पुराने मंदिर की आत्मा 😱| Mandir horror hindi story

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Mandir horror hindi story

  दिसंबर की 16 तारीख थी, सर्दियों का मौसम था सुबह 5:00 बजे अंधेरे ही में मुझे शाह साहब की कॉल आने लगी..

उनकी कॉल देखकर मैं एकदम से चौक गया कि इतनी सुबह सुबह शाह साहब मुझे क्यों कॉल कर रहे हैं, मैंने फोन उठाया_ शाह साहब ने कहा ; बेटा आज 8:00 बजे मेरे पास आ जाना_ आज हमको पास के एक गांव जाना है जहां किसी बच्ची पर कुछ जिन्नातों का असर हो गया है_ इसलिए जल्दी अपनी गाड़ी लेकर आ जाना…

कहानी आगे बताने से पहले मैं आपको अपने बारे में बताता चलूं, मेरा नाम अरसलान है मैं 26 साल का हूं, मैं शाह साहब का ड्राइवर हूं_ शाह साहब दुआ ताबीज करने वाले आमिल और एक बड़े जादूगर हैं_ वह परेशान हाल लोगों की बहुत मदद करते हैं_ रोजाना उनके पास बहुत से लोग अपना इलाज कराने आते हैं…

मैं जल्द ही तैयार हुआ और कार लेकर शाह साहब के घर पहुंच गया, शाह साहब घर के बाहर ही मेरा इंतजार कर रहे थे, मेरे पहुंचते ही वो कार में बैठ गए और हम लोग पास के गांव की तरफ रवाना हो गए.. गांव के एक साहब जिनको ” महाराज ” कहा जाता था वह गांव के सरपंच थे हमें उन्हीं के घर जाना था, हम गांव पहुंचे तो सरपंच साहब हमारा इंतजार कर रहे थे…

उनके घर पहुंच कर मालूम हुआ कि उनकी बड़ी बेटी 2 दिन पहले मंदिर गई हुई थी जब से वह मंदिर से वापस आई है उसकी अजीब हालत है_ वो घर में हर एक को काटने दौड़ती है_ उसके दांत अजीब से नुकीले हो गए हैं उसकी आंखें लाल पड़ गई है उसके नाखून बड़े बड़े हो चुके हैं_ उसके चेहरे का रंग भी बदल चुका है_ देखने में किसी डायन चुड़ैल की तरह दिखने लगी है_ हर वक्त किसी जानवर की तरह वह गुर्राया करती है… घर वालों ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया था_ वो अंदर ही से दरवाजा पीट रही थी.. मैं ये सब देखकर सहम सा गया..

शाह साहब के साथ रहने की वजह से मुझे रोजाना कोई ना कोई नया मामला देखने को मिलता था_ लेकिन आज का ये मामला मेरे लिए कुछ ज्यादा ही डरावना था, शाह साहब ने सरपंच जी से कहा कि आप कमरे का दरवाजा खोलिए..! सरपंच जी ने घबराकर शाह साहब से कहा, शाह साहब ! वह लड़की आपको भी कोई नुकसान पहुंचा सकती है… लेकिन शाह साहिब ने उनके हाथ से चाबी लेते हुए कहा कि आप परेशान ना हो सब ठीक हो जाएगा, शाह साहब ने दरवाजा खोला, वो लड़की कमरे में जमीन पर लेटी दीवार की तरफ देख देख कर गुर्रा रही थी और अजीब अजीब आवाजें निकाल रही थी…

शाह साहब ने कमरे के अंदर कदम रखा तो उस लड़की ने बड़ी गुस्से वाली नज़रों से शाह साहब को देखा मानो उनको मार ही डालेगी, वह तेजी से उठी और शाह साहब पर अपने नुकीले नाखूनों से हमला करना चाहा, लेकिन शाह साहब के करीब पहुंचते-पहुंचते वह बिल्कुल खामोशी सी हो गई और चुपचाप जमीन पर बैठकर रोने लगी… शाह साहब ने उसके माथे पर अपना अंगूठा रखा और कुछ देर अपनी आंखें बंद कर ली, उस लड़की की भी आंखें बंद हो गई थी अचानक शाह साहब ने उस लड़की से पूछना शुरू किया बेटी मंदिर के नागो बाबा ने तुम को क्या खिलाया था..? लड़की ने जवाब दिया : मुझे कोई मीठी चीज खिलाई थी_ वो मेरी बलि चढ़ाना चाहते हैं…

ये बताने के बाद वह लड़की बेहोश हो गई, शाह साहब ने आंखें खोली और सरपंच जी से कहा कि मुझे उस मंदिर ले चलो जहां ये गई थी… हम लोग उस मंदिर पहुंचे, वहां बहुत से पुजारी बैठे हुए थे हमने उनसे बात की और उस लड़की के बारे में बताया और पूछा कि वो नागो बाबा हमें कहां मिलेगा..?

उन लोगों ने जवाब दिया कि उनके बारे में हम लोगों को भी नहीं पता_ वो कभी-कभी मंदिर आते हैं और फिर पता नहीं कहां जंगल में गायब हो जाते हैं_ वो कई सालों से कड़ी तपस्या कर रहे हैं.. शाह साहब ने उन पुजारियों से पूछा : नागो बाबा का कमरा कौन सा है…? पुजारियों ने मंदिर के एक आदमी को बुलाया और उसे एक चाबी देते हुए कहा : ” इन लोगों को नागो बाबा के कमरे तक ले जाओ_ लेकिन तुम अंदर मत जाना…

हम लोग नागो बाबा के कमरे के पास पहुंचे, उस आदमी ने ताला खोला और हम लोगों से अंदर जाने को कहा, हम लोग अंदर चले गए वहां बहुत सारी मूर्तियां रखी हुई थी कुछ इंसानों की हड्डियां भी पड़ी हुई थी और कमरे में एक तरफ कुछ औरतों के पुराने कपड़े पड़े हुए थे, हम लोग यह सब देखकर बहुत हैरान हुए; शाह साहब ने मेरे अलावा सारे लोगों को कमरे से बाहर जाने को कहा और फिर कमरा अंदर से बंद कर लिया..

शाह साहब ने जमीन पर एक गोल घेरा बनाया और मुझे उसमें बैठने को कहा, और फिर मेरे सामने ही खुद भी एक घेरा बनाकर उसमें बैठ गए और कुछ पढ़ने लगे, शाह साहब ने मुझसे कह दिया था कि कुछ भी हो जाए तुमको इस घेरे से बाहर नहीं निकलना है, मैंने भी अपनी आंखें बंद कर ली, अचानक मुझे महसूस हुआ कि बहुत गर्म हवा का झोंका मुझे छूकर गुजरा है मैंने डर कर आंखें खोल दी..

शाह साहब आंखें बंद किए कुछ पढ़ने में मसरूफ थे, अचानक मेरी नजर कमरे में रखी एक बड़ी मूर्ति पर पड़ी_ उसके मुंह से खून बह रहा था और उसकी आंखें लाल हो रही थी_ कमरे के हर कोने से बड़े-बड़े सांप निकलकर उस मूर्ति से लिपटते जा रहे थे, ऐसे में घंटियां अपने आप बजने लगी, उनका शोर इतना ज्यादा था कि मेरे कान फटे जा रहे थे… अचानक मुझे अपनी नीचे तरी सी महसूस हुई, जब नीचे देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई_ उस मूर्ति के मुंह से खून निकल कर पूरे कमरे में फैलता जा रहा था जो कि अब हम लोगों के नीचे तक पहुंच चुका था सारे कमरे में खून बढ़ता जा रहा था..

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कमरे की छत गिरने वाली है मेरा सर चकराने लगा_ मैं ये सब देखकर बहुत डर गया, और वहीं पर बेहोश होकर गिर पड़ा… जब मुझे होश आया तो मैं सरपंच जी के घर में था शाह साहब मेरे पास बैठे कुछ पढ़ रहे थे, मुझे होश में आता देख शाह साहब बहुत खुश हुए_ मेरे लिए दूध लाया गया मैंने उठकर दूध पिया..

शाह साहब ने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मुझसे कहा कि बहुत किस्मत वाले हो कि जिंदा हो…! मैंने शाह साहब से पूछा कि उस कमरे में क्या हुआ था..? शाह साहब ने कहा : जल्दी से ठीक हो जाओ, फिर सब बताते हैं ; सरपंच की बेटी का नाम सावित्री था वह बिल्कुल ठीक हो चुकी थी इस वक्त वह सर पर दुपट्टा ओढ़े शाह साहब के सामने खामोश बैठी थी, शाह साहब ने बताया..

दो दिन पहले जब सावित्री मंदिर में चढ़ावा चढ़ाने गई थी तो उसी वक्त मंदिर के एक पुजारी नागो बाबा की उस पर नजर पड़ गई, उसने इस पर जादू करके इसे अपने काबू में लाना चाहा ताकि वो इसकी बलि चढ़ा सकें और अपने शैतानी इरादे में कामयाब हो सके, ये काम करने के लिए उसने एक गंदे शैतान का सहारा लिया था वो शैतान सावित्री के दिमाग पर सवार हो गया था और उससे उल्टी-सीधी हरकतें करा रहा था..

लेकिन अब सावित्री बिल्कुल ठीक हो चुकी है_उस नागो बाबा का असर अब इस पर से पूरा खत्म हो चुका है वो बाबा अब इसका कुछ बुरा नहीं कर सकता, आप लोग भी परेशान ना हो सावित्री बिल्कुल ठीक हो चुकी है…

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