दो भाईयों का बुरा अंजाम – सच्ची डरावनी कहानी😱 | Hindi Real Horror Story

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ये दो भाइयों की सच्ची कहानी है, बड़े भाई का नाम ” रेहान ” और छोटे भाई का नाम ” फैसल ” था, वो दोनों कानपुर के एक गांव “वाड़ा” में रहा करते थे_ उनके मां-बाप को मरे हुए 10 साल बीत चुके थे_ घर में बिल्कुल सन्नाटा रहता था.. ये दोनों भाई घर के बाहर बने गाय भैंस के बाड़े में दिन भर काम करते थे_ उनके पास 40 से ज्यादा गाय भैंस थीं_ वो उनका चारा पानी करते और दूध निकाल कर बेचते थे…

दोनों भाई एक दूसरे से बहुत मोहब्बत करते थे_ लेकिन उनके कुछ रिश्तेदार इन दोनों भाइयों की एकता व प्यार से बहुत जलते थे, और हमेशा कोशिश में रहते कि किसी तरह इनको कोई नुकसान पहुंचा दें…

एक दिन छोटे भाई फैसल ने रेहान से कहा : भाई मुझे लगता है अब आप शादी कर लें_ क्योंकि अम्मी अब्बू के बाद घर में बहुत सन्नाटा रहता है और मैं भी चाहता हूं कि अब होटल का खाना छोड़ कर मैं अपनी भाभी के हाथों का खाना खाऊं, फैसल ने मुस्कुराते हुए कहा..

रेहान ने जवाब दिया : हांँ यार_ मेरा भी यही कुछ इरादा है… फैसल ने कहा : तो भाई देर किस बात की_ आज ही शाम को आप फूफी के घर जाएं और उनसे कहें कि कोई अच्छा सा रिश्ता देखकर आपकी शादी करा दें… रेहान राजी हो गया और शाम को दोनों फूफी के घर चले गए…

Hindi Real Horror Story

जब ये दोनों भाई अपने घर में ताला लगाकर फूफी के घर गए हुए थे तो उनके वही रिश्तेदार जो इन दोनों से नफरत करते थे चुपके से एक जादूगर को उनके घर में पीछे की तरफ से ले आएं.. जादूगर ने उनके घर में हिरन का खून टपकाया_ अलमारी से उन दोनों के कुछ कपड़े लिए और ये सब घर से निकल गए…

जब यह दोनों भाई शाम को घर वापस आए_ और घर की हालत देखी तो फैसल ने कहा : भाई ! आपको ऐसा नहीं लग रहा कि हमारे जाने के बाद कोई हमारे घर में आया है_ क्योंकि घर का सामान बिखरा पड़ा है_ अलमारी भी खुली पड़ी है और मेरे कुछ कपड़े भी अलमारी से गायब हैं… रेहान ने देखा तो उसने भी कहा : हांँ , मुझे भी यही लगता है क्योंकि मेरे भी कई कपड़े गायब हैं_ और ये आंगन में खून कैसा पड़ा है…? रेहान ने आंगन की तरफ देखते हुए कहा,

वो दोनों भाई समझ नहीं पा रहे थें कि आखिर ये सब किसने किया होगा..? क्योंकि घर का जरूरी सामान तो अपनी जगह मौजूद था_ बस कुछ कपड़े गायब थे.. फैसल ने कहा : भाई मुझे तो लगता है कि हमारे जाने के बाद घर में कोई पागल घुस आया होगा इसीलिए तो उसने अलमारी से पैसे नहीं निकालें हैं, बल्कि पुराने कपड़े लेकर भाग गया_ वरना आजकल तो चोर सबसे पहले घर में पैसा ढूंढते हैं.. रेहान ने कहा : हाँ यार, मुझे भी यही लगता है…

चलो छोड़ो_ हमारे कपड़ों से किसी गरीब का भला हो जाए इससे अच्छी क्या बात है… सुनो अब रात होने होने लगी है तो खाना खाकर हम लोग लेटते हैं क्योंकि सुबह जल्दी उठकर गाय भैंस को चारा भी देना है…

रात के वही कुछ 12:15 बज रहे होंगे जब फैसल की आंख खुली_ तो उसकी नजर सामने छत पर जाने वाली सीढ़ियों पर पड़ी_ तो उसे अंधेरे में सीढ़ियों पर एक काली परछाई नजर आई_ वो परछाई कभी छत की तरफ जाती और कभी नीचे को आ रही थी.. फैसल ये सब देखकर बहुत डर गया_ उसने बगल वाली चारपाई पर लेटे अपने भाई रेहान को जगाना चाहा लेकिन डर के मारे उसकी हिम्मत नहीं हुई..

उसने देखा कि वो परछाई धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही है, फैसल ने डर कर चादर में अपना मुंह छुपा लिया और कुरान की आयतें पढ़ने लगा.. थोड़ी देर के बाद उसने चादर से धीरे धीरे अपना मुंह निकाला तो देखा वही परछाई उसके ऊपर झुकी खड़ी हैउसकी लाल-लाल आंखें लंबे लंबे बाल_ और वो बहुत डरावनी तरह मुस्कुरा रही थी_ उसके पास से बहुत गंदी बदबू आ रही थी, ये देख कर फैसल की चीख निकल पड़ी…

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आवाज सुनकर रेहान की नींद खुल गई…उसने देखा फैसल डरा सहमा अपनी चारपाई पर बैठा है, रेहान ने पूछा : क्या हुआ फैसल..? फैसल ने रेहान को सारी बातें बता दीं,

ये सारी बातें सुनकर रेहान ने कहा कि मुझे भी बहुत ज्यादा डरावने डरावने सपने आ रहे थे.. लेकिन चलो तुम परेशान ना हो_ सुबह हम किसी मौलवी साहब से मिलेंगे और उन्हें अपनी परेशानी बताएंगे_ अभी तुम सो जाओ मैं जाग रहा हूंँ…

अचानक उन दोनों को महसूस हुआ कि ऊपर छत पर कोई औरत चल रही है_ उसकी परछाई सामने दीवार पर पड़ रही थी__ वो दोनों बहुत डर गए और तेज तेज कुरान की आयतें पढ़ने लगे.. थोड़ी देर के बाद हर तरफ सन्नाटा था..

किसी तरह वो रात गुजरी, सुबह रेहान अपने पड़ोसी रशीद भाई के पास गया और उनसे रात की सारी बातें बताई.. तो उन्होंने कहा कि अभी कल की बात है कि मैंने तुम्हारे घर के पीछे से कुछ लोगों को तुम्हारे घर में फांदते देखा था_ उनके साथ एक काली चादर ओढ़े कोई इंसान था उसने काले कपड़े पहन रखे थे और माथे पर एक बड़ा सा टीका लगा रखा था_ मुझे लगता है वो कोई जादूगर था… थोड़ी देर बाद जब मैं उधर से गुजरा तो वो लोग तुम्हारे घर से बाहर निकल रहें थे.. मैंने सोचा था शाम को आप लोगों को आकर बता देंगे लेकिन मुझे शाम को याद ही नहीं रहा..

मुझे तो लगता ही है कि कल रात जो तुम्हारे साथ हुआ ये उसी जादूगर का काम है_ शायद तुम्हारा कोई दुश्मन है जो तुम लोगों को नुकसान पहुंचाना चाहता है.. लेकिन बच्चों ! तुम परेशान ना हो_ मैं तुम्हारे लिए कोई इंतजाम करता हूं और किसी मौलवी से मिलकर तुम्हारी परेशानी का हल निकालता हूं…

हमने जब रशीद भाई को कल की चोरी और अपने कुछ कपड़े गायब होने की बात बताई तो उनका शक यकीन में बदल गया और उन्होंने कहा : ये जरूर उसी जादूगर का काम है_

हम लोग घर वापस आने लगे.. घर के दरवाजे के पास पहुंच कर रेहान भाई ने मुझसे कहा : फैसल ! तुम घर चलो मैं होटल से खाना लेकर आता हूंँ_ बहुत भूक लगी है… इतना कहकर वो होटल की तरफ चले गए, मैंने जेब से चाबी निकाली और घर का दरवाजा खोल कर घर में आ गया…

अचानक मेरी नजर सामने वाले कमरे की खिड़की पर पड़ी_ खिड़की खुली थी_ अंदर कोई आदमी मेरी टीशर्ट पहने टहल रहा था_ मुझे लगा वो कोई चोर होगा_ इसलिए मैंने हाथ में डंडा उठा लिया और धीरे-धीरे कमरे की तरफ चलने लगा, मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि रात वाली बात मैं अभी तक नहीं भूला था…

मैंने कमरे के पास पहुंचकर तेज आवाज से पूछा: कौन हो तुम..? अंदर से कोई जवाब नहीं आया, मुझे लगा शायद वो आदमी डर की वजह से कमरे के किसी कोने में छुप गया है, मैं कमरे के अंदर गया लेकिन वहांँ तो कोई भी नहीं था_ हर तरफ सन्नाटा था… इतनी देर में रेहान भाई आ गए_ उन्होंने जब मेरे हाथ में डंडा और मुझे डरा हुआ देखा तो पूछा : क्या हुआ..? मैंने उनको सारी बातें बता दी, वो भी हैरान थे कि यार ये सब क्यों हो रहा है हम लोगों के साथ…??

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उस रात जब हम लोग सोए तो रात के 2:00 बजे हमें घर के एक कमरे से किसी औरत की रोने की आवाज आने लगी.. मैंने रेहान भाई को जगाया_ उन्होंने भी वो डरावनी रोने की आवाज सुनी, आवाज बराबर सामने वाले कमरे से आ रही थी_ मैं हिम्मत करके उठा और टार्च लेकर उस कमरे की तरफ धीरे धीरे चलने लगा_ रेहान भाई मेरे पीछे थे_ दिल की धड़कनें तेज हो रही थी, डर की वजह से मुझे पसीना आ रहा था..

मैं कमरे के पास पहुंचा और तेज आवाज से पूछा : कौन है..? मेरे पूछने पर वो आवाज खामोश सी हो गई, मैंने डरते हुए कमरे के अंदर झांका_ लेकिन वहां तो हर तरफ सन्नाटा था कमरे में कोई नहीं था_ मैंने पीछे मुड़कर रेहान भाई से कहा : भाई ! यहां तो कोई नहीं है फिर ये आवाज कहांँ से आ रही थी..? रेहान भाई सीढ़ियों की तरफ चेहरा करके खामोश खड़े थें_ उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया..

मैं दो कदम आगे बढ़ा और रेहान भाई के कांधे पर हाथ रखकर उनसे पूछा : क्या हुआ भाई_ आप इतना खामोश क्यों है…? जब रेहान भाई ने मेरी तरफ चेहरा घुमाया तो डर के मारे मेरी चीखें निकल पड़ी_ रेहान भाई की आंखें लाल हो रही थी_ उनके नाखून बड़े-बड़े थे_ और उनके मुंह से खून टपक रहा था_ वो तेज तेज सांसे ले रहे थे..

रेहान भाई ने मुझे बहुत तेज धक्का दिया_ मैं दूर जाकर गिरा, उठकर मैं तेजी से दरवाजे की तरफ भागा_ मुझे अपने पीछे से किसी के दौड़ने की आवाज आ रही थी_ वो भयानक आत्मा रेहान भाई के अंदर समा चुकी थी.. मैंने दरवाजा खोला और तेजी से रशीद भाई के घर की तरफ भागा.. मैं बहुत रो रहा था कि पता नहीं मेरे रेहान भाई को क्या हो गया है..? मैं रशीद भाई के घर का दरवाजा जोर जोर से खटखटाने लगा, रशीद भाई ने जल्दी से उठ कर दरवाजा खोला, इससे पहले कि मैं उनको कुछ बताता डर व खौफ की वजह से मैं उनके सामने बेहोश होकर गिर पड़ा…

जब मुझे होश आया तो रशीद भाई और उनके घर वाले मेरे आस-पास खड़े थे, रशीद भाई ने मेरे बालों में हाथ फेरते हुए पूछा ; क्या हुआ था फैसल..? तुम इतना डरे हुए क्यों थे_ और रेहान कहांँ है..? मैंने रोती हुई आवाज में उन्हें सारी कहानी सुना दी और घर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मेरे रेहान भाई किसी मुसीबत में फंसे हैं आप चलकर उन्हें बचा लो…

रशीद भाई अपने दो जवान बेटों के साथ मुझे लेकर मेरे घर की तरफ चल दिए, हर तरफ सन्नाटा था_ पता नहीं क्यों मेरे घर की सारी लाइटे बुझी हुई थी, मैंने डरते हुए घर का दरवाजा खोला_ रशीद भाई मेरे पीछे थे, मैं घर के अंदर आया_ हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा था मैंने घर में टार्च दौड़ाई तो मेरी नजर चारपाई की तरफ पड़ी_ चारपाई के नीचे से खून बहता हुआ नाली की तरफ जा रहा था, मैंने डरते हुए दो क़दम आगे बढ़ाए तो मेरी चीखें निकल पड़ी…

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चारपाई के पीछे रेहान भाई की लाश पड़ी थी किसी ने उनकी गर्दन काट दी थी और उसी का खून बहकर नाली की तरफ जा रहा था, मैं उनसे लिपट कर रोने लगा क्योंकि मेरा इस दुनिया में रेहान भाई के अलावा कोई नहीं था.. रशीद भाई ने मुझे पीछे से उठाया और कहां कि फैसल ! अभी यहां से चलो_ तुम्हारे घर में अजीब अजीब आवाजें आ रही है_ तुम्हारे लिए यहां रुकना सही नहीं होगा क्योंकि वो आत्मा रेहान के साथ तुमको भी मारना चाहती हैं…

मैंने उनसे रोते हुए कहा कि मैं अपने भाई को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा, लेकिन रशीद भाई ने मुझे जबरदस्ती दरवाजे की तरफ खींचा और मुझे अपने घर लिए चले गए.. सुबह सारे मोहल्ले वाले जमा हो गए, रेहान भाई को नहला कर दफना दिया गया, मैं उनकी कब्र से लिपट कर रो रहा था मुझे सारी दुनिया अंधेरी नजर आ रही थी.. रशीद भाई मेरे पीछे खड़े थे…

रशीद भाई ने मुझे उठाते हुए कहा कि बेटा परेशान ना हो यही ईश्वर का फैसला था.. शाम को रशीद भाई मुझे एक बड़े मौलवी साहब के पास ले गए और उन्हें सारी कहानी सुनाई, मौलवी साहब हमारे साथ मेरे घर आए और बीच आंगन में एक घेरा बनाकर बैठ गए_ मुझे अपने सामने बिठाया और कुछ पढ़ने लगे__ मौलवी साहब ने रशीद भाई से पहले ही कह दिया था कि आप घर के बाहर ही रहें, जब तक मैं खुद आपको अंदर ना बुलाऊं तब तक अंदर मत आना…

मौलवी साहब कुछ पढ़ने में लगे हुए थे_ अचानक मुझे पीछे कमरे से एक आवाज सी महसूस हुई_ मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक बहुत डरावनी शक्ल की औरत काली चादर ओढ़े हमारी तरफ चलती आ रही थी, धीरे धीरे वो मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई.. मौलवी साहब ने मुझसे कहा कि इससे डरना मत_ वो तुम्हारा कुछ नहीं कर सकती…

थोड़ी देर के बाद अचानक उस डरावनी औरत का जिस्म जलना शुरू हो गया, वो बहुत डरावनी आवाज में चीख रही थी और कह रही थी “मुझे मत मारो वरना तुम लोगों के साथ बहुत बुरा होगा..” उसका पूरा जिस्म जलता जा रहा था_ देखते देखते वो पूरी तरह जल चुकी थी, उसके जलने की बदबू पूरे घर में फैल रहीं थी..

मौलवी साहब ने आंखें खोली और रशीद भाई को अंदर बुलाया और फिर कहने लगे कि बेटा ! तुम्हारे कुछ रिश्तेदारों ने तुम दोनों भाइयों पर जादू करा दिया था_ ये आत्मा आज रात तुम्हें भी मार देती_ लेकिन मैंने उसको पूरी तरह खत्म कर दिया है_ और तुम्हारे ऊपर होने वाले जादू को भी काट दिया है _ अब कोई तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता…

लेकिन अब तुम इस घर में मत रहना.. इस घर को बेच दो और कहीं दूर शहर जाकर रहो_ क्योंकि तुम्हारे वही रिश्तेदार फिर से तुम्हारे साथ कुछ बुरा करने की कोशिश करेंगे..

आज इस बात को बीते ग्यारह साल गुजर चुके हैं,मुझे आज भी अपने रेहान भाई की बहुत याद आती है_ उनका हंसना_ मेरे साथ मजाक करना_ और कभी कभी खाना कम देखकर मेरी प्लेट में चावल डालते हुए कहना : फैसल ! तुम खा लो मुझे आज भूख नहीं लगी है…

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