नफरत की आग ☠️|Horror story in hindi

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Horror story in hindi

  मैं इस वक्त अमेरिका के एक बड़े शहर में रहती हूं मेरी शादी अमन से हुई है उसका अपना कपड़ों का कारोबार है धन दौलत की कोई कमी नहीं है, अमन को पाने के लिए मैं और मेरी मां ने बहुत सारे गुनाह किए हैं शायद आज उन्हीं का बदला मुझे मिल रहा है, उसके साथ मुझे एक पल का भी सुकून नसीब नहीं हुआ..

  अमन की पहली शादी मेरी फूफी की लड़की सुनीता से हुई थी सुनीता के बाप की मौत उसके बचपन ही में हो गई थी, सुनीता की मां ने उसे बड़ी तकलीफों से पाला था ; किस्मत ने मेरी फूफी के नसीब में अमन जैसा एक अच्छा दामाद लिख दिया था_ इसी बहाने अमन इंडिया आया और सुनीता से शादी करके 2-4 महीने यहां रहा और फिर अपने कारोबार के लिए अमेरिका चला गया..

 अमन सुनीता को भी अपने साथ अमेरिका ले जाना चाहता था लेकिन उसका वीजा ना लग सका_ इसलिए अमन को अकेला ही वापस जाना पड़ा.. अमन के जाने के 5 माह बाद सुनीता ने एक बेटी को जन्म दिया, बेटी की पैदाइश के 3 माह बाद अमन इंडिया वापस आया और कुछ माह अपने घर में रुकने के बाद फिर से वापस अमेरिका चला गया ; इस बार भी उसने सुनीता को अपने साथ अमेरिका ले जाना चाहा मगर फिर से उसका वीजा ना लग सका, अमन सुनीता से बहुत मोहब्बत करता था..

  दूसरी तरफ मेरी मां को सुनीता की खुशी से जलन होने लगी थी और उसने सुनीता की तलाक करवाने का मंसूबा बना लिया था ताकि फिर अमन के साथ मेरी शादी करा सके..

 मेरी मां अमन के घर बहुत ज्यादा जाने लगी और उसकी मां को सुनीता के खिलाफ भड़काने की कोशिश करने लगी.. जब बहुत कोशिश के बाद भी उनको अमन का घर उजड़ता ना दिखा तो उन्होंने जादू टोने का सहारा लिया..

 मेरी मां जादूगरों के पास गई और कुत्ते व सूअर के खून से लिखे ताबीज बनवा कर सुनीता के घर में दबा दिए ; जादूगरों के बताए हुए कुछ श्लोक भी पढ़ना शुरू कर दिए.. उनकी इस मेहनत का असर जल्द ही देखने को मिला..

 उन्हीं दिनों किस्मत से सुनीता का वीजा निकल आया और उसके लिए अमेरिका जाना आसान हो गया, लेकिन तभी अचानक उसकी मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब होने लगी, उसकी मां पर जादू का असर होने लगा था; डॉक्टरों ने बताया कि तुम्हारी मां को दिल का कैंसर हो चुका है अब ये ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेंगी..

 सुनीता का इस दुनिया में अपनी मां के सिवा कोई नहीं था वह उसे बिस्तर पर बीमार छोड़कर अमेरिका जाना नहीं चाहती थी, लेकिन दूसरी तरफ अमन ने सुनीता पर बहुत दबाव डाला कि वो बच्चों के साथ अमेरिका जल्द से जल्द आ जाए, लेकिन सुनीता अपनी मां की बीमारी की वजह से अमेरिका जाने के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए मियां बीवी के बीच की ये जिद झगड़े में बदल गई…

 मेरी मां तो बहुत दिनों से इस मौके की तलाश में थी_ इसलिए यह मौका मिलते ही मेरी मां ने समझाने के नाम पर सुनीता के ससुराल वालों को उसके खिलाफ कर दिया, सुनीता की मां के बारे में झूठी सच्ची कहानियां भी उसकी सास को सुनाई_ मेरी मां ने तो यह तक कह दिया कि ये कैंसर सिर्फ एक बहाना है सुनीता खुद ही अपनी मां को छोड़कर अमेरिका नहीं जाना चाहती है इसीलिए उसने यह ढोंग रचा है…

 दूसरी तरफ जब ये सारी बातें अमन को सुनने को मिली तो उसे भी यकीन होने लगा कि सुनीता उसे धोका दे रही है, इसीलिए अमन ने सुनीता के सामने शर्त रख दी कि अगर तुम अमेरिका नहीं आती हो तो तुम्हें मुझसे तलाक़ लेनी पड़ेगी, सुनीता ने तलाक़ लेना गवारा कर लिया लेकिन अपनी मां को इस हालत में छोड़कर जाना बर्दाश्त नहीं किया..

 अमन ने सुनीता से अपने दोनों बच्चे छीन लिए और उसे तलाक दे दी, तलाक के दो महीने के बाद ही सुनीता की मां की मौत हो गई, पति से तलाक_ बच्चों की दूरी_ और मां की मौत का सुनीता पर इतना गहरा असर पड़ा कि उसका दिमागी संतुलन बिगड़ने लगा.. इधर मौका देखकर मेरी मां ने मेरी शादी अमन से करवा दी…

 कुछ दिनों के बाद सुनीता ने मुझसे कहा मैं अपने बच्चों से मिलना चाहती हूं लेकिन मैंने उससे झूठ बोल दिया कि अमन ने खुद मेरे ऊपर इतनी सख्ती लगा रखी है कि अगर मैंने खुद भी तुमसे मिलने की कोशिश की तो वह मुझ पर बहुत गुस्सा होंगे_ बच्चों का तुमसे मिलना ना तो बहुत दूर की बात है..

 शादी के एक साल बाद मेरी मां ने मुझसे कहा कि बेटी सुनीता के इन दोनों बच्चों को अपने रास्ते से हटा दो वरना आगे चलकर ये तुम्हारे लिए मुसीबत बन जाएंगे.. मां के कहने पर मैंने उन दोनों बच्चों को करंट लगाकर मार डाला और अपना रास्ता साफ कर लिया, बच्चों की मौत का सुनकर सुनीता बहुत तड़पी..

 उसने आखिरी बार अपने बच्चों को देखने की तमन्ना जाहिर की_ लेकिन मेरी मां ने उसे मेरे घर में घुसने ही ना दिया, जब ससुराल वालों ने पूछा तो हम लोगों ने झूठ बोल दिया कि सुनीता कहती है कि वो बच्चे मेरे नहीं हैं अमन के हैं मुझे उनकी मौत से कोई फर्क नहीं पड़ता_ इसीलिए वह उनकी मौत पर भी नहीं आई है..

 मेरी मां के इस जवाब ने अमन की फैमिली वालों के अंदर सुनीता की नफरत और ज्यादा बढ़ा दी थी, बच्चों की मौत पर अमन घर ना आ सका_ वो अमेरिका ही में था और बहुत परेशान था लेकिन हम लोगों ने उसे एक एक्सीडेंट बताकर खामोश कर दिया..

 कुछ दिनों के बाद मेरा वीजा लग गया और मैं अमन के पास अमेरिका चली गई, मुझे वो सब कुछ मिल गया जो मैं और मेरी मां ने चाहा था, लेकिन मेरी जिंदगी से वो सुकून खत्म हो गया जो अमन से पहले मेरी जिंदगी में था, पता नहीं क्यों अमन मुझसे नफरत करने लगा था_ वो मुझसे सीधे मुंह बात नहीं करता था _हमेशा खामोश रहता, शायद ये मुझ पर ईश्वर की मार थी या फिर मेरे करतूतों ही का बदला था..

 मेरी कोई भी औलाद नहीं है, हकीकत तो ये है कि हम लोगों ने आज तक मियां बीवी वाला तरीका ही नहीं अपनाया कि हमारे यहां कोई औलाद होती, क्योंकि अमन मुझसे नफरत करने लगा था और वो क्लबों में जाने का आदि हो गया था, वो वहां की लड़कियों के साथ अपनी ख्वाहिश पूरी करता था, मैं तो बस एक बंजर जमीन की तरह उस घर में रह गई थी..

 मेरी मां की जुबान में फालिज हो गया था जिसकी वजह से वह बिल्कुल नकारा हो गई थी_ वह बोल भी नहीं पाती थी, ना कुछ खा सकती थी और ना ही किसी चीज का मजा ले सकती थी.. बहन ने मुझसे फोन पर बताया की आपके जाने के बाद सुनीता भी बच्चों के ग़म में बिल्कुल पागल सी होने लगी थी, इसीलिए मम्मी ने उसे पागलखाने भिजवा दिया था, 5 दिन के बाद पागल खाने के वार्ड से फोन आया कि सुनीता ने हाथ की नस काट कर खुदकुशी कर ली है…

  आज इस बात को गुजरे 3 साल हो चुके हैं_ आज भी मेरी वही हालत है_ मैं घर में एक नौकरानी की तरह रहती हूं, अमन रात में बहुत देर से घर आता है और मुझसे कभी सीधे मुंह बात भी नहीं करता..

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