हमारे हुज़ूर (स.) दाई हलीमा की गोद में [part-5]| Prophet Muhammad & Halima Sadiya

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Prophet Muhammad & Halima Sadiya

  हज़रत हलीमा सादिया हमारे हुज़ूर (स.अ.) को गोद में लिए अपने घर की तरफ जा रही थीं और रास्ते में उन्हें बरकतें ही बरकतें नज़र आ रही थीं_ मोहल्ले के हर घर से गुलाबों की खुशबू आ रही थी और हर तरफ एक अजीब सा नूर फैला हुआ था..

हलीमा सादिया हमारे हुज़ूर (स.अ.) को लेकर जब अपने घर को पहुंची तो शाम का अंधेरा हो चुका था, वो फरमाती हैं कि मैंने देखा कि जैसे ही मैं हुज़ूर (स.अ.) को लेकर घर में दाखिल हुई तो हर तरफ एक रोशनी सी फैल गई और घर में खुशबू ही खुशबू आने लगी, मैं हैरान थी कि आखिर ये सब क्या हो रहा है_?

हमारे हुज़ूर (स.अ.) हलीमा सादिया के घर अपनी ज़िंदगी गुजा़रने लगें, हमारे हुज़ूर (स.अ.) का चेहरा ऐसा चमकता था जैसे चौधवी रात का चांद हो, जो भी हमारे हुज़ूर (स.अ.) को देखता तो वो अपने दांतो तले उंगलियां दबा लेता _ हमारे हुज़ूर (स.अ.) के चेहरे पर हर वक्त एक नूर रहता था, हज़रत आयशा से रिवायत है कि वो फरमाती हैं कि एक रात मैं अपने घर में बैठी एक कपड़ा सिल रही थी, अंधेरा बहुत ज़्यादा था और अचानक मेरे हाथ से सुई ज़मीन पर गिर गई, मैं परेशान होकर उसे तलाश रही थी लेकिन अंधेरे में मुझे कुछ नज़र नहीं आ रहा था, तभी अचानक हुज़ूर (स.अ.) कमरे के अंदर आएं , आपके चेहरे से ऐसा नूर निकल रहा था कि मुझे कमरे में वो सुई बिल्कुल साफ नज़र आ गई और मैंने उसे उठा लिया…

हमारे हुज़ूर (स.अ.) हलीमा सादिया के घर ज़िंदगी गुजारतें रहें और हलीमा सादिया हमारे हुज़ूर (स.अ.) को दूध पिलातीं और उन्हें बोलना सिखाती, उनकी आंखों में काजल लगातीं, उनके सर में तेल लगातीं और उंगली पकड़कर उन्हें चलना सिखातीं…

उन दिनों क़बीला बनू साद में बहुत ज़्यादा ग़रीबी थी, यहां तक की ज़मीनों पर घास तक नहीं उगती थी, उस इलाके के जानवर और बकरियां चरने जातें तो शाम को भूखे लौटतें थें और उनके थनों में दूध का एक क़तरा भी ना होता था…

लेकिन हलीमा सादिया जबसे हुज़ूर (स.अ.) को अपने घर लेकर आई थीं तो उनकी बकरियां जब भी चरने जातीं तो शाम को पेट भर कर वापस लौटती, मुहल्ले के दूसरे लोग अपने चरवाहों पर गुस्सा होतें कि तुम लोग भी अपनी बकरियां जाकर वहीं चराया करो जहांँ हलीमा सादिया की बकरियां चरती हैं..

मुहल्ले वालों के चरवाहे यही करने लगें और अपनी बकरियां हलीमा सादिया की बकरियों के साथ चराने लगें_ लेकिन फिर भी पता नहीं हलीमा सादिया की बकरियां थोड़ी सी घास खाकर उसी में उनका पेट भर लेतीं और उनके थन दूध से भर जातें और दूसरे लोगों की बकरियां शाम को भूखी लौटती और उनके थनों में दूध का एक कतरा भी ना होता…

हलीमा सादिया हर रोज़ अपने घर में बरकतें ही बरकतें देखतीं, हमारे हुज़ूर (स.अ.) बहुत तेज़ी से बड़े हो रहे थें, वो दूसरे लड़कों की तरह धीरे-धीरे नहीं बढ़ते थें, यहां तक कि दो साल में हमारे हुज़ूर (स.अ.) एक मज़बूत लड़के की तरह दिखने लगें..

हलीमा सादिया हमारे हुज़ूर (स.अ.) को अपने घर दो साल का वादा करके लाई थीं, दो साल गुज़र चुके थें , अब हलीमा सादिया हमारे हुज़ूर (स.अ.) को वापस करने उनकी मां आमिना की तरफ चलीं , हलीमा सादिया का दिल नहीं चाह रहा था कि मैं अपने इस प्यारे बच्चे को अभी इतनी जल्दी वापस करूं इसलिए वो हुज़ूर (स.अ.) को लेकर मक्का पहुंची और हज़रत आमिना से कहने लगीं कि ऐ आमिना ! वादा के मुताबिक दो साल तो गुज़र चुके हैं, लेकिन मेरी ख्वाहिश है कि मैं अपने इस बच्चे को अभी कुछ दिन और अपने पास रखूं, क्योंकि मैं देखती हूं कि मक्का में बहुत ज़्यादा बीमारियां फैली हुई हैं और मुझे डर है कि कहीं मेरे बच्चे को कोई बीमारी न लग जाए, इसलिए आप मेहरबानी करके कुछ दिनों के लिए मेरा बच्चा मेरे पास रहने दें…

हलीमा सादिया ने बहुत ज़्यादा ज़िद की तो हज़रत आमिना ने भी कह दिया कि ठीक है तुम इतना ज़्यादा कह रही हो तो कुछ दिन और अपने साथ मेरे बच्चे को ले जा सकती हो, हलीमा सादिया बहुत खुश हुई और हुज़ूर (स.अ.) को लेकर अपने घर आ गई..

एक दिन हमारे हुज़ूर (स.अ.) आंगन में खेल रहे थें, उस ज़माने में मिट्टी के घर होते थें, हलीमा सादिया अपना कुछ काम कर रही थीं और उनके शौहर सामने एक चारपाई पर लेटे हुए थें कि तभी वहां से कुछ यहूदी लोग गुज़रे, उन्होंने जैसे ही हमारे हुज़ूर (स.अ.) को देखा तो तेज़ी से चलकर हमारे हुज़ूर (स.अ.) के पास आएं और आपकी आंखें बहुत गौर से देखने लगें_ हलीमा सादिया घबरा गई कि ये कौन लोग हैं कि जिन्होंने मेरे बच्चे को पकड़ रखा है ?

फिर उन यहूदियों ने हलीमा सादिया से पूछा कि इस लड़के की आंखों में ये लाल रंग के डोरे हमेशा रहते हैं या किसी बीमारी की वजह से हैं? हलीमा सादिया ने कहा कि हमेशा रहते हैं, फिर उन यहूदियों ने हुज़ूर (स.अ.) की पीठ पर मुहरे नबुव्वत देखी तो आपस में कहने लगें कि इस बच्चे को कत्ल कर दो वरना ये हमारे दीन को ख़त्म कर देगा हलीमा सादिया उनकी ये बातें सुन गईं और बहुत घबरा गई तभी उन यहूदियों ने हलीमा सादिया से पूछा कि ” इस बच्चे का बाप कहां है ? हलीमा सादिया ने फरमाया कि वो सामने चारपाई पर लेटे हैं, ये सुनकर यहूदियों ने कहा कि अगर तू कहती कि इस बच्चे का बाप मर चुका है तो हम इसे अभी क़त्ल कर देतें.. ये कहकर वो यहूदी वहां से चले गए…

हलीमा सादिया बहुत ज़्यादा घबरा गई थीं लेकिन इसी वाक़िए के कुछ ही दिनों बाद हलीमा सादिया के घर के पास से कुछ इसाई लोग गुज़रे, जब उन्होंने हमारे हुज़ूर (स.अ.) को देखा तो वो समझ गए और हलीमा सादिया से पूछने लगें कि ऐ बीबी ! इस लड़के की आंखों में ये लाल डोरे हमेशा रहते हैं या कभी-कभी? हलीमा सादिया ने कहा कि हमेशा रहते हैं, तो उन ईसाइयों ने कहा कि ऐ बीबी ! ये लड़का हमें दे दो, हम इसे अपने इलाक़े में ले जाकर खूब अच्छी तरह पालेंगे, क्योंकि ये आने वाली नस्लों का नबी है ये सुनकर हलीमा सादिया ने फरमाया कि मैं ऐसा नहीं कर सकती, मैं ये बच्चा मक्का से लेकर आई हूं और मुझे उन लोगों को वापस करना है, ये सुनकर वो ईसाई वहां से चले गएं…

एक दिन हज़रत हलीमा हमारे हुज़ूर (स.अ.) को लेकर एक मेले में गई, ये मेला ” उकाज़ ” नामी एक बस्ती में लगा करता था, इस मेले में अरब के बड़े-बड़े लोग आते थें और पूरा महीना हर तरफ चहल-पहल रहती थी_ हज़रत हलीमा हमारे हुज़ूर (स.अ.) को लेकर उसी मेलें में पहुंची कि तभी एक जादूगर औरत की नज़र हमारे हुज़ूर (स.अ.) पर पड़ गई और उसने चीखते हुए लोगों से कहा कि ” ऐ लोगों ! इस बच्चे को क़त्ल कर दो, वरना ये आने वाले ज़माने में तुम्हारे बुतों को गिरा देगा और तुम्हारे दीन को ख़त्म कर देगा_

हलीमा सादिया ने जैसे ही ये बातें सुनी तो भीड़ में हुज़ूर (स.अ.) को लेकर छुप गई, लोगों ने हमारे हुज़ूर को बहुत तलाश किया लेकिन अल्लाह की मदद कि वो लोग हमारे हुज़ूर (स.अ.) को ना पा सकें…
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हज़रत हलीमा तेज़ी से हुज़ूर (स.अ.) को वापस लिए अपने घर की तरफ जा रही थीं कि उनका गुज़र ” ज़िल हिजाज़ ” बस्ती से हुआ, यहां भी एक मेला लगा हुआ था, उस मेले में हर साल एक बहुत बड़ा जादूगर आकर बैठता था और लोगों को देखकर उनकी किस्मत बताता था, जब हज़रत हलीमा हमारे हुज़ूर (स.अ.)को लेकर उस जादूगर के पास से गुज़रीं तो उस जादूगर की नज़र जैसे ही हमारे हुज़ूर (स.अ.) पर पड़ी तो उसने चीखना शुरू कर दिया और कहने लगा कि ऐ लोगों ! इस लड़के को मार डालो वरना ये तुम्हारे दीन के मानने वालों को खत्म कर देगा और तुम्हारे बुतों को तोड़ देगा और अरब से तुम्हारे बाप दादा की निशानियां खत्म कर देगा_ ये कहते हुए वो जादूगर हुज़ूर (स.अ.) की तरफ झपटा ताकि आपको पकड़कर जान से मार दे, लेकिन उसी वक्त उस पर अल्लाह का अज़ाब आ गया और वो पागल हो गया और फिर उसी पागलपन में उसकी मौत हो गई…

ये सारी चीज़ें देखकर हलीमा सादिया बहुत ज़्यादा घबरा गई और उन्होंने घर आकर अपने शौहर को सब कुछ बताया तो वो कहने लगें कि ऐ हलीमा ! मुझे तो इस बच्चे के बारे में अब डर लगने लगा है, तुम जितना जल्दी हो सके इस बच्चे को उसके घर मक्का वापस कर आओ…

इस बात को कई दिन गुज़र गएं, एक दिन हमारे हुज़ूर (स.अ.) ने अपनी मां हलीमा सादिया से पूछा कि ऐ अम्मी जान ! ये दिन भर मुझे अपना भाई अब्दुल्ला और अपनी बहन शीमा नज़र नहीं आती, वो दोनों दिन में कहां चले जाते हैं? तो हलीमा सादिया ने बताया कि ” बेटा ! वो दोनों दिन में बकरियां चराने जाते हैं और शाम को वापस आते हैं तो हुज़ूर (स.अ.) ने कहा कि ” अम्मी जान ! कल से मैं भी उनके साथ बकरियां चराने जाऊंगा…

और फिर अगले दिन से हुज़ूर (स.अ.) भी अपने भाई- बहन के साथ बकरियां चराने जाने लगें_ तीन दिनों बाद दोपहर के वक्त अचानक हज़रत शीमा और उनके भाई अब्दुल्ला दौड़ते हुए घर आएं और हलीमा सादिया के सामने रोते हुए कहने लगें कि ” अम्मा जान ! हमारे मक्की भाई को दो लोगों ने पकड़ लिया है और उनका सीना फाड़ दिया है और वो उनके सीने से कुछ निकाल रहे हैं.. ये सुनकर हज़रत हलीमा बहुत ज़्यादा घबरा गई और अपने शौहर के साथ जंगल की तरफ भागीं…

जंगल में पहुंचकर देखा कि हमारे हुज़ूर (स.अ.) एक तरफ खड़े हुए हैं और कांप रहे हैं, हुज़ूर के चेहरे का रंग बदला हुआ था, हलीमा सादिया ने पहुंचते ही हुज़ूर (स.अ.) को गले से लगा लिया और कहने लगीं कि ऐ मेरे बच्चे ! तुम्हें क्या हो गया तुम परेशान क्यों हो? तो हुज़ूर (स.अ.) ने उन्हें सबकुछ बता दिया कि ऐ अम्मा जान ! मैं अकेला यहां खड़ा हुआ था कि अचानक दो आदमी आएं , उन्होंने सफेद चादर पहनी हुई थी, उसमें से एक ने दूसरे से पूछा कि क्या यही वो लड़का है? तो दूसरे ने कहा कि हां, यही वो लड़का है कि जिसके बारे में अल्लाह ने हुकुम दिया है_

और फिर उन दोनों ने मुझे ज़मीन पर लिटा दिया और मेरा सीना फाड़कर अंदर से कोई चीज़ निकाली और उसे फेंक दिया, फिर मेरे सीने को किसी चीज़ से सिल दिया, अम्मा जान ! मुझे इतनी देर ज़रा भी दर्द ना हुआ…

ये ” शक़्के सद्र ” का वाकि़या है कि अल्लाह ने हज़रत जिब्रील व मिकाईल को भेजा था और हुज़ूर (स.अ.) के अंदर से वो चीज़ निकलवा दी थी कि जिसकी वजह से इंसान गुनाह करता है और शैतान उस पर हावी होता है, तो हमारे हुज़ूर (स.अ.) को बचपन ही से पाक़ीज़ा बना दिया गया था…

ये सुनकर हलीमा सादिया बहुत ज़्यादा घबरा गई और हुज़ूर (स.अ.) को लेकर अपने घर पहुंची, शौहर ने कहा है कि ऐ हलीमा ! अब तुम देर ना करो, बल्कि आज ही इस बच्चे को लेकर मक्का जाओ और इसे इसकी मां के हवाले कर दो, मुझे डर है कि अब इस बच्चे के साथ कुछ बुरा होने वाला है…!

हज़रत हलीमा सादिया हुज़ूर (स.अ.) को लेकर मक्का की तरफ चल दीं , दो दिनों के सफर के बाद वो मक्का पहुंचीं, लेकिन अभी वो मक्का में दाखिल हो रही थी कि अचानक हमारे हुज़ूर (स.अ.) उनके हाथों से कहीं गायब हो गए, वो बहुत परेशान हो गई, शाम का वक्त हो रहा था और हज़रत हलीमा इधर उधर हमारे हुज़ूर (स.अ.) को तलाश कर रही थीं लेकिन कुछ पता नहीं लग रहा था..

आखिर परेशान होकर दौड़ती हुई हज़रत अब्दुल मुत्तलिब के पास पहुंची और कहने लगीं कि ऐ अब्दुल मुत्तलिब ! मैं आपके पोते मोहम्मद को वापस करने मक्का आ रही थी कि पता नहीं मक्का के पास अचानक वो कहीं गायब हो गएं , मैंने उन्हें बहुत तलाश किया लेकिन कुछ पता ना चला, ये सुनकर अब्दुल मुत्तलिब भी परेशान हो गए और उन्होंने अपने लड़कों को दौड़ाया कि जाओ जल्दी से मक्का में हर तरफ ढूंढो कि मेरा पोता किधर है, जल्दी करो ! कहीं ऐसा ना हो कि उसे कोई भेड़िया अपना शिकार बना ले, सारे लोग परेशान होकर हमारे हुज़ूर (स.अ.) को ढूंढने लगें…

हज़रत अब्दुल मुत्तलिब काबे में गएं और उसका ग़िलाफ पकड़कर रोते हुए अल्लाह से दुआ की कि ” ऐ अल्लाह ! मेरे पोते मुहम्मद की हिफाज़त फरमाना, वो जहां भी हो उसे सही सलामत मेरे पास भेज दीजिए…

इतनी देर में ” वरक़ा बिन नौफ़ल ” और एक दूसरे आदमी अब्दुल मुत्तलिब के पास हुज़ूर (स.अ.) को लेकर आएं और आगे बढ़ाते हुए कहा कि ऐ अब्दुल मुत्तलिब ! ये आपका बेटा है हमें मक्का के बाहर एक जंगल में मिला था! हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने हुज़ूर (स.अ.) को गले से लगा लिया और फिर उन्हें लेकर काबे का तवाफ करने लगें और अल्लाह से दुआएं मांगने लगें कि ऐ अल्लाह ! मेरे बच्चे की हिफाज़त फरमाना और फिर अब्दुल मुत्तलिब ने हुज़ूर (स.अ.) को हज़रत आमिना के पास भेज दिया…

हज़रत आमिना ने हलीमा सादिया को अपने पास बुलाकर पूछा कि ऐ हलीमा ! तुम इतनी जल्दी मेरे बच्चे को वापस क्यों ले आईं, अभी तो कुछ दिनों पहले तुम इतना ज़िद करके मेरे बच्चे को अपने घर ले गई थी ? हलीमा सादिया ने फरमाया कि ऐ आमिना ! हमारा आपका वादा दो साल का हुआ था कि मैं दो साल इस बच्चे को अपने यहां दूध पिलाऊंगी, अब दो साल गुज़र चुके हैं इसलिए मैं चाहती हूं कि अब आप ही अपने बच्चे को पालें…

हज़रत आमिना समझ गईं की बात कुछ और है इसलिए कहने लगीं कि ऐ हलीमा ! सही सही बताओ कि असल मामला क्या है? जब हज़रत आमिना ने बहुत ज़्यादा कहा तो हलीमा सादिया ने उन्हें सबकुछ बता दिया कि कैसे जादूगरों ने कत्ल करने को कहा था, और यहूदियों ने कत्ल करने की कोशिश की थी, और फिर आपके सीने को दो लोगों ने कैसे फाड़ा था

हलीमा सादिया ये सारी बताती जा रही थीं और रो रोकर कह रही थी कि मुझे डर लग रहा है कि कहीं मेरे इस बच्चे के साथ कुछ बुरा ना हो जाए? तो हज़रत अमीना ने कहा कि ऐ हलीमा ! क्या तुम मेरी बच्चे पर शैतान से डरती हो कि कहीं शैतान मेरे इस बच्चे को कोई नुकसान न पहुंचा दें?

तो हज़रत हलीमा ने कहा कि हां अमीना ! मुझे इसी बात का डर लगता है, तो हज़रत आमिना ने फरमाया कि ऐ हलीमा ! ऐसा हरगिज़ ना होगा, जब मेरे इस बच्चे की पैदाइश हो रही थी तो मैंने देखा कि मेरे अंदर से एक नूर निकला है कि जिसने सारी दुनिया को रोशन कर दिया है_ और फिर हज़रत आमिना ने दाई हलीमा को पैदाइश के वक्त के सारे मोजिज़ें बतलाएं और फरमाया कि ऐ हलीमा ! अब तुम जा सकती हो, मैं खुद चाहती थी कि मेरा प्यारा बच्चा अब मेरे पास आ जाए..

दाई हलीमा वापस चली गई और फिर हमारे हुज़ूर (स.अ.) अपनी अम्मी हज़रत आमिना के पास ज़िंदगी गुजारने लगें



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