खूबसूरत लड़का और आशिक़ चुड़ैल 😱| Hindi Horror Story

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…ये उन दिनों की बात है जब मेरी उम्र 23 साल के करीब थी, मैं बहुत बुरा लड़का था, रोजाना किसी मॉडल या लड़की को अपने बेडरूम में लाता और उसके साथ पूरी रात गुजारता.. मैं बहुत गुनाह करता था.. मैं अपने बाप का पैसा पानी की तरह बहाता था इसी वजह से मेरे बाप का बिजनेस डाउन होता चला गया..

मैं MBA कर रहा था और हॉस्टल के बाहर अलग अपना कमरा लेकर रहता था, मेरी खूबसूरती की वजह से एक-दो मुलाकातों में ही शबाना मेरी अच्छी दोस्त बन चुकी थी, रात के वहीं कुछ 12:00 बज रहे थे कि मुझे अपने कमरे के दरवाजे पर दस्तक महसूस हुई.. मैंने दौड़ कर दरवाजा खोला तो हर तरह के मेकअप के साथ शबाना दरवाजे के सामने खड़ी थी.. मैंने हाथ के इशारे से उसे अंदर बुलाया और वो एक खूबसूरत अदा के साथ चलती हुई बेड पर आकर बैठ गई…

मैंने वो रात उसके साथ गुजारी… सुबह 6:00 बजे जब मेरी आंख खुली तो मैंने शबाना को जगाना मुनासिब न समझा, वैसे भी आज Sunday था और शबाना को कालेज से छुट्टी थी, मैं जल्दी से तैयार होकर अपने एक जरूरी काम के लिए निकल गया, शाम को लौटते मुझे काफी देर हो गई, मैं बहुत थक चुका था इसलिए मैं थोड़ा सस्तानें के लिए अपने बेड पर लेट गया, थकावट की वजह से मेरी आंख लग गई..

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ये किसी जवान लड़की का जिस्म था जो मुझे छू रही थी, उसी वजह से मेरी आंख खुली.. कमरे में अंधेरा था सिर्फ नाइट बल्ब जल रहा था, मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया, अचानक मुझे महसूस हुआ कि उस लड़की का चेहरा पत्थर की तरह सख्त है जिसको चूमने की वजह से मेरा मुंह का मजा कड़वा हो चुका था..

डर कर मैंने आंखें खोली और नाइट बल्ब की कम रोशनी में उसके चेहरे की तरफ देखा, तो मेरी चीखें निकल पड़ी क्योंकि उसके चेहरे पर सिर्फ हड्डियों का ढांचा था और उसके दो बड़े बड़े नुकीले पंजे थे; बाकी पूरा जिस्म किसी लड़की ही का था.. उसने मुझे ऐसी मजबूरी से जकड़ रखा था कि मेरा दम घुंटा जा रहा था.. मैंने झटके से खुद को उससे दूर करना चाहा मगर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी.. वो चुड़ैल किसी जुनूनी लड़की की तरह मेरे जिस्म को नोच रही थी.. कोई आधे घंटे के बाद उसके मन की आग बुझी तो उसने मुझे छोड़ा…

मैं झटके से उससे दूर हो गया, डर की वजह से मेरा पूरा जिस्म कांप रहा था, अचानक उसी वक्त लाइट आ गई तो मैंने डरती हुई नजरों से बेड की तरफ देखा, मगर बेड तो बिल्कुल खाली पड़ा था..

मेरे पूरे जिस्म में दर्द हो रहा था, रात में मुझे तेज बुखार हो गया इसी वजह से मैं सुबह कॉलेज नहीं जा पाया… सुबह 8:00 बजे शबाना डॉक्टर के साथ मेरे कमरे में मौजूद थी, डॉक्टर ने मुझे कुछ दवाई लिख दी और कहा कि ज्यादा मेहनत की वजह से बुखार हो गया है.. घबराने की जरूरत नहीं है जल्दी ठीक हो जाओगे..

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डॉक्टर चले गए, शबाना ने मुझसे कहा कि तुम आराम करो मैं अभी बाजार से तुम्हारी दवा लेकर आती हूंँ.. इतना कहकर वो भी चली गई ; मुझे बहुत तेज प्यास लग रही थी, मेरी हलक सूख रही थी, पानी पीने के लिए मैं बिस्तर से उठा लेकिन कमजोरी की वजह से चक्कर खाकर गिर गया, मैं किसी तरह दीवार का सहारा लेकर फ्रिज तक पहुंचा और बोतल निकाल कर अपने मुंह में लगा ली..

अभी मैंने बोतल से पहला ही घूंट पिया था कि मुझे एहसास हो गया कि ये पानी नहीं है.. जैसे ही मैंने पानी अपने हाथों पर गिराया तो मेरी चीख निकल पड़ी क्योंकि उसमें तो खून भरा था.. किसी तरह दीवार का सहारा लेकर नल के पास गया और उसको खोला, तो फिर से मुझे एक बड़ा झटका लगा क्योंकि नल से भी बराबर खून ही आ रहा था..

थोड़ी देर के बाद शबाना दवा लेकर आ गई मैंने उसे सारी आपबीती सुना डाली, जैसे-जैसे मैं उसे आपबीती अपनी सुना रहा था उसके चेहरे का रंग बदलता जा रहा था.. अचानक शबाना का चेहरा उसी डरावनी चुड़ैल की शक्ल में बदल गया और वो बड़ी भयानक तरह हंसने लगी, उसके हंसने की आवाज कमरे में गूंज रही थी.. वो कह रही थी ” मैं ही वो चुड़ैल हूंँ जो बरसों से तुम्हारी प्यासी हूंँ..”

इतना कहकर वह जुनूनी औरत की तरह मेरे ऊपर लेट गई, मैं बिल्कुल बेबस था.. डर की वजह से मैं बेहोश हो गया; जब मुझे होश आया तो शाम के 5:00 बज रहे थे, कमरे में थोड़ा थोड़ा अंधेरा सा था.. कमरे का दरवाजा खुला था जिसका साफ मतलब था कि शबाना अपनी प्यास बुझा कर जा चुकी थी…

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मैं किसी तरह बिस्तर से उठा और अपना मोबाइल उठा कर पिताजी को फोन किया; और रोते हुए उन्हें अपनी पूरी हालत बता दी.. पिताजी ने मुझे तसल्ली दी और कहा : ” बेटा अपने आप को संभाले रखो मैं आज शाम की ही फ्लाइट से लखनऊ आ रहा हूं तुम परेशान ना होना.. बुखार की वजह से मेरा पूरा जिस्म आग की तरह जल रहा था,

पिताजी की बातों से दिल को तसल्ली हुई ; मगर आज की रात तो मुझे अकेले ही बसर करनी थी, अगर इस दौरान शबाना आ गई तो मुझमें इतनी ताकत नहीं थी कि मैं उसकी प्यास बुझा सकता; वो तो कोई बरसों की प्यासी आत्मा थी.. इसलिए मैंने पक्का इरादा किया कि आज मैं किसी होटल में किराए पर कमरा लेकर रात गुजारुंगा..

मैंने अपने कमरे का दरवाजा लॉक किया और बाहर निकल गया.. ये शहर का सबसे बड़ा होटल था जहांँ मैं इस वक्त खड़ा था ; काउंटर पर पेमेंट करके मैंने एक कमरे की चाबी ली और अपने कमरे चला गया, अंदर जाकर मैं बेड पर लेट गया, उस वक्त भी मेरा जिसम बुखार से जल रहा था.. थोड़ी ही देर के बाद एक नौजवान लड़की कमरे में आई : ” सर ! खाने में क्या पसंद करेंगे..?” लड़की ने बड़ी अच्छी तरह पूछा..

“चाय का एक कप पिला दीजिए.. खाना शायद मैं ना खा सकूं…” मैंने कहा तो वो लड़की “Ok सर” कहकर कमरे से बाहर निकल गई.. थोड़ी देर के बाद कमरे का दरवाजा खुला और वही लड़की चाय की ट्रे लेकर कमरे में आई ; उसने चाय बनाना चाही लेकिन मैंने उसे मना कर दिया.. ” सर किसी और चीज की जरूरत हो कॉल कर लीजिएगा..” ये कहकर वो वापस लौट गई…

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चाय पीते हुए मैंने पिताजी को फोन किया और उन्हें होटल का नाम और कमरे का नंबर लिखा दिया, ताकि वो सीधे होटल आ जाएं.. रात बहुत ज्यादा गुजर चुकी थी लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी और बुखार की वजह से जिसम ने दर्द भी बहुत हो रहा था ; पूरे होटल में सन्नाटा था.. उसी वक्त अचानक मेरे कमरे का दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया ; इससे पहले कि मैं कुछ समझता शबाना कमरे में दाखिल हो गई, डर की वजह से मेरी आवाज भी ना निकल सकी, इससे पहले कि मैं होटल के स्टाफ को फोन करता शबाना मेरे पास पहुंच चुकी थी, उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा :

“तुम क्या समझते हो कि तुम मुझसे भाग जाओगे ; ये तुम्हारी भूल है..” उसने डरावनी आवाज में हंसते हुए कहा, मैं बेहोश हो गया.. जब मुझे होश आया तो मैंने खुद को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पाया, वहां डॉक्टर के साथ पिताजी भी मौजूद थे, मेरे जिस्म पर जगह जगह नोचने के निशान थे जिसका मतलब था कि शबाना अपना काम करके जा चुकी थी…

शाम को पिताजी एक मौलवी साहब को अपने साथ ले आए, इससे पहले कि मैं उनको कुछ बताता उन्होंने हाथ के इशारे से मुझे रोकते हुए कहा कि तुम्हारे पिताजी ने मुझे सब कुछ बता दिया है तुम परेशान ना हो आज तुम पूरी तरह सही हो जाओगे..

उन मौलवी साहब के साथ हम लोगों ने मगरिब की नमाज पढ़ी, आज कई सालों के बाद मैंने नमाज पढ़ी थी, दुआ में रोते हुए मैंने हाथ उठाएं और अल्लाह से माफी मांगते हुए कहा कि मुझे इस मुसीबत से बचा लो.. अब मैं ये गुनाहों वाली जिंदगी हमेशा के लिए छोड़ दूंगा..

वो मौलवी साहब हमें अपने घर ले आएं और एक कमरे में हमें बिठा दिया, और खुद सामने बैठकर कुछ पढ़ने लगे.. पिताजी सामने सोफे पर बैठे थे ; आधी रात गुजर चुकी थी… अचानक कमरे का दरवाजा खुला और शबाना कमरे में दाखिल हुई..

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उसकी लाल लाल डरावनी आंखें देखकर मैं सहम सा गया था, वो धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ रही थी ; मौलवी साहब कुछ पढ़ने में लगे थे, शबाना ने अभी तक मौलवी साहब को नहीं देखा था.. वो मेरे करीब आई और एक जुनूनी लड़की की तरह मुझसे लिपट गई.. उसकी पकड़ से मुझे महसूस हो रहा था जैसे मेरी जान निकल जाएगी, डर की वजह से मैं फिर बेहोश हो गया..

जब मुझे होश आया तो फजिर की अजान हो रही थी, वो मौलवी साहब उसी तरह बैठे कुछ पढ़ रहे थे, पिताजी मेरे सर की तरफ खड़े थे, मैं उठा और नहा कर नमाज पढ़ी.. नमाज के बाद मैं खुद को बहुत हल्का महसूस कर रहा था, ना ही जिसम में दर्द हो रहा था और और ना ही मेरे जिस्म पर किसी तरह के नोचने के निशान थे..

मौलवी साहब ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा : “बेटा ! शबाना एक जिन्नात लड़की बन चुकी थी, कुछ महीने पहले तुम किसी जंगल में एक शबाना नाम की लड़की के साथ लेटे थे उस समय एक जिन्नात लड़की पास के ही पेड़ पर मौजूद थी, तुम्हारी खूबसूरती देखकर वो तुम पर फिदा हो गई, इसीलिए उसने शबाना को मार दिया और उसके अंदर समा गई, और शबाना बनकर तुमको परेशान कर रही थी.. अब वो हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है, लेकिन बेटा ! अब तुम शादी कर लो और ये गुनाहों वाली जिंदगी छोड़ दो…

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