हज़रत आमिना की वफात के बाद हुज़ूर (ﷺ) की हालत {part-8} | prophet Muhammad story

4.9/5 - (108 votes)

अम्मी की वफात के बाद हमारे हुज़ूर (ﷺ)बहुत ज़्यादा परेशान रहते थें और किसी से बात ना करतें थें, बस खामोश रहते, क्योंकि अब दुनिया में हमारे हुज़ूर (ﷺ) का अपना कोई नहीं बचा था, भाई बहन तो थें ही नहीं, बाप ने पैदा होने से पहले ही साथ छोड़ दिया था, और अब मां भी छोड़कर चली गई, सिर्फ एक बूढ़ें दादा अब्दुल मुत्तलिब थें, वही अपने पोते का हर तरह से ख्याल रखते थें_islamic waqiat in hindi

लेकिन एक 6 साल का बच्चा अपने दिल का दर्द अपने दादा से क्या बयान करता_ ? इसलिए हमारे हुज़ूर के आंसू तनहाई में ही निकलकर खुश्क हो जाते थें, कोई आपका दर्द समझने वाला नहीं था, मां की वफात का ग़म ऐसा था कि जिसे हमारे हुज़ूर (ﷺ) सारी ज़िंदगी भुला ना सकें_

दादा अब्दुल मुत्तलिब अपने पोते का बहुत ज़्यादा ख्याल रखते थें, जब भी खाना खाने बैठतें तो आवाज़ लगाकर बुलाते कि ” मेरे बेटे मोहम्मद को लेकर आओ, मैं उसके साथ खाना खाऊंगा” और फिर हमारे हुज़ूर (ﷺ) दादा अब्दुल मुत्तलिब के पास बैठकर खाना खातें

हज़रत अब्दुल मुत्तलिब मक्का के सरदारों में से थें, इसलिए उनके लिए काबा शरीफ के पास एक क़ालीन बिछाई जाती थी जिस पर उनके अलावा कोई भी नहीं बैठ सकता था, यहां तक कि उनके लड़के भी नहीं_

एक बार हज़रत अब्दुल मुत्तलिब काबा के पास अपनी क़ालीन पर बैठे हुए थें और दूसरे लोग आसपास उन्हें घेरे बैठे थें, कि तभी हमारे हुज़ूर (ﷺ) चलते हुए आएं और दादा अब्दुल मुत्तलिब की क़ालीन पर बैठने लगें तो एक आदमी ने हमारे हुज़ूर (ﷺ) का हाथ पकड़कर उन्हें पीछे को घसीट लिया और कहने लगा कि बेटा ! तुम इस कालीन पर नहीं बैठ सकते, ये हमारे सरदार अब्दुल मुत्तलिब की कालीन है_ अब्दुल मुत्तलिब ने जब ये देखा तो उस आदमी को रोका और फिर हमारे हुज़ूर (ﷺ) का हाथ पकड़कर अपनी क़ालीन पर बिठाते हुए कहा कि ऐ लोगों ! मेरे इस बच्चे की ही शान बड़ी निराली है, ये आगे चलकर बहुत बड़ा इंसान बनेगा_

एक बार हज़रत अब्दुल मुत्तलिब काबा शरीफ के पास बैठे हुए थें कि उसी वक्त उनके पास नजरान शहर के कुछ ईसाई आ गएं, उन ईसाइयों में उनका एक आलिम भी था जो अपनी किताबों के बारे में बहुत अच्छी तरह जानता था, तो उस ईसाई आलिम ने अब्दुल मुत्तलिब से कहा कि ” ऐ सरदार ! हमने अपनी किताबों में पढ़ा है कि मक्का शहर में आखिरी नबी आने वाला है और वो इसी शहर में पैदा होगा, उसकी ऐसी ऐसी निशानियां होंगी_islamic waqiat in hindi

prophet Muhammad story

वो ईसाई आलिम अभी ये बातें कर ही रहा था कि तभी एक आदमी हमारे हुज़ूर (ﷺ) को लेकर अब्दुल मुत्तलिब के पास पहुंचें, तो जैसे ही उस ईसाई आलिम ने हमारे हुज़ूर (ﷺ) को देखा तो वो घबराकर खड़ा हो गया और कहने लगा कि ये वही इंसान है कि जिसके बारे में हमारी किताबों में लिखा है कि वो आखिरी नबी होगा, ऐ अब्दुल मुत्तलिब ! ये लड़का तुम्हारा क्या लगता है ?

हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने जवाब दिया कि ये मेरा बेटा है, तो वो ईसाई आलिम खामोश होकर बैठ गया और कहने लगा कि फिर ये वो इंसान नहीं हो सकतें, क्योंकि हमारी किताबों में लिखा है कि उस लड़के का बाप उसकी पैदाइश से पहले वफात पा जाएगा_

ये सुनकर अब्दुल मुत्तलिब ने कहा कि बात दरअसल ये है कि ये मेरा पोता है और इसका बाप अब्दुल्ला इसकी पैदाइश से पहले वफात पा चुका है_ ये सुनकर उस इसाई आलिम ने कहा कि ” हां, ये बात हुई ना, तो फिर ये वही इंसान हैं कि जिनके बारे में हमारी किताबों में लिखा है, इसलिए ऐ अब्दुल मुत्तलिब ! तुम इस बच्चे का ख्याल रखना_

एक बार कबीला बनू मुदलज के कुछ लोग हज़रत अब्दुल मुत्तलिब से मिलने आएं, वो लोग ” कयाफ़ा शनास ” थें, मतलब लोगों का चेहरा और उनके हाथ पैर देखकर उसके आगे की ज़िंदगी के बारे में अंदाज़ा लगाकर सही सही बता दिया करते थें, इसलिए इन लोगों ने जब हमारे हुज़ूर (ﷺ) को देखा तो हज़रत अब्दुल मुत्तलिब से कहने लगें कि..

” ऐ अब्दुल मुत्तलिब ! ये बच्चा कोई आम बच्चा नहीं है, बल्कि ये आगे चलकर बहुत बड़ा इंसान बनेगा, क्योंकि इसके पैरों के निशान बिल्कुल उसी तरह है जैसे कि हज़रत इब्राहिम के पैरों के निशान मक्का में ” मक़ाम ए इब्राहिम ” पर बने हुए हैं_ ( दोस्तों ! ” मक़ाम ए इब्राहिम ” काबा में उन सुनहरी जालियों को कहते हैं जिसके अंदर एक ऐसा पत्थर रखा हुआ है कि जिस पर आज भी हज़रत इब्राहिम के पैरों के निशान बने हुए हैं_)

हमारे हुज़ूर (ﷺ) की बचपन ही से शान बड़ी निराली थी, हज़रत अब्दुल मुत्तलिफ की जब भी कोई चीज़ खो जाती और वो उन्हें ढूंढे ना मिलती तो वो उस चीज को ढूंढने के लिए फिर हमारे हुज़ूर (ﷺ) को भेजतें, और फिर अल्लाह का करिश्मा कि वो चीज़ हमारे हुज़ूर (ﷺ) कुछ ही देर में ढूंढकर वापस ले आतें_

एक बार हज़रत अब्दुल मुत्तलिब का एक ऊंट खो गया, तो उन्होंने उसे बहुत तलाश किया लेकिन कहीं ना मिला, अब्दुल मुत्तलिब ने अपने लड़कों को भेजा कि जाओ मक्के में जाकर मेरा ऊंट तलाश करो, लेकिन सारे लड़के बहुत देर तलाश करने के बाद वापस आकर कहने लगे कि ” ऐ अब्बा जान ! हमने मक्का की एक- एक गली छान मारी लेकिन हमें ऊंट पूरे मक्के में कहीं भी नहीं मिला_

आख़िर अब्दुल मुत्तलिब ने परेशान होकर हमारे हुज़ूर को ऊंट ढूंढने के लिए भेजा, हमारे हुज़ूर (ﷺ) ऊंट को ढूंढने पहाड़ियों की तरफ चले गए, अल्लाह की मदद की हमारे हुज़ूर (ﷺ) उधर ही चलते जा रहे थें जिधर वो ऊंट गया था_ बहुत देर गुज़र गई लेकिन हमारे हुज़ूर (ﷺ) वापस ना आएं, तो अब्दुल मुत्तलिब भी परेशान हो गएं और काबे के पास जाकर तवाफ करते हुए अल्लाह से दुआएं मांगने लगें कि ” ऐ अल्लाह ! मेरा ऊंट जहां कहीं भी हो उसे मेरे पोते मुहम्मद के हाथ लगा दे और मेरे पोते मोहम्मद को जल्दी से मेरे पास भेज दे, मैं उसके बगैर बहुत बेचैन हो रहा हूं_

islamic story

अब्दुल मुत्तलिब ये दुआ मांग ही रहे थें कि तभी सामने से हमारे हुज़ूर (ﷺ) अपने हाथ में ऊंट की रस्सी पकड़े काबा की तरफ आते नज़र आएं, अब्दुल मुत्तलिब ने दौड़कर हमारे हुज़ूर (ﷺ) को गले से लगा लिया और कहने लगें कि ” बेटा ! मैं तुम्हारी जुदाई से बहुत परेशान था, अब मैं कभी तुमको अपने से दूर नहीं भेजूंगा_

एक बार मक्का शहर में बहुत सूखा पड़ गया, कई सालों से बारिश नहीं हो रही थी, जानवर भी प्यास से मरते जा रहे थें, लोगों की हालत बहुत खराब थी, सब मौत की कगार पर थें कि उन्हीं दिनों में हमारे हुज़ूर (ﷺ) की दादी और हज़रत अब्दुल मुत्तलिब की बीवी ” हज़रत रुक़य्या ” ने एक ख्वाब देखा कि कोई कह रहा है कि..islamic waqiat in hindi

” ऐ मक्का वालो ! तुम्हारे बीच एक नबी आने वाला है और उस नबी के ज़ाहिर होने का वक्त करीब आ चुका है, उस नबी की वजह से तुम्हें ज़िंदगी मिलेगी और तुम पर खूब बारिशें होंगी, तुम्हारी फसलों और जानवरों में बरकत होगी, ऐ मक्का वालों ! अगर तुम्हें अपने इलाक़े में बारिश करवाना चाहते हो तो अपनों में से एक ऐसे इंसान को तलाश करो कि जिसका रंग गोरा हो, क़द लंबा हो, और उसकी पलकें घनी हों, और भौएं आपस में मिली हों, वो इंसान अपने सारे लड़कों को लेकर निकले और तुम में से हर खानदान का एक इंसान उस आदमी के साथ जाए, सब पाक- साफ होकर अच्छे कपड़े पहनें और खुशबू लगाएं और सबसे पहले जाकर काबा के पास ” हजरे अस्वद ” को चूमें, और फिर सामने वाले पहाड़ ” जबल ए अबू क़बीस ” पर चढ़ जाएं_

उस पहाड़ पर पहुंचकर वो आदमी जिसके बारे में ऊपर बताया गया है वो बैठकर बारिश की दुआ करे, और सारे लोग ” आमीन ” कहें, तो बारिश हो जाएगी_

सुबह उठकर हमारे हुज़ूर (ﷺ) की दादी ” रुक़य्या ” ने ये ख्वाब जब मक्का वालों को बताया तो सब हैरान रह गएं और कहने लगें कि ये ख्वाब कोई आम ख्वाब नहीं है , बल्कि अल्लाह की तरफ से हमें पैगाम भेजा गया है कि हम इस तरह पहाड़ पर चढ़कर दुआ मांगे तो हम पर बारिश होगी, इसलिए चलो और उस आदमी को तलाश करो कि जिसके बारे में ख्वाब में बताया गया है…islamic waqiat in hindi


Read more:-


Leave a Comment