ईसा (अ.) थें…

जब ये बच्चा पैदा हो गया तो हज़रत मरयम (अ.) बहुत ज़्यादा परेशान तो उठीं कि अब मैं अपने गांव- मोहल्ले वालों को क्या जवाब दूंगी, सब लोग मेरे ऊपर गंदा इल्ज़ाम लगाएंगे और कहेंगे कि मैं किसी गैर मर्द से ज़िना करके आई हूं.. हज़रत मरयम (अ.) की परेशानी देखकर अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्रील को भेजा, जिब्रील (अ.) ने आकर हज़रत मरयम से कहा कि ” ऐ अल्लाह की नेक बंदी मरयम ! परेशान ना हो, तुम्हारा अल्लाह तुम्हारे साथ है..

islamic kahani in hindi

हज़रत मरियम ने जिब्रील (अ.)से कहा है कि ऐ जिब्रील ! मुझे भूख लग रही है.. जिब्रील (अ.) ने अपना पैर ज़मीन पर मारा तो उस जगह से पानी निकलने लगा_ फिर जिब्रील (अ.) ने हज़रत मरयम से कहा कि ऐ मरयम ! अल्लाह फरमा रहे हैं कि आप इस खजूर के पेड़ को हिलाइए आपके पास खजूरे गिरेंगी..

हज़रत मरयम ने कहा कि ” ऐ जिब्रील ! मैं तो एक औरत हूं मेरे अंदर इतनी ताकत कहां कि इस खजूर के पेड़ को हिला सकूं, हज़रत जिब्रील (अ.) ने कहा कि ऐ मरयम ! तुम इस खजूर के पेड़ को हिलाकर तो देखो, अल्लाह अपनी कुदरत से इस खजूर के पेड़ से खजूरों की बारिश फरमाएगा..

फिर हज़रत मरयम (अ.) ने जैसे ही खजूर के पेड़ पर हाथ रखा तो ऊपर से खुद-ब-खुद खजूरें नीचे गिरने लगीं.. हज़रत जिब्रील ने कहा कि ऐ मरयम अल्लाह फरमा रहा है कि इन खजूरों को ” खाओ और पियो और अल्लाह पर भरोसा रखो, तुम्हारा अल्लाह तुम्हें अकेला नहीं छोड़ेगा..

हज़रत मरयम (अ.) ने खजूरें खाकर पानी पिया और फिर कहा है कि ऐ जिब्रील ! मैं लोगों को क्या जवाब दूंगी और अपने घर वालों को क्या मुंह दिखाऊंगी…? हज़रत जिब्रील (अ.)ने फरमाया : ” मरयम ! अल्लाह का हुक्म है कि तुम इस बच्चे को लेकर अपने घर जाओ और जब कोई तुमसे पूछे कि यह किसका बच्चा है तो तुम कोई जवाब ना देना और लोगों से कह देना कि मैं आज रोजा हूं इसलिए मैं बात नहीं कर सकती_( बनी इसराईल में रोजे़ की हालत में बात करना हराम था इससे उनका रोज़ा टूट जाता था)

अल्लाह के हुक्म पर हज़रत मरयम (अ.) उस बच्चे को लेकर अपने मोहल्ले में पहुंची_ हाथ में बच्चा देख घर- मोहल्ले वाले सब जमा हो गएं और पूछने लगें कि ” ऐ मरयम ! यह किसका बच्चा है, हम तो तुझे बहुत नेक लड़की समझते थें लेकिन तूने तो किसी मर्द के साथ ऐसा गंदा काम किया, ऐ मरयम ! तुम्हारे बाप तो बड़े नेक आदमी थें और तुम्हारी मां तो बड़ी परहेज़गार और अल्लाह वाली बंदी थी तो फिर तुमने इतना बड़ा गुनाह कैसे कर लिया…?

history of islam in hindi

लोग हज़रत मरयम (अ.) से बराबर पूछे जा रहे थें कि ये किसका बच्चा है..? आखिर हज़रत मरयम (अ.) ने इशारे से लोगों को बताया कि मैं आज रोजा हूं और बात नहीं कर सकती और अगर तुम्हें कुछ पूछना है तो इस बच्चे से ही पूछ लो..

लोगों ने कहा_ ऐ मरयम ! क्या तुम हमें बेवकूफ समझती हो, आज का पैदा हुआ बच्चा वो हमारी बातों का क्या जवाब देगा.. अभी लोग ये बातें कर ही रहे थें कि वो गोद में दूध पीता बच्चा तेज आवाज़ से बोलने लगा_

” ऐ लोगों ! मैं अल्लाह का बंदा हूं, मुझे अल्लाह ने नबी बनाकर और किताब देकर तुम्हारी तरफ़ भेजा है और अल्लाह ने मुझे खूब बरकतों के साथ अपने हुक्म से बिन बाप के पैदा किया है, मैं ईसा बिन मरयम हूं, अल्लाह ने मुझे हुकुम फरमाया है कि मैं जब तक जिंदा रहूं नमाज़ व ज़कात अदा करता रहूं, और अपनी मां के साथ अच्छा सुलूक करूं, उनकी नाफरमानी ना करूं, और अल्लाह की तरफ से मुझ पर सलाम है जिस दिन मैं पैदा हुआ और दिन मेरी वफात होगी और जिस दिन मैं दोबारा जिंदा किया जाऊंगा..


प्यारे दोस्तों ! अगर आपको मेरी ये post पसंद आई हो और आपको मेरी इस post से कुछ सीखने को मिला हो तो एक प्यारा सा कमेंट करके नीचे दिए गए Share बटन को दबाकर मेहरबानी करके इस post को ज़्यादा से ज़्यादा share करें_ शुक्रिया


Read more : –

1 thought on “हज़रत मरयम (अ.) और जिब्रील | Hazrat Maryam | Islamic Story in Hindi- read now”

Leave a Comment