नाग लड़का और बूढ़ी माँ😱 | jinn saap Horror Story in Hindi

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दिसंबर की एक सुबह में मेरे पास पति-पत्नी का एक जोड़ा आया उन्होंने हमें बताया हमारे खानदान में किसी जिन्नात का असर है वह इस तरह कि हमारे खानदान में किसी के यहां भी एक से ज्यादा लड़के नहीं हुए, जिसका भी एक से ज्यादा लड़का हुआ वह कुछ दिनों के बाद ही मर गया, शायद आज तक हमारे खानदान पर उसी सांप जिन्नात का श्राप है..

जिन्नात सांप का श्राप… क्या मतलब..? मैंने उनसे पूछा,

उन्होंने बताना शुरू किया कि हम से जुड़ी परेशानी हमारे दादा के वक्त से शुरू हुई है मेरे बाप मेरे दादा की इकलौती औलाद थे, ये बात उस वक्त की है जब मेरे बाप की उम्र 10 साल थी तभी एक दिन दादा के साथ यह हादसा पेश आया…

मेरे दादा एक गांव में रहते थे एक बड़े जमीदार के यहां नौकरी किया करते थे उस जमीदार ने दादा के काम से खुश होकर दादा को एक भैंस इनाम में दी थी, भैंस बहुत दूध देती थी अब घर में दूध – घी की कोई कमी नहीं रहती थी, एक दिन की बात है दादी जान जब उस भैंस का दूध निकालने गई तो उसके थनों में दूध बिल्कुल भी नहीं था..

दादी बहुत परेशान हुई, अगले दिन फिर सुबह दूध नहीं निकला..दादा – दादी शक में पड़ गए कि रात को शायद कोई चोर आकर दूध निकाल ले जाता है, उस रात दादा जागते रहें, दादा का शक सही निकला, सुबह तीन बजे के वक्त दादा ने भैंस के बोलने की आवाज सुनी, दादा खामोशी से भैंस की तरफ गए अंधेरा बहुत ज्यादा था दादा ने भैंस के पास गौर से देखा तो उन्हें वहां पर एक जवान लड़का भैंस के पास बैठा उसके थनों से दूध पीता नजर आया..

दादा ने गुस्से में उसे ललकारा, आवाज सुनते ही वह लड़का वहां से भाग गया, दादा के लिए ये सारी चीजें बहुत अजीब थी, दादा ने सोचा सुबह जमीदार से कहकर गांव में इस लड़के को ढूंढवाएंगे और फिर इसको सजा देंगे, दादी भी उठ चुकी थी, दादा ने उनको ये सारी बातें बताई, दादी ने कहा : अरे जाने दो, किसी भूखे का पेट भर गया होगा, यही हमारे लिए बहुत है..

सारी रात जागने की वजह से दादा की तबीयत कुछ खराब थी इसलिए उस दिन वह जमीदार के घर नहीं गए, दोपहर में किसी ने दरवाजा खटखटाया, दादा ने जाकर दरवाजा खोला… सामने वही खूबसूरत जवान लड़का खड़ा था जिसको दादा ने रात में भैंस के पास दूध पीते देखा था, दादा ने उसे पहचान लिया..

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अभी दादा गुस्से में उसे कुछ कहते कि उसने पहले ही कहना शुरू कर दिया कि साहब जी ! मैं एक परदेसी हूंँ कुछ दिन के लिए इधर रहने आया हूं मैं अभी आपके पास सिर्फ इसलिए आया हूंँ कि मैं 3 दिन से आप की भैंस का दूध पी रहा हूं और मैं चाहता हूं कि मैं उसकी कीमत आपको अदा कर दूंँ, यह कहकर उसने तीन सोने के सिक्के दादा के हाथ में रख दिये और उनसे कहा कि आप रोजाना अपनी भैंस को बाहर झाड़ियों के पास बांध दिया करें अगर आपको डर हो कि भैंस चोरी हो जाएगी तो उसकी कीमत मैं आपको पूरी पूरी अदा कर दूंगा, यह 5 सोने के सिक्के और हमसे लीजिए इसके बदले में मैं अगले एक महीने तक आपकी भैंस का दूध पियूंगा, यह बात आप सिर्फ अपनी बीवी को बता सकते हैं और किसी को भी इसके बारे में ना बताना, और मैं जब यहाँ से जाऊंगा तो आपको बहुत ढेर सारा इनाम दे करके जाऊंगा,

इतना कहकर वह लड़का पीछे झाड़ियों की तरफ चला गया, दादा वो सोने के सिक्के देखकर बहुत खुश हुए, उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि सोने के इतने बहुत से सिक्के अब उनके हो चुके हैं, दादा ने जब दादी को यह सारी बातें बताई तो दादी भी खुशी से फूले नहीं समा रही थी, उन सोने के सिक्कों को देखते हुए दादी ने कहा ; अरे जल्दी से जाकर भैंस को उन झाड़ियों के पास बांध आओ, वो कितना भला आदमी है जिसने हमारी मदद की..

उसके बाद से हर शाम को भैंस उन झाड़ियों के पास बांध दी जाती थी और सुबह वापस घर ले आते थे..

इस बात को 15 दिन गुजर चुके थे 1 दिन दोपहर के वक्त दो जोगी बीन बजाते हुए दादा के घर के सामने पहुंचे और दरवाजे के आगे बैठ गए, दादा उस वक्त घर में नहीं थे दादी ने दरवाजा खोलकर जोगियों को कुछ पैसे दिए, एक जोगी बोला : अगर रोटी मिल जाए तो बड़ी मेहरबानी होगी… दादी बोली : रोटी तो नहीं है, तुम को दूध पिला देती हूंँ.. यह कहकर दादी अंदर से दो कटोरी दूध ले आई..

जोगियों ने जैसे ही दूध का एक घूंट पिया चौंक कर एक दूसरे को देखा, एक जोगी ने दादी से पूछा : तुम्हारे अलावा घर में कौन-कौन रहता है…? दादी बोली : मैं, मेरा छोटा बेटा, और मेरे पति, इसके अलावा कोई नहीं.. जोगी ने कहा तुम मुझसे छुपा रही हो, तुम्हारे घर में एक और आदमी रहता है जो तुम्हारी भैंस का दूध पीता है, मेरा जादू मुझे बताता है कि वह तुम्हारा और तुम्हारे घर वालों का दुश्मन है, इसलिए तुम मुझे उसके बारे में बताओ वह कहां है…?

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सीधी-सादी दादी ने परेशान होकर उन जोगियों को सब कुछ बता दिया कि एक नौजवान लड़का कुछ दिनों से हमारी भैंस का दूध पी जाता है, मगर हमारे घर नहीं आता.. जोगी ने पूछा : वह कब आता है..? दादी ने उसे वक्त बता दिया, जोगी ने कहा : तुमको मालूम है वह इंसान नहीं है, बल्कि इंसान के रूप में कोई और चीज है, हमको इजाजत दो हम आज उसको पकड़ लेंगे और आप लोगों की जान बचा लेंगे..

सीधी-सादी दादी चालाक जोगियों की बातों में आ चुकी थी_ दादी ना सिर्फ उनको सब कुछ बताया बल्कि उनके लिए झाड़ियों के पास चारपाई भी डाल दी कि तुम दोनों आराम से बैठो मैं तुम लोगों के लिए खाना बनाती हूंँ…

शाम के वक्त दादा जब घर वापस आ रहे थे तो रास्ते में उनको वही नौजवान दिखा, दादा उसे देख कर खुश हो गए, नौजवान ने कहा मैं आपसे बहुत जरूरी बात करने आया हूंँ.. उसने बताया :

“मैं इंसान नहीं हूं बल्कि मैं एक जिन्नात हूंँ, मैं हमेशा सांप की शक्ल में रहता हूंँ, यह सावन का महीना चल रहा है इस महीने में मैं कुछ कमजोर रहता हूंँ.. दो जोगी कई महीनों से मेरे पीछे लगे हुए हैं_ अब वो दोनों जोगी आपके घर तक पहुंच चुके हैं और आज रात में मुझे पकड़ने की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि तुम्हारी बीवी ने उन्हें सब कुछ बता दिया है मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाउंगा, क्योंकि इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है बल्कि यह सब कुछ तुम्हारी बीवी की वजह से हुआ है, लेकिन तुम्हारा मुझ पर एहसान है इसलिए मैं माफ करता हूंँ, मैं अब यहांँ से बहुत दूर जा रहा हूंँ लेकिन मैंने तुमसे वादा किया था कि जब मैं जाऊंगा तो तुम को ढेर सारा इनाम देकर जाऊंगा..

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” ये लाल कपड़ा लीजिए और गुरुवार की सुबह अपने घर के सामने वाले शीशम के पेड़ के पास जाना, पेड़ के पास आपको एक सुराख मिलेगा, अपनी भैंस का थोड़ा दूध उस सुराख में डाल देना, जैसे ही तुम को कोई आवाज सुनाई दे उस सुराख के ऊपर यह लाल कपड़ा डाल देना, और वहां से वापस चले जाना कुछ देर के बाद फिर वहां वापस जाना तुम्हें तुम्हारा इनाम मिल जाएगा, इनाम लेकर इस गांव को छोड़ देना और दूर कहीं अपनी बीवी बच्चों के साथ जाकर रहना, क्योंकि इन जोगियों से आपकी जान को खतरा है…

दादा ये सब सुनकर बहुत परेशान हुए और अपनी बीवी के किए पर शर्मिंदा होने लगे, ये सारी बातें कहकर वह नौजवान लड़का वापस जाने लगा, दादा वही खड़े उस लाल कपड़े को देखते रहे और थोड़ी देर के बाद घर वापस आ गए..

घर वापस आकर दादा ने दादी को सब कुछ बता दिया और उनके किए पर गुस्सा भी हुए, लेकिन अब क्या हो सकता है अगली सुबह दादा शीशम के पेड़ के पास गए, लेकिन वहांँ तो कोई सुराख नहीं था, दादा गुरुवार का इंतजार करने लगे गुरुवार का दिन आया तो दादा उस शीशम के पेड़ के पास गए, उन्हें वहांँ पर एक सुराख नजर आया उन्होंने अपने साथ लाए हुए दूध को सुराख में डाल दिया, अचानक सुराख से अजीब अजीब सी आवाजें आने लगी, दादा ने लाल कपड़ा उस सुराख पर डाल दिया और वहांँ से वापस चले आए, थोड़ी देर के बाद जब वहांँ वापस गए और लाल कपड़ा को हटाया तो देखा कि वह सुराख वहांँ पर नहीं था और लाल कपड़े के नीचे सोने के बहुत से सिक्के रखे हुए थे..

दादा वो सिक्के देखकर बहुत खुश हुए और खुशी-खुशी अपने घर उन सिक्कों को लेकर वापस आएं, दादी को सारी बातें बताई और फिर उनसे कहा कि अब हम इस घर में नहीं रहेंगे, उसी दिन शाम को दादा वो घर छोड़कर जाने लगे..

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रास्ते में दादा को वही दो जोगी मिले, उन्होंने कहा कि तुमने हमारे साथ धोखा किया है अब हमारा श्राफ तुम्हारे खानदान के ऊपर रहेगा, हमारा श्राफ है कि अब तुम्हारे खानदान में कभी किसी की एक औलाद से ज्यादा लड़के नहीं होंगे, दादा ने उनको गुस्से से डाटा :” यहां से भाग जाओ, हम तुम्हारी बातों पर यकीन नहीं करते..”

इतना कहकर दादा आगे चल दिए, और बहुत दूर शहर में अपना घर बनवा कर वहांँ रहने लगे…

लेकिन आज तक हमें लगता है कि हमारे खानदान पर उन्हीं जोगियों का श्राप है, मैंने उन दोनों पति-पत्नी को गौर से देखा उनका हिसाब निकाला, और उनको बताया कि ऐसा कुछ नहीं है तुम लोग बिल्कुल सही हो, श्राप कुछ नहीं होता है, सब कुछ ईश्वर के करने से होता है आप लोग खुशी खुशी अपनी जिंदगी गुजारिए, और इस भ्रम में मत रहिए कि हम पर कोई श्राप है….

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