छोटी बच्ची और डाइन चुड़ैल😱 | Horror Story in Hindi

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   शादी के बाद मैं जिस घर में आई थी, वो घर कम और भूतों का बंगला ज्यादा लगता था, ये एक हवेली टाइप का घर था ये तीन मंजिल का बना हुआ था, हर मंजिल पर 5-5 कमरे थें,

घर के सामने एक बड़ा सा दालान था जो कि गुलाब के पौधों से भरा हुआ था, और बहुत खूबसूरत लगता था, इतनी बड़ी हवेली में रहने वाले बस हम तीन ही लोग थे, मैं मेरी सास, और मेरा पति…

पूरा दिन इस हवेली में बहुत सन्नाटा रहता था, मेरी सास बहुत कम बातें करती थी, वह एक अलग कमरे में रहती थी, और वहीं पर अपनी इबादतें किया करती थीं..

अभी हमको यहां आए एक हफ्ता भी नहीं हुआ था, हमारे साथ अजीब अजीब बातें होने लगी थीं_ एक दोपहर की बात है जब मैं किचन में खाना पका रही थी, उस दिन मैंने सोचा कि आज आलू के पराठे बना लिए जाएं, मैं आलू के पराठे बनाने लगी, अचानक मुझे अपने पीछे एक आहट सी महसूस हुई उम्मीद के मुताबिक वो मेरी सास थी…

“जी अम्मी ! बताइए !कुछ काम है आपको” मैंने पूछा, तो कहने लगी मेरे लिए पनीर की सब्जी पका दो, मैं आलू के पराठे नहीं खाऊंगी, मैंने कहा : ठीक है, मैं पका देती हूँ, और वह किचन से चली गई…

एकदम से मुझे ख्याल आया कि “अम्मी को कैसे पता कि मैं आलू के पराठे पकाने जा रही हूँ, मैंने तो उनको बताया भी नहीं…”

चलो कोई बात नहीं, इंसान हैं, पनीर की सब्जी खाने का मन कर रहा होगा इसलिए किचन में आकर कह दिया…

पनीर पकाने के बाद एक ट्रे में सजाकर मैं उसे अम्मी के पास ले गई, अपने लिए पराठे और उनके लिए पनीर की सब्जी.. वो देखकर कहने लगी_ अरे ! मैं भी आलू के पराठे खा लेती, मेरे लिए अलग से पनीर की सब्जी बनाने की क्या जरूरत थी.. मैंने कहा : “आप ही ने तो किचन में आकर कहा था कि मुझे पनीर की सब्जी खानी है”…

उन्होंने बड़े हैरान होकर मेरी तरफ देखा : ” मैंने ऐसा कब कहा…?” मैंने भी हैरान होकर उनको बताया कि “आप ही ने तो किचन में आकर कहा था कि मेरे लिए पनीर की सब्जी बना दो..”

ये सुनकर वो मुस्कुराने लगी और कहा : “ये पनीर की प्लेट ऊपर मंजिल की सीढ़ियों पर रख आओ”.. मैंने उनसे सवाल करना चाहा लेकिन उन्होंने मेरे मुंह पर उंगली रख कर मुझे खामोश कर दिया…

मैं समझ गई कि मामला कुछ और है_ मैं चुपचाप प्लेट लेकर ऊपर की सीढ़ियों पर रख आई.. उस वक्त मैं बहुत हैरान हुई जब शाम को ये पलट मुझे खाली मिली…” ऊपर तो कोई रहता नहीं है, आखिर ये खाना किसने खाया..?

मैं समझ चुकी थी कि इस घर में जिन्नात हैं, लेकिन वो हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचाते थे.. बस कुछ अजीब अजीब बातें होती रहती थी… कभी ऐसा लगता कि ऊपर मंजिल में कोई बच्चा रो रहा है, और कभी-कभी ऐसा लगता कि बहुत सारी लड़कियां आपस में बैठकर हंस रही है.. कभी ऐसा लगता कि कोई औरत मेरे पीछे से गुजरी है…”

एक बार तो ऐसा हुआ कि मैं नहाने चली गई इतने में दरवाजे की घंटी बजने लगी_ मैं जल्दी-जल्दी नहा कर कपड़े पहन कर बाहर निकली, मुझे थोड़ी सी देर लग गई थी, बाहर आकर देखा तो सोफे पर मेरे पति बैठे हुए थे, उनको देखकर मैंने बड़ी हैरानी से पूछा : “आप यहाँ कैसे..? मेरे पति ने भी मुझे हैरानी से देखा, और फिर पीछे मुड़कर देखा, और परेशान होकर बोले : “अगर तुम नहा रही थी तो फिर दरवाजा किसने खोला था..?”

मैंने उनको बताया कि ” दरवाजा मैंने नहीं खोला”, हम दोनों पति पत्नी ने उस बात को ज्यादा लंबा नहीं किया, क्योंकि हम समझ गए थे कि “इस घर में जिन्नात रहते हैं..”

कुछ दिनों के बाद मुझे खुशखबरी मिली कि “मैं माँ बनने वाली हूँ ” उसके बाद से मेरे साथ होने वाले हादसात कुछ ज्यादा ही भयानक थें.. उस दिन मैं अपने पति के साथ बाहर घूमने गई थी, वापस आकर जब हम रात को सोएं..

तो ना जाने रात के कितने बजे का वक्त था कि जब मेरे कमरे का दरवाजा खुला, और एक लंबी और भयानक शक्ल की औरत, काले कपड़े पहने हुए कमरे के अंदर आई, उसके चेहरे पर दाएं गाल की तरफ एक गट्ठा सा था जैसे किसी आग के जलने से खाल झुलस गई हो..

उसके हाथ में कोई नुकीली सी चीज थी_ चाकू टाइप कोई चीज_ वो बेड के पास आ करके खड़ी हो गई, मैं उसे देख रही थी, और ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा सारा जिस्म सुन हो गया हो…

मैं सिर्फ अपनी आंखों को हिला सकती थी और मैं आंखें फ़ाडे़ उसे देख रही थी, उस औरत के पास से बहुत गंदी बदबू आ रही थी, उसने हाथ बढ़ाकर वह नुकीली चीज मेरे दिल पर रख दी, और फिर उसे चलाते हुए मेरे पेट तक ले गई और फिर उसने मुझे मारने के लिए अपना हाथ उठाया, मैंने जोर जोर से चीख मारना शुरू कर दी, और उठ बैठी, मैं पसीने से तर थी_ मेरी आँख चीखने से खुली थी…

मेरे पति बेखबर सो रहे थे, ” क्या ये एक ख्वाब था..?” मैंने सोचा, लेकिन नहीं, ये ख्वाब नहीं था_ क्योंकि मैंने देखा कि कमरे का दरवाजा खुला हुआ था जो कि मैं रात को हमेशा लॉक करके सोती हूँ_ और कमरे के अंदर अजीब गंदी बदबू आ रही थी_ इससे ये मालूम हो रहा था कि ” ये एक ख्वाब नहीं था…”

किसी तरह वो रात गुजरी, सुबह मैंने अपने पति को रात के हादसे के बारे में बताया, तो वो भी परेशान हो गए, और कहने लगे :” तुम अम्मी को जाकर बता दो..” दोपहर को जब मैं अम्मी के पास खाना लेकर गई तो मैंने उन्हें सारी बातें बता दी…

अम्मी भी बहुत परेशान हुई, और उन्होंने मुझसे कहा कि “बेटी संभल कर रहना और अपना ख्याल रखना”.. मैं उनके पास से अपने कमरे आ गई मैं बहुत डरी हुई थी लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ…

लेकिन एक दिन मेरे साथ बहुत अजीब हुआ_ ये उस वक्त की बात है जब मुझे प्रेग्नेंसी का आठवां महीना लग चुका था_ मैं अपने कमरे से निकलकर किचन की तरफ जा रही थी कि अचानक मुझे किसी ने पीछे से बहुत जोर से धक्का दिया..

मेरी चीख उस वक्त मेरी हलक ही में रह गई जब मैं जमीन पर गिरने के बजाय बीच हवा ही में रुक गई.. मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई दो हाथों ने मुझे थामा हुआ है और मुझे गिरने से बचा लिया है..

मैं वहीं बैठ गई मेरे दिल की धड़कने बहुत तेज हो गई, और लंबी लंबी सांसे लेने लगी.. मुझे महसूस हुआ कि किसी ने मेरे सर पर हाथ रखा है, मैंने पीछे मुड़ कर देखना चाहा लेकिन मेरी गर्दन नही हिली… बस एक आवाज आई, “फिक्र ना करो बेटी ! हम तुम्हारी हिफाजत करेंगे”… उसके बाद वो हाथ मेरे सर से हट गया, मैंने एकदम गर्दन मोड़ कर पीछे देखा..” लेकिन वहांँ तो कोई नहीं था”…

मैं कभी कभी मजाक में अपने पति से कहा करती थी कि ” ये बंगला तो भूतों वाला बंगला है “… लेकिन अब यही भूतों वाला बंगला मेरी हिफाजत कर रहा था, मुझे इस घर के भूतों से जो कि जिन्नात थें मोहब्बत सी हो गई थी..

वैसे भी मोहल्ले की औरतें आकर हमें बताया करती थी कि रात में तुम्हारी छत पर रोशनी सी हुआ करती है जिसमें बहुत से मर्द और औरतें चलते-फिरते नजर आते हैं, अक्सर ऊपर मंजिल की खिड़कियों से कोई औरत या कभी कोई लड़की झांकती दिखाई देती है…

लेकिन खैर, मुझे इन बातों की कोई परवाह नहीं होती थी, मुझे तो परवाह उस औरत की होती थी जो मेरे बच्चे को ले जाना चाहती थी, इस डरने ने मेरी दिन रात की नींद हराम कर रखी थी..

कुछ दिनों के बाद हमारे यहां एक लड़की की पैदाइश हुई, हम सारे घर वाले बहुत खुश थें, हमने उस बच्ची का नाम ” नूर ” रखा, नूर धीरे-धीरे बड़ी होने लगी लेकिन उसकी कुछ बातें बहुत अजीब थी ; वो अक्सर लेटे-लेटे हंसा करती थी, मैंने इस पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि बच्चे अक्सर हंसते ही हैं.. कभी-कभी वो इतना ज्यादा रोती कि उसको संभालना मुश्किल हो जाता..

वो जैसे-जैसे बड़ी हो रही थी अकेले ही खेलती रहती थी ऐसा लगता था जैसे किसी के साथ खेल रहीं हो.. जब वो बोलने लगी तो अक्सर खेलते समय कहा करती थी कि ” मम्मा ! वो आंटी बहुत गंदी हैं “.. मैं पूछती ” बेटा कौन सी आंटी…? वो घर के किसी कोने की तरफ इशारा करके कहती कि ” देखो वहांँ वो खड़ी है..” मैं उधर देखती तो मुझे कोई नजर नहीं आता.. कभी कहती कि मेरे दोस्त मुझे बुला रहे हैं; वो खुद-ब-खुद अकेले में बातें किया करती थी.. मेरी सास ने मुझे मना कर रखा था कि मैं नूर से इस बारे में कुछ भी ना पूछूं…

अचानक एक दिन मेरी सास की तबीयत बहुत खराब हो गई, और देखते-देखते शाम तक उनकी मौत हो गई. उन्होने मरने से पहले मुझसे कहा : बेटी ये घर कभी मत छोड़ना_ यहां के जिन्नात तुम्हारी हिफाज़त करते हैं और अगर तुमने इस घर को छोड़ दिया तो वो चुड़ैल तुम्हारी बच्ची को लेकर चली जाएगी_ इसलिए ये घर कभी मत छोड़ना_ इस घर के जिन्नात ही नूर को उस चुड़ैल से बचाएंगे..

एक हफ्ते के बाद मैंने सपना देखा कि नूर किसी ऐसी जगह पर खड़ी है जहांँ एक तरफ अंधेरा है और दूसरी तरफ उजाला ; नूर का आधा जिस्म अंधेरे में था और आधा उजाले में_ अचानक कोई औरत अंधेरे की तरफ से नूर को पकड़ कर घसीटने लगी_ नूर मुझे बहुत तेज तेज पुकार रही थी_ मम्मा ! मुझे इस गंदी आंटी से बचा लो_ अचानक उस औरत ने नूर को पूरी तरह अंधेरे में घसीट लिया_ लेकिन तभी वहां पता नहीं कहीं से दो सफेद हाथ आएं और उन्होंने अंधेरे के अंदर से नूर को घसीट कर उजाले में खड़ा कर दिया…

ये सब देखकर मेरी आंख खुल गई, मैं बहुत डर गई मैंने मुड़कर देखा तो नूर बिस्तर पर लेटी सो रही थी, शाम के 7:00 बज रहे थे_ मैं बहुत घबरा गई कि मैं 2:00 बजे सोई थी और अब मेरी आंख खुली है…

अभी मैं बैठी ये बातें सोच ही रही थी कि अचानक कमरे का दरवाजा खुला और वहीं डरावनी आत्मा जिसको मैं ख्वाबों में देखा करती थी हाथ में छुरा लिए कमरे के अंदर आई_ उसने नूर का पैर पकड़कर घसीटना शुरू कर दिया_ नूर बेड से नीचे गिर पड़ी_मैं बहुत तेज चिल्लाई और उसके पीछे पीछे भागी..

वो चुड़ैल आत्मा नूर को घसीटते हुए कमरे से बाहर ले जा रही थी_ वो उसे लेकर सीढ़ियों के पास तक पहुंच चुकी थी_ मैंने नूर को उस आत्मा से छुड़ाने की कोशिश की तो उसने मुझे बहुत जोर का धक्का दिया और मैं सामने दीवार से जाकर लड़ी और बेहोश हो गई..

मेरी बंद होती आंखों ने जो आखिरी मंजर देखा वो ये था कि वो आत्मा मेरी नूर को घसीटते हुए घर के एक पुराने कमरे की तरफ ले जा रही थी_ उसके बाद मेरी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा_ आंखें बंद होने के बाद मुझे एक सपना दिखने लगा कि मैं भागती जा रही हूं_ मेरे पैरों में नुकीले पत्थर चुभ रहे थे_ ना जाने ये कैसी जगह थी_ अंधेरे के सिवा कुछ नहीं दिख रहा था_ मेरे पैरों से खून बह रहा था_ उस वक्त मेरे दिमाग पर सिर्फ नूर सवार थी – हाय हाय कोई मेरी नूर को बचा लो…! _ मैं चिल्ला चिल्ला कर उस अंधेरे में इधर उधर भाग रही थी..

भागते भागते मैं एक जगह रुक गई۔ मुझे दिखा कि मेरी नूर मुझसे बहुत दूर लेटी हुई है۔ मैं गिरते पड़ते किसी तरह उसके पास पहुंची और उसे हिलाने लगी۔۔ नूर नूर۔۔۔ लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी۔ मैंने नाक के पास हाथ लगाकर उसकी सांसे चेक की۔ सांस बंद थी۔ मेरा दिल धक से हो गया मैं उसे बुरी तरह झिंझोड़ने लगी..

मम्मा…! अचानक मुझे दूर से एक आवाज सुनाई दी_ मैंने सर उठा कर देखा तो वो नूर थी और उसके पीछे वही डरावनी आत्मा खड़ी थी जो उसे ले जाना चाहती थी…अचानक उस आत्मा ने नूर को पीछे से दबोचा और अंधेरे में गायब हो गई…

नूरररर… मैं बहुत तेज चिल्लाई और उसके पीछे भागना शुरू कर दिया_ मुझे बहुत दूर कहीं से नूर की आवाज आ रही थी_ मम्मा मम्मा मुझे बचा लो..! एकदम से पैर में ठोकर लगी और मैं किसी गहरी खाई में जा गिरी_ उसके साथ ही मेरी आंख खुल गई…

आवाज अभी भी आ रही थी_ मम्मा मम्मा..! मेरी नूर मुझे हिला रही थी_ मम्मा उठो आपको क्या हो गया है..? मैंने अपनी नूर को अपने पास देखते ही अपनी बाहों में भर लिया_ मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी बंद हुई सांसे वापस मिल गई हों_ मैं बहुत जोर जोर रो रही थी…

मेरे पति घर आ चुके थे_ और मुझे बहुत हैरानी से देखते हुए कहने लगे कि जब मैं घर आया था तो नूर घर के बाहर खेल रही थी और तुम सीढ़ियों के पास बेहोश पड़ी थी_ क्या हो गया था तुमको..? मैंने उनको सब कुछ बता दिया…

अभी मैं उनको ये सब बता ही रही थी कि नूर हमारे पास आई और आकर कहने लगी कि मम्मा आप सच कह रही हैं_ वो गंदी आंटी मुझे हमेशा डराया करती थी_ और आज वो मुझे अपने साथ ले जा रही थीं_ लेकिन तभी वो अंकल आ गए जो ऊपर वाले घर में रहते हैं_ फिर वहांँ बहुत लड़ाई हुई और उन अंकल ने उस गंदी आंटी को आग से जला दिया_ फिर अंकल ने मुझे गोद उठाया और कहा : ” बेटा ! अपनी मम्मा से कह देना कि वह गंदी आंटी मर चुकी है; अब वो कभी तुमको परेशान नहीं करेगी… मम्मा ये मरना क्या होता है.. ?

नूर ने ये सब बताते बताते मुझसे सवाल किया.. मैंने उससे कहा : बेटा ! जो मर जाता है वो कभी वापस नहीं आता.. नूर को जवाब देते हुए मेरे अंदर सुकून उतरता चला गया कि वो चुड़ैल अब मर चुकी है… मेरे पति भी ये सब सुनकर बहुत हैरान हुएं..

मैंने अगले दिन बहुत अच्छा अच्छा खाना बनाया और उसे ऊपर वाली मंजिल पर जाकर रख दिया_ शाम को जब सीढ़ियों पर जाकर देखा तो वो सारी प्लेटें खाली थीं और साथ में मुझे एक कागज में कुछ लिखा मिला_ मैंने वो कागज उठाकर पढ़ा तो उसमें लिखा हुआ था..

” बेटी ! अब तुम परेशान ना होना_ उस चुडै़ल को हम लोगों ने मार दिया है- ये घर तुम्हारा है तुम यही रहना_ हम लोग तुम लोगों का बहुत ख्याल रखते हैं..

आज भी मोहल्ले की औरतें आ-आकर बताया करती हैं कि तुम्हारे घर में ऊपर वाली मंजिल पर रात में लोग दिखाई देते हैं_ ये भूत बंगला है तुम लोग इसे छोड़ दो.. लेकिन मैंने फैसला कर लिया था कि मैं इस भूत बंगले को कभी नहीं छोड़ूंगी_ क्योंकि मुझे और मेरे पति और बेटी को इस भूत बंगले से और यहां के भूतों से बेहद प्यार हो गया था…

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