अँधेरी रात और डरावनी बिल्ली😱 | Horror Night Story in Hindi

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  बारिश का मौसम था हम सब रात छत पर लेटे थे, अचानक रात में बारिश होने लगी, सारे लोग अपने-अपने बिस्तर लेकर नीचे आ गए लेकिन मैं सुस्ती की वजह से छत ही पर लेटी रही, मैंने सोचा जब बारिश तेज हो जाएगी तभी मैं नीचे जाऊंगी, रात के वही कुछ 12:30 बज रहे होंगे, सारे लोग नीचे जा चुके थे मैं अकेली छत पर चादर ओढ़े लेटी थी,..

मैं थोड़ी थोड़ी नींद में थी, अचानक मुझे दो बिल्लियों की लड़ने की आवाज सुनाई दी, रात के अंधेरे में लड़ते हुए उनकी आवाजें बहुत डरावनी लग रही थी, मैंने सोचा कि इनको उठकर भगा दूंँ, लेकिन फिर मुझे ख्याल आया कि अभी थोड़ी देर में खुद ब खुद लड़के यहां से चली जाएंगी..

अचानक मुझे अपनी दाएं तरफ बिल्ली के रोने की आवाज सुनाई दी, मैं तेजी से उठ कर बैठ गई लेकिन उधर तो कोई भी नहीं था, अचानक वही रोने की आवाज मेरे पीछे से आने लगी मैंने मुड़कर देखा, लेकिन वहांँ भी सब सन्नाटा फैला हुआ था, कुछ ही सेकंडों के बाद वो आवाज मुझे अपने चारों तरफ से सुनाई देने लगी मैंने उठकर हर तरफ देखा लेकिन वहांँ तो कुछ भी नहीं था..

मेरी नजर सामने दीवार पर पड़ी तो मुझे अंधेरे में दो लाल लाल चमकती आंखें नजर आई जो मुझे घूर घूरकर देख रही थी, मैं डर के मारे पीछे हट गई.. उन आंखों की तरफ से गुर्राने की आवाज आ रही थी, शायद वो कोई बिल्ली थी.. धीरे-धीरे वह आंखें मुझे अपनी तरफ बढ़ती हुई नजर आई, डर की वजह से मेरा पूरा जिस्म कांप रहा था, मैं बहुत तेज चिल्लाई और दौड़ते हुए सीढ़ियों की तरफ भागी, मेरी चीख
सुनकर सारे घर वाले जमा हो गए थे, मैं दौड़ती हुई नीचे पहुंची और बीच आंगन में जाकर बेहोश हो गई..

मेरी परेशानियां खत्म नहीं हुई थी उस दिन के बाद से मुझे बहुत डरावने डरावने ख्वाब आने लगे थे, मुझे ख्वाब में वही लाल-लाल आंखों वाली बिल्ली नजर आती थी कभी वो मेरा खून चूस रही होती थी और कभी उसके पंजे मेरे सीने में गड़े होते थे, मैं नींद ही में चीखने लगती थी मुझे ख्वाब में डरावनी शक्लें दिखती थी…

ये देखकर मैं रोने लगती क्योंकि मुझे पहले ही बहुत ज्यादा डर लगता था, मैं बीमार रहने लगी۔۔ मेरा जिस्म कमजोर होने लगा, डर की वजह से मैं घर के बाहर नहीं जाती थी, घरवाले मेरी ये हालत देखकर बहुत परेशान रहते थे, मेरे पिताजी ने एक मौलवी साहब को बुलाया, उन्होंने मेरे ऊपर कुछ पढ़ कर फूंका, थोड़ी देर के लिए मेरी हालत सही हो गई, लेकिन फिर से वही बेचैनी शुरू हो गई…

मुझे उस औरत से बहुत डर लगता था जो मुझे अक्सर रात में घर के किसी कोने में बैठी नजर आती थी उसके नाखून बड़े बड़े थे वह दीवार को खुरचा करती थी, जब भी मेरी उस पर नजर पड़ती वो मुझे बहुत घूर कर देखती थी ऐसा लगता था जानो वो मुझे जान से मार डालेगी उसके दांत हमेशा खून से भरे रहते थे..

एक रोज मैं अपने कमरे में बैठी कोई किताब पढ़ रही थी अचानक मुझे डर सा लगने लगा, ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई मुझे देख रहा है, मैंने इधर उधर देखा लेकिन वहांँ तो कोई नहीं था मैं तेजी से उठकर अपनी मम्मी के कमरे चली गई, मैंने देखा मम्मी अलमारी के पास खड़ी कपड़े सही कर रही हैं, मैंने मम्मी को पुकारा लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया मैं चलती हुई उनके पास पहुंच चुकी थी.. मैंने मम्मी के कंधे पर हाथ रखा और रोते हुए उनसे कहा : मम्मी मुझे बहुत डर लग रहा है.. जब मम्मी ने मेरी तरफ चेहरा फेरा तो वो तो मम्मी नहीं थी बल्कि ये वही डरावनी औरत थी जो मुझे हर वक्त घर में किसी न किसी कोने में बैठी नजर आती थी, उसके नुकीले दांत, खून से तर बड़े बड़े नाखून और उसका हंसता हुआ डरावना चेहरा देखकर मैं वहीं पर बेहोश हो गई…

जब होश आया तो वही मौलवी साहब मेरे सरहाने बैठे कुछ पढ़ रहे थे, मेरी मम्मी ने पास बैठते हुए कहा: बेटा ! तुम को क्या हो गया था, मैं जब अपने कमरे में गई थी तो तुम वहां बेहोश पड़ी थी….? मैंने मम्मी को सारी बातें बता दी, मम्मी भी सोच में पड़ गई और कहने लगी कि मैं तो कमरे में ताला लगा कर पड़ोस में गई थी.. वो ताला कैसे खुला…?

उसके बाद से मेरे घर वालों के साथ भी इस तरह की चीजें होने लगी, कभी बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद हो जाता और पानी गिरने की आवाजें आने लगती, थोड़ी देर के बाद दरवाजा खुल जाता मगर अंदर कोई ना होता…

एक बार की बात है हम सारे घर वाले बैठे टीवी देख रहे थे कि अचानक बिजली का बटन “ठक” से अपने आप बंद हो गया, हर तरफ अंधेरा छा गया और फिर ऐसा महसूस हुआ जैसे छत की तरह कोई औरत घुंगरू बांधे दौड़ते हुए गई है, हम सब लोग बहुत डर गए लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई की छत पर जाकर देखें…

हमारे घर का सुकून खत्म हुए 7 महीने गुजर चुके थे, मैं इन चीजों से इतना परेशान थीं कि आत्महत्या करने का मन करता था…

एक दिन वही मौलवी साहब किसी बहुत नेक इंसान को घर लेकर के आएं, मौलवी साहब ने उनको मेरे घर की सारी बातें बताई.. उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और कहा बेटा ! अब परेशान होने की जरूरत नहीं है, ये आत्मा अब हमेशा के लिए तुमको छोड़ कर चली जाएगी, मैं जैसा जैसा कहूंँ बस तुम वो करती जाओ…

उन्होंने एक लाल कपड़ा मंगवाया और उसकी पट्टी बनाकर मेरे माथे पर बांध दी और अपना अंगूठा मेरी आंखों के बीच रख दिया, मुझसे कहा ! बेटा तुम आंखें बंद कर लो और जब तक मैं ना कहूं तब तक आंखें ना खोलना.. इतना कहकर वो साहब कुछ पढ़ने लगे…

अभी उनको पढ़ते हुए एक मिनट भी नहीं गुजरा था कि मुझे ऐसा महसूस होने लगा जैसे मैं किसी घने जंगल में हूंँ और वही डरावनी औरत मेरे सामने खड़ी है.. मेरे कानों में आवाज पड़ी कि बेटा ! आंखें मत खोलना और उस औरत को देखकर भागना नहीं, उसका डटकर मुकाबला करो ये तुम्हारी जिंदगी और मौत का सवाल है, अगर आज तुम उससे डर गईं तो फिर ये औरत तुम्हारे ऊपर हमेशा के लिए ऐसा हावी हो जाएगी कि फिर दुनिया की कोई ताकत तुमको सही नहीं कर सकती.. इसलिए बेटा ! डरना मत.. ये औरत सिर्फ तुमको 5 मिनट तक डराएगी, अगर तुमने अपने आपको 5 मिनट तक संभाले रखा तो फिर तुम हमेशा के लिए ठीक हो जाओगी..

मुझे ऐसा महसूस होने लगा जैसे वह औरत मेरी तरफ दौड़ती हुई आ रही है उसकी तेज तेज हंसने की डरावनी आवाज पूरे जंगल में गूंज रही थी, वो मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और अपने नुकीले नाखूनों से मुझे नोचना चाह रही थी लेकिन वो मुझे छू नहीं पा रही थी..

तभी मुझे महसूस हुआ कि मेरे सर पर कोई चिपचिपाती चीज गिरी है मैंने नज़रें ऊपर उठा कर ऊपर देखा तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए.. पूरे जंगल में हर पेड़ पर इंसानों के कटे हुए सर लटक रहे थे ऐसा लग रहा था मानो उन सरों को अभी काटा गया हो…

वो डरावनी औरत मुझे हर तरह से डराने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने खुद को संभाले रखा, अचानक मैंने देखा कि जंगल में पीछे की तरफ दो बड़े-बड़े हाथ आए हैं और वह उस डरावनी आत्मा को अपने साथ उठाकर तेजी से पीछे लिए जा रहे हैं, मुझे दूर से उसके चीखने की आवाज सुनाई दे रही थी..

थोड़ी देर के बाद मेरे कानों में आवाज पड़ी कि बेटा ! अब अपनी आंखें खोलो तुम अपनी परीक्षा में कामयाब हो चुकी हो, वो आत्मा हमेशा के लिए तुमको छोड़कर जा चुकी है..

मैंने धीरे-धीरे आंखें खोली, सारे घर वाले मुझे ही टकटकी मारे देख रहे थे.. उन मौलवी साहब ने एक गिलास में पानी लिया और उसमें कुछ पढ़कर मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा कि बेटा इसे पी लो.. जैसे ही मैंने वो पानी पिया मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे ऊपर से बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो.. उसके बाद से मुझे कभी वो डरावनी औरत नजर नहीं आई..

आज इस बात को गुजरे 3 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी मुझे जब भी वो डरावनी औरत और उसका हंसना और उन बिल्लियों का रोना याद आता है तो मेरी रूह कांप जाती है…

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