अंधी लड़की और आशिक़ जिन्न💀 | Hindi horror story

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  जी़नत एक बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लड़की थी लेकिन किस्मत ने उसकी आंखे छीन ली थी, 3 साल पहले एक कार एक्सीडेंट से उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी; बाप की तो बचपन ही में मौत हो गई थी एक दुखियारी मां ही उसका सहारा था लेकिन वो माँ भी बीमारियों की वजह से अक्सर बिस्तर पर पड़ी रहती थी..

कई- कई दिन गुजर जाते घर में खाने को कुछ नहीं होता था, जी़नत अपनी बीमार मांँ के पास बैठी अक्सर रोया करती थी, वो कुछ करना चाहती थी लेकिन उसकी आंखों ने उसका साथ ना दिया_ बगैर आंखों के वो क्या कर सकती थी…?

आज जी़नत बिस्तर पर लेटी बहुत ज्यादा रो रही थी क्योंकि मोहल्ले के कुछ आवारा लड़कों ने उसे बाहर खड़ा देख गलत तरह छेड़ा था, वो दो दिनों से भूखी भी थी, अचानक उसे अपने पास किसी की मौजूदगी का एहसास हुआ_ वो डर कर उठ बैठी और अपनी छड़ी ढूंढने लगी_ उसकी आवाज में खौफ था_ वो बार-बार कहे जा रही थी कि ” तुम जो भी हो मुझे माफ कर दो_ मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है_ तुम लोग मुझे क्यों छोड़ते हो..?

जी़नत को लग रहा था कि मोहल्ले के वही आवारा लड़कें उसके घर में फांद आएं हैं और उसके साथ बदतमीजी करना चाहतें हैं_ तभी अचानक जी़नत के कानों में एक आवाज पड़ी_ ” डरो ना जी़नत मैं तुम्हारी मदद करने आया हूंँ” ये किसी अनजान लड़के की आवाज थी.. जी़नत बहुत ज़्यादा घबरा गई और कहने लगी : ” मुझे किसी की मदद नहीं चाहिएआप कौन हैं ?_ और मेरे कमरे के अंदर कैसे आ गए_ प्लीज यहांँ से चले जाओ, मुझे बहुत डर लग रहा है, मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूंँ… ये कहते हुए जी़नत की आंखों से आंसू बहने लगे…

उस लड़के ने कहा : ” घबराओ नहीं जी़नत, मैं तुम्हें एक ऐसा तरीका बताऊंगा जिसकी वजह से तुम्हारी आंखें ठीक हो जाएंगी, तुम अंधी नहीं हो बल्कि जादू के जरिए तुमको अंधा किया गया है, तुम्हारी ही एक दोस्त ने तुम्हारे ऊपर जादू करवाया है, इसीलिए तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था और तुम्हारी आंखें चली गई थी “…

ये सुनकर जी़नत के तो होश उड़ गए_ उसने डरती हुई आवाज में पूछा : आखिर तुम कौन हो और तुम्हें मेरे बारे में कैसे मालूम है..? उस लड़के ने जवाब दिया : जी़नत ! मैं एक जिन्नात हूंँ_ मैं पिछले 3 सालों से तुमसे बहुत मुहब्बत करने लगा हूँ मुझे मालूम हो गया था कि तुम पर जादू कराया गया है और मैं तुम्हारी मदद करना चाहता था लेकिन किसी मजबूरी की वजह से मैं तुमसे पिछले 3 सालों से नहीं मिल पाया आज मौका पाकर मैं तुम्हारे पास आया हूंँ…

ये सुनकर जी़नत को जैसे एक नई जिंदगी मिल गई हो_ उसके चेहरे पर एक हसीन मुस्कान थी_ वो खुश होकर कहे जा रही थी :” क्या मेरी आंखें ठीक हो जाएंगी ?_ क्या मैं भी देख पाऊंगी ?_ तुम मुझे ठीक कर दोगे ना..?

उस जिन्न लड़के ने कहा : हांँ जी़नत, मैं तुम्हें खुश देखना चाहता हूंँ, मैं तुम्हें जरूर ठीक कर दूंगा_ तुम्हारी जिंदगी की सारी मुश्किलें खत्म कर दूंगा_ मैं तुम्हें इस दुनिया की हर खुशी लाकर दूंगा_ बस तुम इसी तरह मुस्कुराती रहना..

ज़ीनत ने उससे पूछा : तुम्हारा नाम क्या है..? उसने बताया : मेरा नाम ” तैमूर ” है

तैमूर ने ज़ीनत से कहा : ” तुम्हे अभी मेरे साथ एक जंगल में चलना होगा, वहांँ एक पुराने कुए के अंदर तुम्हारे बालों और चप्पलों के ऊपर जादू करके लटकाया गया है, तुम्हें उसे निकालकर अलग कर देना है _ इस तरह तुम पर हुआ जादू खत्म हो जाएगा और तुम्हारी आंखें वापस आ जाएंगी…

अगले ही पल जी़नत तैमूर के साथ किसी अनजान जंगल में खड़ी थी, तैमूर ने जी़नत के हाथों में एक डोरी पकड़ाते हुए कहा : जी़नत ! तुम्हारे सामने वही कुआं है जिसमें तुम्हारे बालों और चप्पलों पर जादू करके अंदर लटकाया गया है ये डोरी खींचो इसी में वो जादू की चीजें लटकी हुई हैं_ ये काम तुम्हें खुद करना होगा_ मैं नहीं कर सकता…

ज़ीनत ने डोरी खींची तो नीचे से एक डिब्बे की तरह कोई चीज उसके हाथ में आकर लगी, उसने वो डिब्बा खोला तो उसमें हकीकत में उसका चप्पल और कुछ बाल थें, उसने उन दोनों को अलग करना चाहा लेकिन तभी अचानक पूरे जंगल में खौफनाक आवाजें गूंजने लगी ऐसा लग रहा था जैसे बहुत से लोग दूर से दौड़ते हुए आ रहे हैं…

तभी तैमूर की आवाज ज़ीनत के कानों में पड़ी : ” ज़ीनत ! जल्दी से इन बालों को चप्पल से अलग कर दो वरना यहांँ बहुत सी आत्माएं आ जाएंगी और तुम्हें मार डालेंगी..” जीनत ने जल्दी से बालों को चप्पल से जुदा कर दिया और फिर हर तरफ सन्नाटा सफल गया…

ज़ीनत की आंखों में जलन होने लगी और उसने अपने हाथ आंखों पर रख लिए, तैमूर ज़ीनत के पास खड़ा कह रहा था : ज़ीनत ! दो मिनट तक अपनी आंखें मत खोलना_ तुम बिल्कुल ठीक हो चुकी हो…

जब दो मिनट के बाद जी़नत ने अपनी आंखें खोली तो वो अपने कमरे में मौजूद थी, उसके सामने एक बहुत ही खूबसूरत लड़का खड़ा मुस्कुरा रहा था.. ” जी़नत ! क्या तुम मुझे देख सकती हो..? तैमूर ने ज़ीनत की तरफ बढ़ते हुए कहा..

ज़ीनत को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था_ उसे सब कुछ नजर आ रहा था उसकी आंखें ठीक हो चुकी थीं, तैमूर ज़ीनत के पास खड़ा मुस्कुरा रहा था, जीनत ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा : तुम ही तैमूर हो..? तैमूर ने जवाब दिया : हां ज़ीनत, मैं ही तुम्हारा तैमूर हूंँ तुम्हारा सच्चा आशिक… ज़ीनत ने आगे बढ़कर तैमूर को गले से लगा लिया उसकी आंखों से आंसू बहने लगें…

सुबह होने वाली थी_ तैमूर ने कहा : मुझे अब जाना होगा क्योंकि सूरज निकलने वाला है और अगर उसकी रोशनी मुझ पर पड़ गई तो मैं जलकर राख हो जाऊंगा मैं रात में फिर से आऊंगा_ मेरी प्यारी सी ज़ीनत..! उसने ज़ीनत का हाथ चूमते हुए कहा, जीनत ने भी मुस्कुराते हुए कहा : ” हाँ, मैं इंतजार करूंगी..”

सुबह जब जीनत ने अपनी मां को बताया कि मेरी आंखें वापस आ गई हैं तो वो भी बहुत ज्यादा खुश हुई क्योंकि उसकी मां हमेशा इस बात को सोच सोच कर परेशान रहती थी कि मेरे बाद मेरी इस बच्ची का क्या होगा उसके पास तो आंखें भी नहीं है..? लेकिन अब ज़ीनत की आंखें ठीक हो चुकी थीं_ वो दुनिया देख सकती थी और अपनी मांँ के लिए सहारा बन सकती थी.. ज़ीनत बहुत खुश थी और शाम होने का इंतजार कर रही थी ताकि जल्दी से वो तैमूर से मिल सके…

अगली रात जब तैमूर उसके पास आया तो उसके हाथों में बहुत से तोहफ़े थें, उसने ज़ीनत को वो तोहफ़े देते हुए कहा : जीनत ! अब तुम्हारी जिंदगी की सारी परेशानियांँ खत्म हो जाएंगी, ये कुछ हीरे- जवाहरात हैं_ इन्हें बेच बेच कर सुकून से अपनी जिंदगी गुजारना और अपनी मां का इलाज भी करवा लेना…

ज़ीनत ने तैमूर के हाथों से वो थैला लिया और उसे खोलकर देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं_ उसमें बहुत कीमती- कीमती सोने चांदी के गहने, सिक्के और हीरे मोती भरे हुए थें, उसने जिंदगी में पहली बार इतनी कीमती चीजें देखी थीं..

जी़नत की जिंदगी बहुत सुकून से गुजरने लगी थी, उसकी मांँ भी इलाज कराने के बाद ठीक हो गई थी_ ज़ीनत रोजाना तैमूर से रातों में मिला करती थी और उससे बहुत मोहब्बत करने लगी थी.. इसी तरह एक साल गुजर गया…

एक दिन ज़ीनत बहुत देर तक तैमूर का इंतजार करती रही लेकिन वो ना आया, रात गुजरती जा रही थी लेकिन तैमूर का कुछ अता पता नहीं था, अगले कई दिनों तक तैमूर ज़ीनत के पास नहीं आया, ज़ीनत बहुत परेशान हो गई..

एक रात ज़ीनत ने देखा कि उसके घर के पास वाले घर से कोई लड़का बहुत तेजी से बाहर फांदा है_ ज़ीनत ने बहुत गौर से देखा तो वो लड़का तैमूर लग रहा था उसके साथ दो लोग और भी थें_ देखते ही देखते वो सब रास्ते में कहीं गायब हो गए.. तभी उस घर से चीखने- चिल्लाने की आवाज आने लगी_ मालूम करने पर पता चला की किसी ने उस घर की एक लड़की को मार डाला है…

अगले दिन फिर से मुहल्ले के 3 लड़कों को किसी ने गला काट कर मार डाला, ज़ीनत का शक यकीन में बदलने लगा था कि ये सब करने वाला तैमूर ही है_ क्योंकि उसने अपनी आंखों से तैमूर को उन घरों में फांदते देखा था और दस दिनों से तैमूर ज़ीनत के पास भी नहीं आ रहा था.. ” कहीं तैमूर कोई आदमखोर जिन्नात तो नहीं है..?” जीनत ने अपने दिल में सोचा_ ” लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है_ मेरा तैमूर तो बहुत अच्छा है…”

अगले दिन सुबह जब ज़ीनत अपनी मां के पास गई तो उसकी चीखें निकल पड़ी_ उसकी मां का गला भी किसी ने उसी तरह काट दिया था.. ज़ीनत उसे पकड़ कर रोने लगी_ उसे यकीन हो गया था कि ये सब करने वाला तैमूर ही है, वो तैमूर से नफरत करने लगी थी_, मोहल्ले वाले जमा हो गए थें, शाम तक नहला कर उसकी मांँ को दफन कर दिया गया था…

ज़ीनत का अब इस दुनिया में कोई नहीं बचा था_ वो अपने कमरे में बैठी रो रही थी तभी उसे तैमूर की आवाज सुनाई दी, वो उसके पास आया और कहने लगा परेशान ना हो ज़ीनत सब ठीक हो जाएगा..

ज़ीनत के दिल में तैमूर की नफरत बैठ चुकी थी उसने सोच लिया था कि जैसे इसने मेरी मां को तड़पा तड़पा कर मारा है मैं भी इसे मार डालूंगी.. अगले दिन ज़ीनत एक मौलवी साहब के पास गई और उनसे किसी जिन्नात को मारने का अमल मालूम करके घर वापस आ गई…

उस रात तैमूर बहुत देर से ज़ीनत के पास आया था_ रात के 3:30 बज रहे थें, ज़ीनत अभी तक बैठी उसका इंतजार कर रही थी, जीनत ने तैमूर से कहा : तुम अपनी आंखें बंद करो मैं तुम्हें कुछ देना चाहती हूंँ, तैमूर ने आंखें बंद कर ली तभी जीनत ने उसके चारों तरफ एक गोल घेरा खींचकर उस पर वो दम किया हुआ पानी डाल दिया_ तैमूर उस गोल घेरे के अंदर तड़पने लगा और जीनत से कहने लगा : जीनत ! तुम ये क्या कर रही हो ?_ क्या तुम मुझे मारना चाहती हो?… जीनत रो रही थी और कह रही थी कि तुमने मेरी मां को मार डाला है मैं भी तुम्हें मार डालूंगी…

तैमूर ने कहा : ज़ीनत ! मैंने किसी को नहीं मारा_ मैं तो तुमसे बहुत मोहब्बत करता हूंँ..” लेकिन ज़ीनत ने उसकी एक ना सुनी… तैमूर कह रहा था कि जल्दी से ये घेरा हटाओ वरना सूरज निकलने वाला है और उसकी रोशनी से मैं जलकर खत्म हो जाऊंगा..

ज़ीनत ने कहा : ” मैं यही चाहती हूंँ कि जैसे तुमने मेरी मांँ को तड़पा तड़पा कर मारा है ऐसे ही तुम भी मर जाओ..” सुबह जब सूरज निकला और उसकी रोशनी तैमूर पर पड़ी है तो वो घेरे के अंदर ही तड़पने लगा_ उसका जिस्म आग की लपट में जल रहा था.. तैमूर चीख चीखकर कह रहा था कि जीनत ! तुम मुझे बहुत याद करोगी_ मैं अपनी मोहब्बत में सच्चा हूंँ_ मैंने कुछ नहीं किया है मैंने तुम्हारी माँ को नहीं मारा है मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करता हूंँ…”

लेकिन ज़ीनत ने उसकी एक ना सुनी.. देखते-देखते तैमूर जलकर राख बन गया, ज़ीनत खुद को बहुत हल्का महसूस कर रही थी, वो दिल ही दिल में खुश थी कि उसने अपनी मां के का़तिल को मार डाला है…

लेकिन अगले दिन जब गांव में पुलिस ने आकर एलान किया कि गांव में जो कत्ल हुए हैं उनका क़ातिल पकड़ा जा चुका है_ ये तीन आदमखोर लड़के थें जो इंसानों का गला काटकर उनका खून पीते थें.. उन तीनों लड़कों को गांव के एक बड़े पेड़ से बांधकर रखा गया था, पुलिस भी मौजूद थी…

ये सब देखकर ज़ीनत के तो होश उड़ गए.. ” क्या मेरा तैमूर बेगुनाह था..? ” ज़ीनत ये बातें सोचते हुए अपने घर की तरफ जा रही थी, उसे तैमूर की वो बात बार-बार याद आ रही थी कि ” ज़ीनत ! तुम बहुत पछताओगी_ तुम्हें मेरी बहुत याद आएगी_ मैं बेगुनाह हूंँ मैंने तुम्हारी मां को नहीं मारा है_ मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करता हूँ…”

ज़ीनत अपने किए पर बहुत रो रही थी और चलती हुई सड़क की तरफ से घर जा रही थी_ उसे कुछ होश नहीं था_ तभी अचानक एक कार ने आकर उसे ठोकर मारी और वो दूर जाकर गिरी.. हर तरफ शोर मचने लगा, जब लोगों ने दौड़कर ज़ीनत को उठाना चाहा तो वो मर चुकी थी…

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