बेटे की चाहत में पाला जिन्न का बच्चा ☠️ | Hindi horror story

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bete ki chahat me pala jinn ka bachcha- hindi horroe story

मेरी सिर्फ बेटियां ही बेटियां थी बेटे की चाहत आज भी मेरे दिल में बाकी थी, मेरी शादी को बारह साल गुजर चुके हैं_ मेरी चार बेटियांँ हैं बेटा कोई भी नहीं, मेरे पति मजदूरी का काम करते हैं_ घर का खर्चा भी बहुत मुश्किलों से चलता है_ तीन महीने हो गए मकान मालिक हर तीसरे रोज घर आकर हमें उल्टी-सीधी बातें सुनाता है क्योंकि हमने पिछले तीन महीनों से घर का किराया अदा नहीं किया है…

एक दिन मैंने अपने पति से कहा : लगता है बेटे की ख्वाहिश हमारे दिल ही में रह जाएगी, शायद हम सिर्फ लड़कियों ही के मां-बाप बनकर रहेंगे कोई लड़का हमारे नसीब में नहीं है.. मेरे पति ने कहा मायूस मत हो_ ईश्वर के यहांँ देर है अंधेर नहीं_ जिस दिन उसकी कृपा हुई हमें एक बेटा जरूर मिल जाएगा..

मेरी सबसे बड़ी बेटी 12 साल की हो चुकी थी_ एक दिन हम सभी लोग पास के एक पार्क में घूमने चले गए_ मेरी चारों बेटियां एक स्लाइड वाला झूला झूलने लगीं जबकि मैं और मेरे पति पास ही की एक बेंच पर बैठकर बातें करने लगे_ तभी मेरी बड़ी बेटी दौड़ती हुई आई और कहने लगे कि मम्मा वहांँ झूले के पास कोई बच्चा रो रहा है…

ये सुनकर मैं बहुत हैरान हुई कि यहांँ तो आसपास कोई नजर नहीं आ रहा फिर ये बच्चा किसका रो रहा है..? मैं और मेरे पति जल्दी से झूले के पास पहुंचे_ वहां एक बच्चों वाली बास्केट रखी हुई थी उसके ऊपर का ढक्कन बंद था मेरे पति ने ढक्कन हटाया तो अंदर एक बहुत ही खूबसूरत बच्चा लेटा रो रहा था…

मेरे पति ने हैरानी से कहा : इतना खूबसूरत और प्यारा बच्चा कौन यहां छोड़ कर चला गया_ वो भी लड़का है…? ” लड़के ” का नाम सुनकर मैं तेजी से लपकी और उसे गोद में उठा लिया, मेरी गोद में आकर वो बिल्कुल चुप हो गया और मुझे मुस्कुरा मुस्कुरा कर देखने लगा_ मुझे उस बच्चे पर बहुत प्यार आ रहा था…

मेरे पति ने वहांँ के लोगों से मालूम भी किया_ चौकीदार से पूछा, लेकिन सब ने इंकार कर दिया कि हमें नहीं पता कि ये किसका बच्चा है..? चौकीदार ने पुलिस को फोन कर दिया_ कागजी कार्रवाई हुई और पुलिस ने कहा : ” अगर कोई इस बच्चे को लेना चाहे तो ठीक है_ वरना इसे चाइल्ड होम में दे दिया जाए…

मुझे इस बच्चे पर बहुत प्यार आ रहा था, मैंने अपने पति से कहा : ” कुछ भी हो हम इस बच्चे को अपने बेटे की तरह पालेंगे_ हम इसे चाइल्ड होम में नहीं देंगे_ और शायद ये ईश्वर की तरफ से हमें बेटे की शक्ल में एक गिफ्ट मिला है, ये मेरी दुआओं और मन्नतों के बदले मेरे नसीब आया है_ ये मेरी जान_ मेरा दुलारा_ मेरे जिगर का टुकड़ा_ और मेरा बच्चा है.. मैं उसे बहुत प्यार करने लगी_ वो भी मेरी गोद में ऐसे लिपट रहा था जैसे हकीकत में मेरा ही बच्चा हो…

हम उस बच्चे को लेकर घर आ गए_ मेरी बेटियां भी अपने नन्हे से भाई को देखकर बहुत खुश थीं वो उसे बैठी खिला रहीं थीं.. मेरे शौहर भी बहुत खुश थे लेकिन वो कुछ खामोश से थें… मैंने उनको देखते हुए पूछा : ” आप इतना खामोश क्यों है..? उन्होंने जवाब दिया : ” मैं तुम्हारा इस बच्चे के साथ प्यार देखकर डर रहा हूं कि कहीं ये किसी और का बच्चा हुआ और वो लेने आ गया तो फिर शायद तुम वो बर्दाश्त ना कर सकोगी…

मैंने कहा : अरे छोड़ो ये बातें_ ये मेरा बच्चा है_ ऐसा कुछ नहीं होगा_ आप परेशान ना हों_ ईश्वर की कृपा से सब ठीक हो जाएगा_ ईश्वर ने हमारे घर में अब तो खुशियां ही खुशियां दे दी हैं..

मैंने उस बच्चे का नाम ” साहिल ” रखा_ साहिल की एक बात बहुत अजीब थी कि वो सारा दिन तो हम लोगों के साथ खेलता रहता लेकिन अब सोने का वक्त होता तो वो हम लोगों के पास नहीं सोता था बल्कि जब तक उसको उसी बास्केट में ना लिटाया जाता उसे नींद नहीं आती थी…

शाम का वक्त था मैं साहिल को अपनी गोद में लिए बैठी प्यार कर रही थी कि अचानक कमरे का दरवाजा खुला और मकान मालिक अंदर आया_ वो बहुत गुस्से में चिल्लाने लगा कि तुम लोगों ने अभी तक घर का किराया नहीं दिया है अगर कल शाम तक तुम लोगों ने किराया नहीं दिया तो तुम लोगों का सामान इस घर से निकाल कर बाहर फेंक दूंगा..

ये सुनकर मैं बहुत परेशान हो गई_ क्योंकि घर का किराया भी दस हजार रूपए महीना था_ हमारी आमदनी बहुत कम थी_ घर का खर्चा ही बहुत मुश्किल से चलता था और अब तीन महीने का किराया भी हम लोगों को देना था_ मतलब तीस हजार रुपए…

इस बात को लेकर मैं बहुत परेशान बैठी थी, मैंने उठकर साहिल को बास्केट में लिटाया और किचन में जाकर खाना बनाने लगी, थोड़ी देर के बाद जब मेरे पति आएं तो मैंने उन्हें सब बता दिया कि मकान मालिक ने ऐसी ऐसी बातें कही है.. ये सुनकर वो भी परेशान हो गए और अपना सर पकड़कर बैठ गए कि अब ये तीस हजार रुपए कहांँ से लाएंगे…

सर्दियों का मौसम था_ रात के 8:00 बज रहे थे, सारे बच्चे दूसरे कमरे में खेल रहे थें, हम पति-पत्नी किराए की टेंशन में खामोश बैठे थें तभी अचानक बास्केट में साहिल रोने लगा, मैं उठी और साहिल को गोद उठाकर सोफे की तरफ आने लगी_ तभी मेरी नजर बास्केट पर पड़े तो उसमें हजा़र हजा़र नोटों की गड्डियांँ रखी हुई थी, मैं ये देखकर बहुत हैरान हुई मैंने अपने पति को दिखाया तो वो भी हैरान हुए और वो पैसे उठाकर गिनने लगे_ वो पूरे एक लाख रुपए थें..

मैं बड़ा हैरान हुई कि बास्केट में पैसे कहांँ से आ गए_ मैं तो रोजाना बास्केट को साफ करती हूंँ मुझे तो कभी ऐसा कुछ नजर ना आया.. अगली सुबह हमने मकान मालिक को तीस हजार रुपए किराए के दे दिए और सत्तर हजार रुपए फिर भी हमारे पास बच गए, हमनें उन पैसों से रेफ्रिजरेटर और वाशिंग मशीन खरीद ली क्योंकि सर्दियों में ठंडे पानी से कपड़े धोने में हाथ कटे जाते थे..

मैंने साहिल को गोद में उठा लिया और उसे प्यार करने लगी और कहने लगी कि तुम इतने छोटे हो फिर भी तुमने हमारी बहुत बड़ी मुसीबत हल कर दी तुम कितने अच्छी हो… मेरे पति मुझसे बार-बार कह रहे थें कि वो सब तो ठीक है लेकिन पहले यह मालूम करो कि ये पैसे यहांँ आएं कैसे _ कहीं ये बच्चा जिन्नात तो नहीं है_? मुझे इस बच्चे पर पहले ही दिन से शक हो रहा है..?

मैंने कहा : ” आप भी अजीब अजीब बातें करते हैं_ एक तरफ मेरे प्यारे बच्चे ने हमारी मुसीबत हल कर दी और दूसरी तरफ आप हैं कि ऐसी बातें कर रहे हैं_ मेरे बच्चे को ऐसी वैसी बातें ना कहें_ वो बहुत अच्छा है..

मैं अपनी सारी बातें अपने बेटे साहिल को बताती थी_ हमें बराबर बास्केट से पैसे मिल रहे थें_ यहां तक कि हमने अपना घर बनवा लिया और अपना कारोबार भी शुरू कर दिया_ घर में पैसों की कोई कमी नहीं रहती थी, साहिल 4 साल का हो चुका था और अब वो भी अपनी बहनों के साथ स्कूल जाने लगा था_ हमारी जिंदगी बहुत खुशियों से गुजर रही थी..

लेकिन अचानक एक दिन रास्ता चलते ट्रक से हम पति-पत्नी का एक्सीडेंट हो गया, मेरे पति की उसी वक्त मौत हो गई और मुझे भी बहुत चोट लगी यहांँ तक की मेरी जुबान तक कट गई_ कई दिनों तक मैं हॉस्पिटल में भर्ती रही फिर मुझे घर लाया गया_ पति की मौत का सदमा मुझ पर बहुत ज्यादा था हर वक्त मेरी आंखों से आंसू बहा करते थे_ मेरी जुबान भी कट चुकी थी इसलिए मैं अपना दर्द भी अब किसी से बयान नहीं कर सकती थी…

मेरे वो रिश्तेदार जिन्होंने हम लोगों को कभी घर से निकाल दिया था और उन्हीं की वजह से हमारी ये हालत हुई थी कि हम किराए के मकान में रहने पर मजबूर थें उन्होंने मौका अच्छा देखकर मेरे घर ही में डेरा डाल दिया था, हमदर्दी के नाम पर वो हमारी जायदाद पर कब्जा करते जमाते जा रहे थें, मैं बिल्कुल बेबस थी_ मेरा साहिल बहुत छोटा था…

उन लोगों ने हमारे कारोबार को भी अपने हाथ में ले लिया_ मेरे बच्चों को खाना तक नसीब नहीं होता था_ मेरा साहिल कई कई दिन भूखा मेरे पास पड़ा रहता था, मेरी बेटियां कई रोज से भूखी सो रही थी..

एक रात साहिल मेरी गोद में लेटा सो रहा था तभी मेरी आंखों से आंसू बहने लगे, मेरे आंसुओं की वजह से साहिल की आंख खुली_ तो वो अपने छोटे छोटे हाथों से मेरे आंसू पोछने लगा, मैं अपने साहिल को अपने दिल का दर्द बताना चाह रही थी लेकिन मेरी जुबान कट चुकी थी मैं बोल नहीं सकती थी_ मेरा साहिल मेरे आंसू पोछ रहा था, जैसे-जैसे वो मेरे आंसू पोछ रहा था मुझे और ज्यादा रोना आ रहा था, मैं अपने बच्चों की ये हालत देखकर बहुत परेशान थी..

तभी अचानक साहिल ने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा : माम्मा मैं समझ रहा हूंँ आप जो कहना चाहती हो_ आप परेशान ना हो मैं सिर्फ अब्बा के 40वें का इंतजार कर रहा हूंँ, किसी तरह अब्बा का 40वां गुजर जाए फिर देखना मैं इन दुश्मन रिश्तेदारों को घर से कैसे निकाल दूंगा..

साहिल की ये बातें सुनकर मैं हैरान रह गई_ वो तो अभी बहुत छोटा था लेकिन ऐसी बातें कर रहा था जैसे बहुत बड़ा हो गया हो, मैंने उसको हाथ बढ़ाकर छुआ तो उसने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा : मम्मा ! अब्बा जी मुझे पहचान गए थे लेकिन आप नहीं पहचान पाई थीं_ मैं एक जिन्नात हूंँ_ मेरी मां उसी घर में रहा करती थी जहां आप लोग किराए पर रहते थे, मेरी मां आपको रोजाना रात में ईश्वर से एक बेटा मांगते देखा करती थी, इसलिए मेरी मां ने अपने बेटों में से एक बेटा आपको दे दिया..

मम्मा ! आपकी नजर में मैं 4 साल का हूंँ लेकिन हकीकत में मैं 20 साल का हो चुका हूंँ_ मां मैं आपका बेटा हूं आपका साहिल ये मेरी बहनें हैं आप परेशान ना हो अब्बा के 40वें के बाद देखना मैं कैसे बेटे होने का हक़ अदा करता हूं_ आप परेशान ना हो मैं अपनी बहनों के लिए बड़ा भाई बनकर सारे हक अदा करूंगा उनको कोई परेशानी नहीं होने दूंगा..

..मेरी मांँ रोजाना मुझसे उसी बास्केट में मिलने आती है इसीलिए बचपन में मैं हमेशा उसी बास्केट में सोता था_ आप लोगों को बास्केट से जो पैसे मिलते हैं वो मेरी मांँ ही आप लोगों की मदद करती है…

साहिल की ये बातें सुनकर मेरे अंदर एक सुकून सा दौड़ गया_ उसके जिन्नात होने से मुझे कोई डर नहीं लग रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे जीने का एक सहारा मिल गया हो _ मुझे यकीन हो गया था कि मेरा साहिल जरूर मेरी बच्चियों का ख्याल रखेगा…

साहिल ने मेरे सामने ही अपना रूप बदला और एक 20 साल का लड़का बनकर खड़ा हो गया और कहने लगा : ” मम्मा ! अब मैं इस शक्ल में आऊंगा और आप लोगों की मदद करूंगा आप परेशान ना हो_ मैं सब संभाल लूंगा…

फिर साहिल ने हकीकत में बेटे होने का हक अदा कर दिया, उसने सारे रिश्तेदारों से हमारी जान छुड़ा दी और अपनी बहनों का ऐसे ख्याल रखने लगा जैसे उनका बड़ा भाई हो.. एक दिन मेरी बड़ी बेटी ने मुझसे आकर कहा : ” मम्मा ! ये हमारे घर में 20 साल का लड़का कौन रहता है_? लेकिन ये जो भी है हम लोगों का ख्याल बहुत रखता है इसने हमारी सारी मुसीबतें खत्म कर दी हैं…

कई साल गुजर गए_ मेरी तबीयत अब कुछ ठीक हो गई थी और मैं चलने फिरने के काबिल हो चुकी थी, साहिल ने मेरी चारों लड़कियों की शादी बहुत अच्छे घरानो में धूमधाम से कराई_ उनके दहेज में कोई कमी नहीं आने दी…

एक दिन शाम को साहिल ने मुझसे आकर कहा : मम्मा ! अब मैं भी अपने घर जाना चाहता हूंँ ताकि शादी करके अपना घर बसा सकूं_ लेकिन मम्मा आप परेशान ना होना मैं हर रात आपसे जरूर मिलने आऊंगा_ मैं आपको एक तोहफा देकर जा रहा हूं.. इतना कहकर साहिल ने मेरे हाथों में एक अंगूठी पहना दी और कहा..

” माम्मा ! आपको जब भी मेरी याद आए इस अंगूठी को अपनी जुबान पर लगा देना मैं हाजिर हो जाऊंगा_ आपका प्यारा सा साहिल… इतना कहते हुए साहिल मेरे गले से लिपट गया और फिर ना जाने कहां धुआं बनकर गायब हो गया..

…मेरा नन्हां सा साहिल…..💔😔

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