हसीन बच्ची और चुड़ैल गुड़िया ☠️ |Horror story in hindi

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Horror story in hindi

   महक बचपन से एक यतीमखाने में पली-बढ़ी थी, आज उसकी उम्र 21 साल हो चुकी है उसने अपनी जिंदगी का मकसद यतीम और गरीब बच्चों की मदद करना बना लिया है_  वो अपनी सारी कमाई इन बच्चों पर लगा देती है,  लेकिन पैसों की तंगी की वजह से उसने वह घर छोड़ दिया और अब एक कम किराए वाले घर में आकर रहने लगी है यह घर अफजल चाचा का था..

  अफजल चाचा ने भी महक के नेक इरादों में उसका साथ दिया और अपना बड़ा सा मकान जो पिछले 5 सालों से बंद पड़ा था महक को बहुत कम किराए के ऊपर दे दिया, ये दो मंजिल का बना हुआ घर था_ ऊपर की मंजिल में 5 कमरे थे_ नीचे एक बड़ा सा नादान था_  दाई तरफ किचन था और फिर उसी से मिलता हुआ बाहर का रास्ता मेन गेट की तरफ जाता था_ महक और उन बच्चों को ये घर बहुत पसंद आया था…

  महक के साथ कुल 5 बच्चे थे जिसमें से तीन लड़कियां थी फलक, अनम, आरती_ जिनकी उम्र 12 साल के करीब थी और दो लड़के यासिर, सलीम, उनकी उम्र 6 और 7 साल थी दोनों बहुत छोटे थे, महक अकेली इन सब की देखभाल करती थी…

  अफजल चाचा ने महक को कमरों की चाबी देते हुए दूसरी मंजिल पर आखिर में बने कमरे की तरफ इशारा करते हुए कहा : “बेटी ! कुछ भी हो जाए उस कमरे को मत खोलना और बच्चों को भी उस कमरे के आसपास खेलने मत देना.. महक ने कहा : आप बेफिक्र रहिए_ मैं इसका पूरा ख्याल रखूंगी.. 

  अफजल चाचा का घर करीब ही में था, वह अपने घर चले गए ;  रात का वक्त हो रहा था, महक ने जल्दी-जल्दी सारे बच्चों के लिए खाना तैयार किया_ आरती और फलक ने भी खाना बनाने में महक का पूरा साथ दिया  और फिर सारे लोग खाना खाकर अपने-अपने बिस्तर पर लेट गए, दूसरी मंजिल पर सीढ़ियों के सामने एक बड़ा कमरा था ये सारे बच्चे उसी में सो रहे थें_ महक ने भी एक किनारे अपना बिस्तर लगाया और लेट कर सो गई…

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पता नहीं क्यों अनम को नींद नहीं आ रही थी_ वो अपने बिस्तर पर लेटी करवटें बदल रही थी रात बहुत ज्यादा गुजर चुकी थी_ पूरे घर में सन्नाटा ही सन्नाटा था अचानक अनम के कान में एक आवाज गूंजी..

तितली हूंँ मैं तितली हूंँ..

दूर कहीं से आई हूंँ.. 

पूरे घर की रानी हूंँ..  

फूलों की मैं मलिका हूंँ..

  अनम उठकर बैठ गई और इधर-उधर देखने लगी, लेकिन सारे लोग तो सो रहे थे तो फिर ये आवाज कहां से आ रही थी..? अनम ने उस आवाज़ पर कान लगाएं_ ये आवाज कमरे के बाहर से आ रही थी, अनम चुपके से उठी और धीरे से दरवाजा खोला_ वो  आवाज अभी भी घर में गूंज रही थी जैसे कोई छोटी बच्ची लोरी गा रही हो..

  घर में हर तरफ अंधेरा था एक छोटा सा बल्ब जल रहा था जिसकी कमजोर रोशनी पूरे दालान में फैली हुई थी, वो कमरे के बाहर खड़ी इधर उधर देख रही थी अचानक उसे लगा कि ये आवाज़ तो गैलरी में बने उसी कमरे से आ रही थी जिसे अफजल चाचा ने खोलने से मना किया था.. अनम के कदम धीरे धीरे उस कमरे की तरफ बढ़ रहे थे_ ऐसा लग रहा था मानो उसे कोई बुला रहा है..

तितली हूंँ मैं तितली हूंँ

दूर कहीं से आई हूंँ…

  अनम कमरे के पास पहुंची, आवाज अभी भी कमरे के अंदर से आ रही थी_ दरवाजा बंद था_ अनम ने दरवाजे पर हाथ रखा तो वो खुद ही खुल गया, वो कमरे के अंदर गई तो देखकर दंग रह गई_ सामने एक बेड पड़ा हुआ था जिस पर एक खूबसूरत सफेद चादर बिछी हुई थी और उस पर बहुत सी गुलाब की पत्तियां पड़ी हुई थी_ उसी बेड पर एक किनारे तकिया के सहारे से एक बड़ी सी गुड़िया रखी हुई थी जिसने लाल फ्रॉक पहन रखी थी_ उसके भूरे भूरे बाल_ नीली नीली आंखें_ लाल लाल गाल बहुत खूबसूरत दिख रहे थे_ कमरे में एक अजीब सी खुशबू आ रही थी_ बेड के पास ही एक टेबल पर किसी छोटी लड़की की तस्वीर एक फ्रेम में बनी रखी हुई थी…

…अनम मेरी प्यारी अनम..

   अचानक अनम के कान में किसी बच्ची की जोरदार आवाज गूंजी, अनम ने डरकर इधर-उधर नजरें दौड़ाई लेकिन वहां तो कोई भी नहीं था, अनम ने डरते हुए पूछा : कौन हो तुम…?  कोई आवाज नहीं आई_ लेकिन फिर अचानक कमरे का दरवाजा बहुत तेज बंद हो गया, दरवाजा बंद देख अनम बहुत ज्यादा डर गई_ वो पीछे मुडी़ और धीरे-धीरे उस गुड़िया की तरफ बढ़ने लगी_ अचानक गुड़िया ने अनम की तरफ मुंह मोड़ा और अपनी पलकें झपकीं, ये सब देखकर तो अनम की चीखें निकल गई _ वो चिल्लाती हुई बहुत तेज दरवाजे की तरफ भागी उसने दरवाजा खोला और दौड़ते हुए अपने कमरे आकर कम्बल में घुस गई..

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   सुबह आरती अनम को बहुत देर से जगा रही थी मगर वो उठने का नाम नहीं ले रही थी, थोड़ी देर के बाद अनम आंख मलते हुए उठ बैठी_ उसकी आंखें देख आरती चिल्लाने लगी_ अनम की आंखें लाल हो रही थी_  महक आंटी ने जब अनम की लाल-लाल आंखें देखी तो उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा कि लगता है तुम्हारी तबीयत बहुत खराब है_ चलो डॉक्टर के पास चलते हैं.. अनम ने कहा : नहीं आंटी, मैं बिल्कुल सही हूं_ वो रात में एक डरावना सपना देख लिया था इसीलिए मुझे रात नींद नहीं आई शायद तभी मेरी आंखें लाल हैं.. अनम ने किसी को कुछ भी नहीं बताया..

 महक ने सबके लिए नाश्ता तैयार किया.. नाश्ते के बाद महक ने बच्चों से कहा कि देखो मैं अफजल चाचा के पास जा रही हूं उन्होंने मुझे बुलाया है_ तुम लोग ज्यादा शोर मत करना और उस कमरे से दूर रहना_ मैं आधे घंटे में वापस आ रही हूं.. बच्चों ने कहा : ठीक है आंटी, आप बेफिक्र रहिए हम इन बातों का ख्याल रखेंगे..

   जब महक चली गई तो आरती ने चुपके से अनम से पूछा कि रात में तुम कहांँ गई थी और फिर थोड़ी देर के बाद दौड़ते हुए अपने बिस्तर पर आ करके लेट गई थी तुम बहुत घबराई हुई थी सच-सच बताओ रात में तुम्हारे साथ क्या हुआ था..?_ मैं उस वक्त जाग रही थी.. अनम ने पहले तो बहाना बनाना चाहा लेकिन आरती नें उससे बहुत जिद की तो अनम ने उसे सब सच-सच बता दिया कि रात में मुझे उस कमरे में किसी छोटी बच्ची की लोरी पढ़ने की आवाज आ रही थी मैं उस कमरे में गई तो मुझे एक गुड़िया नजर आई.. अनम बताती जा रही थी और आरती बैठी उसकी सारी बातें सुन रही थी..

  इधर महक अफजल चाचा के पास पहुंच चुकी थी, अफजल चाचा ने महक को अपने सामने सोफे पर बैठने को कहा, महक बैठ गई अफजल चाचा ने कहा कि बेटा मैंने तुमको यहां एक बहुत जरूरी बात बताने के लिए बुलाया है मैंने कल भी यह बात कही थी और आज भी कह रहा हूं कि बच्चों को उस गैलरी में बने कमरे की तरफ मत जाने देना वरना ये हम सभी लोगों के लिए बहुत खतरे की बात बन जाएगी..

महक ने जवाब दिया : चाचा मैंने बच्चों को अच्छी तरह समझा दिया है, अब आप बिल्कुल फिक्र मत करें..

चाचा क्या आप बता सकते हैं कि वो कमरा किसका था…? महक ने पूछा,

 चाचा ने जवाब दिया : हां बेटा, लेकिन ये बात तुम अपने ही तक रखना_ वो कमरा मेरी पोती ” तितली ” का था आज उसको मरे हुए 9 साल गुजर चुके हैं…

 महक ने आगे सवाल किया : ” आप उस कमरे में जाने से क्यों मना करते हैं?”  पहले तो चाचा ने इस बात को टाल दिया लेकिन महक के बहुत ज्यादा कहने पर चाचा ने महक को सब कुछ बता दिया…

  ” महक बेटा ! मेरे लड़के का नाम काशान था, जिस दिन तितली की पैदाइश हुई तो उसी दिन उसको जन्म देते हुए उसकी मां की मौत हो गई, काशान कपड़ों का कारोबार करता था, उसने कुछ दिनों के बाद दूसरी शादी कर ली, तितली की सौतेली मां बहुत जालिम थी वो तितली को बहुत परेशान करती थीं..

 एक दिन की बात है कि तितली की मां कपड़ों पर प्रेस कर रही थी_ तितली उनके पास गई तितली के हाथ में लाल रंग वाली गुड़िया थी_ उसकी सौतेली मां ने जलती हुई प्रेस तितली के हाथों पर रख दी_ तितली दर्द से बहुत तेज चिल्लाई और दौड़ती हुई सीढ़ियों से नीचे भागने लगी_ तभी अचानक सीढ़ियों से उसका पैर फिसला और वो नीचे सर के बल गिरी और उसकी मौत हो गई..

 लेकिन तितली की आत्मा वापस नहीं गई थी बल्कि इसी घर में मंडलाती रही, उसके अंदर बदले की एक आग जल रही है.. 

काशान को जब इस बात की खबर हुई कि उसकी मां ही ने तितली को मारा है तो वो गुस्से में घर वापस आ ही रहा था कि  उससे पहली तितली ने अपनी सौतेली मां को उन्हीं सीढ़ियों से धक्का देकर मार डाला.. तितली अपनी मौत का जिम्मेदार पूरे घर को समझती थी इसीलिए उसने दो दिनों बाद अपने बाप काशान को भी उन्हीं सीढ़ियों से गिरा कर मार दिया.. तितली सबको उन्हीं सीढ़ियों से गिराकर मारना चाहती थी..

मैंने एक जादूगर को ये सारी बातें बताई तो उन्होंने कहा कि मैं दो दिनों बाद आपके घर आऊंगा.. लेकिन शाम तक तितली ने हमारे जीने का आखिरी सहारा भी छीन लिया_ काशान के छोटे बेटे जीशान को भी तितली ने सीढ़ियों से धक्का देकर मार डाला_ ये तितली का छोटा भाई था लेकिन तितली हर एक को मारना चाहती थी..

बचपन में तितली एक लोरी गाया करती थी, तितली के मरने के बाद रात में हमें घर में वही लोरी सुनाई देती थी ऐसा लगता था जैसे कोई छोटी बच्ची वो लोरी गा रही हो..

तितली हूंँ मैं तितली हूंँ..

दूर कहीं से आई हूंँ.. 

पूरे घर की रानी हूंँ..  

फूलों की मैं मलिका हूंँ…

   दो दिनों के बाद वो जादूगर साहब आएं और उन्होंने वो गुड़िया मंगवाई जो तितली हर वक्त अपने साथ लिए घूमा करती थी जादूगर ने उस गुड़िया के अंदर तितली की आत्मा को कैद कर दिया और उसे उस कमरे में बंद करके कमरे के बाहर एक घेरा बना दिया और हम लोगों से कह दिया कि इस कमरे को कभी मत खोलना वरना तितली आजाद हो जाएगी और तुम लोगों की जान का खतरा फिर से बढ़ जाएगा..

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  महक ये सारी बातें सुनकर घर वापस आने लगी_ घर का दरवाजा खोलते ही उसकी नजर जब ऊपर गैलरी में पड़ी तो देखा कि आरती और अनम धीरे-धीरे उसी कमरे की तरफ जा रहे हैं.. महक ने बहुत तेज पुकार कर उनको रोका और कहा कि मैंने मना किया था कि उस कमरे की तरफ मत जाना तो तुम लोग उधर क्या लेने जा रही हो..? इन लोगों ने जवाब दिया : कुछ नहीं आंटी, वो हम ऐसे ही खेल रहे थे.. महक ने कहा : खबरदार, अगर दोबारा मैंने तुम लोगों को उस कमरे के आसपास भी देखा…

  महक सारे बच्चों के साथ बाहर गार्डन में आकर बैठ गई.. सारे बच्चे खेलने लगे और महक एक किताब पढ़ने में लग गई.. थोड़ी देर के बाद आरती ने आकर महक से कहा कि आंटी बहुत देर हो गई लेकिन अनम कहीं नहीं दिख रही है शायद वो घर वापस चली गई है.

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  इधर अनम धीरे-धीरे उसी कमरे की तरफ जा रही थी, वो उस कमरे का राज मालूम करना चाहती थी अनम उस कमरे के पास पहुंची उसने दरवाजे पर हाथ रखा_ दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया.. अरे ये क्या आज वो गुड़िया बेड पर नहीं थी बल्कि पास में पड़ी एक कुर्सी पर बड़ी आराम से बैठी थी और वो कुर्सी आगे-पीछे हिल रही थी..

ये यहां कैसे आई..? अनम हैरानी से सोचते हुए गुड़िया की तरफ बढ़ी, तभी अचानक दरवाजा खुद ब खुद बंद हो गया, अनम डरकर दरवाजे की तरफ मुडी़_ तभी उसे कमरे में किसी की सिसकियों की आवाज सुनाई दी_ उसने पीछे सोफे की तरफ देखा तो वहां कोई छोटी बच्ची जमीन पर बैठी घुटनों में सिर डालें रो रही थी…

“तुम क्यों रो रही हो..?” अनम ने उसकी तरफ बढ़ते हुए पूछा ” क्या तुम्हें यहांँ अफजल चाचा ने कैद कर रखा है..?” अनम के दिमाग में ख्याल आया कि शायद अफजल चाचा ने इस लड़की को यहां कमरे में कैद कर रखा है तभी वो हम लोगों को इस कमरे में आने से मना करते हैं.. 

” देखो तुम कुछ बोलो…” अनम यह कहते हुए उसके पास पहुंच गई, उस लड़की ने अपना सर उठाया तो अनम उसे देखकर हैरान रह गई_ क्योंकि उस लड़की का चेहरा बिल्कुल उसी गुड़िया से मिलता था जो सामने कुर्सी पर रखी हुई थी..

 ” अनम मेरे साथ खेलो ना..”

 उस लड़की ने बगैर होंठ हिलाए हुए कहा,  ये देखकर अनम बहुत डर गई और दरवाजे की तरफ भागी, अनम दरवाजा खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो खुल नहीं रहा था, तभी उसको महसूस हुआ जैसे वो लड़की बिल्कुल उसके पीछे खड़ी है, उसने पीछे मुड़कर देखा तो उस लड़की ने फिर से अनम से कहा

  ..”अनम मेरे साथ खेलो ना..”

देखते देखते उस लड़की का चेहरा काला हो गया_ उसके नुकीले दांत निकल आए_ उसके नाखून लंबे लंबे हो गए_ उसके बाल हवा में लहराने लगे_ उसका पूरा चेहरा बहुत डरावना बन गया.. 

अनम बहुत तेज चिल्लाई और दरवाजा पीटने लगी लेकिन दरवाजा खुल नहीं रहा था_ तभी एकदम दरवाजा खुला और अनम सीढ़ियों की तरफ भागी_ सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए अनम को किसी ने पीछे से धक्का दिया और वो बहुत तेज जमीन पर गिरी_ उसके सर से खून बहने लगा..

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अनम को जब होश आया तो महक आंटी उसके सर में हाथ फेर रही थीं, उसको होश में आता देख महक आंटी ने पूछा :  बेटा ! अब तुम्हारी तबीयत कैसी है_ मैंने मना किया था ना कि सीढ़ियों पर दौड़ते हुए मत चला करो_ देखो सीढ़ियों पर दौड़ते की वजह से तुम्हारा पैर फिसला और तुम नीचे गिर पड़ी…

” मैं गिरी नहीं थी आंटी_ मुझे किसी ने धक्का दिया था..”

” धक्का दिया था..”  महक ने हैरान होकर पूछा..

 जी आंटी.. और फिर अनम ने महक को सारी बातें रोते हुए बता डालीं…

यह सुनकर महक अपना सर पकड़ कर बैठ गई और अनम पर गुस्सा होने लगी कि मैंने मना किया था कि उस कमरे में मत जाना_ मेरी प्यारी बच्ची तुमने ये क्या कर डाला_? अगर अफजल चाचा को इस बात की खबर हो गई तो हम लोगों को घर से निकाल देंगे, और हम लोगों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि हम कोई दूसरे बड़े घर का किराया दे सकें

मेरे बच्चों ! तुम खुद मुझे देखते हो कि मैं कैसे इधर-उधर से इंतजाम करके तुम लोगों को पालती हूंँ_ मेरे पास तो बहुत ज्यादा पैसे भी नहीं होते हैं_ ये तो अफजल चाचा का हम पर एहसान था कि उन्होंने इतना बड़ा घर हम लोगों को बहुत ही कम किराए पर दे दिया और अब तो उन्होंने किराया भी माफ कर दिया है_ लेकिन अब हम क्या करेंगे_?  महक ने आंसू पूछते हुए कहा… 

..लेकिन चलो बच्चों परेशान ना हो_ मैं अभी जिंदा हूं_ मैं अपने जीते जी तुम पर कोई मुसीबत नहीं आने दूंगी_ मैं जल्द ही किसी दूसरे घर का इंतजाम करती हूं_ चलो तुम लोग भी अब जल्दी जल्दी खाना खा लो_ रात होने वाली है सब लोग लेटकर सो जाओ..

  रात में अनम सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी, रात के वही कुछ 1:00 बज रहे थे कि अचानक कमरे का दरवाजा खुला और उसके सामने वही डरावनी लड़की आकर खड़ी हो गई_ इससे पहले कि अनम चीखती चिल्लाती उसकी आवाज ही बंद हो गई..

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सुबह आरती अनम को बहुत देर से जगा रही थी मगर वो उठने का नाम नहीं ले रही थी, महक ने भी उसको बहुत जगाया और उसके ऊपर पड़ी चादर हटा दी_ तभी महक की नजर उसके हाथों पर गई_ अनम के हाथ में वही गुड़िया थी जिसके बारे में अनम ने कल सभी लोगों को बताया था कि वो गुड़िया उसने उस कमरे में कुर्सी पर हिलते देखी थी_ ये देखकर महक बहुत ज्यादा डर गई और सारे बच्चों को दूसरे कमरे में लेकर चली गई, महक समझ चुकी थी कि अनम के साथ रात में क्या हुआ है..?

थोड़ी देर के बाद अफजल चाचा घर में आए तो उन्होंने देखा कि अनम सीढ़ियों के पास खड़ी है उसके हाथ में वही गुड़िया थी जो तितली लिए घूमा करती थी, अफजल चाचा ने गुस्से में अनम से कहा : ये गुड़िया तुम कहां से उठा लाई हो…?  और फिर अनम की गरजती आवाज पूरे घर में गूंजने लगी..

तितली हूंँ मैं तितली हूंँ

दूर कहीं से आई हूंँ 

पूरे घर की रानी हूंँ  

फूलों की मैं मलिका हूंँ…

महक भी बच्चों को लेकर कमरे से बाहर आ चुकी थी.. तभी अचानक अनम ने अफजल चाचा की गर्दन पकड़ ली_ उसका हाथ लंबा होता चला जा रहा था_ उसने सीढ़ियों के ऊपर से ही अफजल चाचा को घसीटना शुरू कर दिया.. महक अफजल चाचा को बचाने के लिए दौड़ी और अनम से कहने लगी : अनम ये तुम क्या कर रही हो..?  अनम की एक डरावनी आवाज गूंजी_ ” अनम नहीं तितली हूं मैं..

देखते ही देखते उसने अफजल चाचा की गर्दन काट दी.. ये देख महक बच्चों को लेकर दरवाजे की तरफ दौड़ी_ लेकिन दरवाजा अपने आप बंद हो गया_ महक दरवाजा खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन दरवाजा खुलने का नाम नहीं ले रहा था_ अनम धीरे धीरे चलती हुई बच्चों की तरफ आ रही थी और जोर जोर से हंस रही थी..

” मैं किसी को नहीं छोडूंगी_ तुम लोगों ने मुझे मारा था..”

तभी अफजल चाचा ने दम तोड़ते हुए महक से कहा : बेटी ! उसकी गुड़िया को जला दो_ गुड़िया को जला दो_ जादूगर ने कहा था_ गुड़िया को जला दो…

अनम करीब पहुंच चुकी थी, आरती ने रोते हुए अनम से कहा : अनम तुम क्या कर रही हो_ मैं तुम्हारी आरती हूं_ तुम्हारी सबसे जिगरी दोस्त_ तुम हमें मत मारो_ ये हमारी महक आंटी हैं जिन्होंने कैसे-कैसे मेहनत करके हम लोगों को पाला है तुम उन्हीं को मारना चाहती हो..?

 अनम जोर जोर से हंस रही थी.. मैं किसी को नहीं छोड़ूंगी तुम्ही लोगों ने मुझे मारा था.. उसने हाथ बढ़ाकर आरती को हवा में उठा लिया, महक ने मौका देखकर पास पड़ा एक डंडा उठाया और अनम के सर पर मार दिया _अनम के हाथों से आरती छूट कर जमीन पर गिरी..

 महक सारे बच्चों को लेकर किचन की तरफ भागी और वहां  एक डिब्बे में रखा पेट्रोल अपने साथ उठा लिया.. अनम धीरे धीरे किचन की तरफ आ रही थी, महक ने पेट्रोल का डिब्बा खोला और अनम पर सारा पेट्रोल डाल दिया, महक माचिस जलाने की कोशिश कर रही थी लेकिन माचिस है कि जल ही नहीं रही थी_ अनम जोर जोर से हंस कर कह रही थी..” तुम में से कोई भी नहीं बचेगा मैं सबको मार डालूंगी..

 तभी माचिस की एक तीली जली और महक ने वो तीली अनम की तरफ उछाल दी, अनम और उसकी गुड़िया दोनों जलने लगें..

महक ने सारे बच्चों को अपनी बाहों में छुपा लिया_ उसकी आंखों से बहुत तेज आंसू बह रहे थे_ अनम का जिसम जलकर राख हो चुका था..

तितली हूंँ मैं तितली हूंँ

दूर कहीं से आई हूंँ 

पूरे घर की रानी हूंँ  

फूलों की मैं मलिका हूंँ…

तभी अचानक तितली की आवाज पूरे घर में गूंजी.. तितली इस दुनिया से जा चुकी थी लेकिन उसके साथ साथ महक ने अनम को भी खो दिया था_ आरती और फलक बराबर रोएं जा रहे थे.. महक की आंखों के सामने चार साल पहले वाला वो मंज़र आ गया जब एक बाजार में अनम ने आकर फटे पुराने कपड़ों में महक से कुछ खाने को मांगा था..

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आज इस बात को बीते 11 साल हो चुके हैं, महक ने एक डॉक्टर से शादी कर ली है_ वो दोनों एक बड़ा चाइल्ड होम चलाते हैं, फलक और आरती आज भी महक के साथ ही रहते हैं,  महक की अपनी दो लड़कियां हैं महक ने एक का नाम ” तितली” और दूसरी का नाम ” अनम ” रखा है क्योंकि महक आज भी अनम को याद करके बहुत रोती है_ शायद वो उसे कभी नहीं भूल पाएगी_ कभी भी नहीं…

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