बाप की वफात के बाद हुज़ूर (स.अ.) की पैदाइश {part-3} | Prophet Muhammad’s birth after Father’s death

Rate this post

Prophet Muhammad's birth after Father's death

हज़रत अब्दुल्ला की वफात के बाद हज़रत आमिना पर ऐसा सदमा लगा कि वो अक्सर खामोश ही रहती थीं, किसी से भी बात ना करतीं, बहुत खामोश और गुमसुम सी रहती थीं उन्होंने खुद के लिए जीना ही छोड़ दिया था_ सिर्फ पेट में एक बच्चा था जिसकी खातिर उन्होंने खुद को कुर्बान कर दिया था और अपने आप को समझाया करती थीं कि ” ऐ आमिना ! अब तुम्हारी सबसे बड़ी उम्मीद तुम्हारा ये बच्चा है तुम्हें इसके लिए जीना है, तुम परेशान ना हो, अल्लाह तुम्हें अकेला नहीं छोड़ेगा…islamic waqia

शौहर को याद कर करके हज़रत आमिना बहुत रोया करती थीं_ वक्त गुज़रता गया_ दिन हफ्ते बन गए और हफ्ते महीने बन गए_ हुज़ूर (स.अ.) अपनी मां के पेट में 9 महीने की मुद्दत पूरी कर रहे थें… हज़रत आमिना फरमाती हैं कि जब मेरा बच्चा मेरे पेट में था तो मैं बड़ी अजीब अजीब चीजें देखती थीं, अगर मैं घर से बाहर निकलती तो बादल का एक साया मेरे ऊपर आ जाता और मुझे धूप न लगती, अगर मैं पानी भरने के लिए ज़मज़म के कुएं की तरफ जाती तो रास्ते में जितने पेड़ होते उनकी टहनियां मेरे सामने झुक जातीं जैसे मुझे सलाम कर रही हों_ मैं हैरान थी कि आखिर ये सब मेरे साथ क्यों हो रहा है_ और जब ज़मज़म के कुएं के पास पहुंचतीं तो नीचे का पानी अपने आप ऊपर आने लगता और बिल्कुल ऊपर मुंडेर तक आ जाता कि मैं अपने हाथों ही में बाटी पकड़कर पानी भर लेती थी…

मक्का की औरतें मुझे ज़मज़म के कुएं के पास खड़ा रखतीं और मुझे जाने नहीं देती थीं, वो कहतीं थी कि ऐ आमिना ! तुम थोड़ी देर और खड़ी रहो वरना तुम्हारे जाने से ये पानी अभी नीचे चला जाएगा और फिर हमें भरने में बहुत तकलीफ होगी_

इसीतरह हज़रत आमिना फरमाती हैं कि मैं औरतों से सुना करती थी कि जब पेट में बच्चा होता है तो मां को बहुत ज़्यादा तकलीफें झेलनी पड़ती हैं, कभी हाथ पैरों में दर्द, कभी सर में दर्द, कभी उल्टी होना, कभी बुखार होना, और कभी चिड़चिड़ापन आना_ ये सारी बातें सुनकर मुझे अपने बारे में बड़ी हैरानी होती थी कि मुझे तो इन 9 महीनों में कोई भी ऐसी तकलीफ देखने को ना मिली, यहां तक कि जब तक मेरा बच्चा मेरे पेट में रहा तो मेरे सर में दर्द तक नहीं हुआ…

इसी तरह हज़रत आमिना को बड़े अजीब अजीब ख्वाब भी नज़र आते थें, वो फरमाती हैं कि जब मैं रात को सोती तो मुझे ख्वाब में नज़र आता कि मेरे जिस्म के अंदर से एक नूर निकला है और उसने सारी दुनिया को रोशन कर दिया है_ ये सब देखकर मुझे यकीन हो चुका था कि मेरे पेट में जो बच्चा है वो कोई आम इंसान नहीं है…

हुज़ूर (स.अ.) के दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिब दिन रात का़बे के पास जाकर उसका ग़िलाफ पकड़कर अल्लाह से रो रो कर दुआएं करते कि ” या अल्लाह ! मेरा बेटा अब्दुल्ला तो अब इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन उसके घर एक बच्चे की पैदाइश होने वाली है, या अल्लाह ! उस बच्चे की हिफाज़त फरमाना और मेरे अब्दुल्ला की नस्ल बाकी रखना… हुज़ूर (स.अ.) के सारे चाचा इसी इंतज़ार में रहतें कि मेरे भाई अब्दुल्ला के घर बच्चा कब पैदा होगा…

यहूदियों की किताब ” तौरात ” में लिखा हुआ था कि जब आखिरी नबी आएगा तो उसके पैदा होने से दस दिन पहले आसमान पर एक लाल रंग का सितारा निकलकर चमकने लगेगा_ तो जब हुज़ूर (स.अ.) की पैदाइश के 10 दिन बचें तो आसमान पर वो सितारा निकल आया, उसे देखकर यहूदियों में भगदड़ मच गई और उनके आलिमों ने सारे यहूदियों को जमा किया और कहा कि ” देखो ! आसमान पर लाल तारा चमकने लगा है इसका मतलब है कि वो आखिरी नबी आने वाला है, जाकर मालूम करो कि इस वक्त मदीना में किसके यहां लड़के की पैदाइश में 10 दिन बचे हैं..islamic waqia in hindi

यहूदियों ने जाकर मदीना में मालूम किया तो वहां बहुत सी औरतें ” हमल ” से थीं, उनके पेट में बच्चा था लेकिन अभी किसी का वक्त करीब नहीं आया था, किसी के 2 महीने बाकी थे तो किसी के 4 महीने_ उन यहूदियों ने आकर अपने आलिमों को बताया कि मदीना में ऐसा कोई बच्चा पैदा होने वाला नहीं, तो उनके आलिमों ने कहा कि अब मक्का में जाकर देखो तो सारे यहूदी मक्का पहुंचें और आकर मालूम किया कि वहां किसी के घर बच्चे की पैदाइश होने वाली है..?

लोगों ने बताया कि हां यह मक्का में पांच ऐसी औरतें हैं कि जिनके घर बच्चे की पैदाइश होने वाली है, तो उन यहूदियों ने कहा कि ” नहीं, ऐसे बच्चे की पैदाइश कि जिसका बाप वफात पा चुका हो.. तो लोगों ने बताया कि हां, अब्दुल मुत्तलिब का पोता पैदा होने वाला है उस बच्चे के बाप अब्दुल्ला की अभी कुछ महीने पहले वफात हो गई थी_ ये सुनकर यहूदियों की ” हाय ” निकल गई और वो सब रोते- चिल्लाते अपने आलिमों के पास पहुंचे और कहा कि ” हाय अफसोस ! आज नबुव्वत यहूदियों से निकलकर मक्का वालों में पहुंच चुकी है…Prophet Muhammad’s birth after Father’s death

वक्त गुज़रता गया और आखिर वो दिन भी आया कि जिसका सभी को बेसबरी से इंतजा़र था, वो दिन भी आया कि जिसका इंतज़ार आसमान व ज़मीन, चरिंद व परिंद और हर मखलूक़ कर रही थी, आज उस बच्चे की पैदाइश हुई जिसकी वजह से इस दुनिया को बनाया गया था कि अगर वो ना होता तो शायद कुछ भी ना होता, आज उस बच्चे की पैदाइश हुई कि जिसके लिए चांद के दो टुकड़े कर दिए गएं, उस बच्चे की पैदाइश हुई कि जिसकी खा़तिर सूरज को अपनी जगह पर रोक दिया गया और अल्लाह ने हुक़्म दे दिया कि ऐ सूरज ! अभी मत डूबना क्योंकि मेरे हबीब मुहम्मद (स.अ.) ने अभी असर की नमाज़ नहीं पढ़ी है, आज उस बच्चे की पैदाइश हुई जिसके पास सारी ज़िंदगी में ज़िब्रील छब्बीस हज़ार बार आएं…

रात का वक्त हो चुका था_ हज़रत आमिना के पेट में हल्का सा दर्द उठा और उनको महसूस हुआ कि शायद आज मेरे बच्चे की पैदाइश होने वाली है तो उन्होंने हज़रत अब्दुल मुत्तलिब को इस बात की ख़बर कर दी_ हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने अपने मोहल्ले की एक दाई ” हज़रत शिफा ” को अपने पास बुलाया और कहा कि आज रात तुम आमिना के साथ ही गुजा़रों, क्योंकि मेरे बेटे अब्दुल्ला के घर आज बच्चा पैदा होने वाला है…

रात गुज़रती गई_ चांद भी कहीं खामोश होकर बादलों में छुप गया था, हज़रत आमिना फरमाती हैं कि जिस रात मेरे घर बच्चे की पैदाइश हुई तो उस दिन मेरे घर में गरीबी का ये आलम था कि हमारे यहां चिराग में तेल जलाने के भी पैसे नहीं थें_
दोस्तों ! इस गरीबी में हमारे हुज़ूर (स.अ.) इस दुनिया में तशरीफ लाएं…

उस रात हज़रत अब्दुल मुत्तलिब और उनके सारे लड़के घर के बाहर बैठे रहे कि अगर मेरे भाई अब्दुल्लाह की बीवी के साथ कोई भी हादसा हो तो हम फौरन उसके लिए इलाज का इंतजाम करेंगे और पूरी रात कोई भी नहीं सोया..

रात ढलती जा रही थी_ चांद भी खामोश होकर डूब चुका था, हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा था, घर के अंदर भी अंधेरा, बाहर भी अंधेरा_ सहरी का वक्त हो चुका था कि अचानक हज़रत आमिना के पेट में हल्का सा दर्द उठा और वो समझ गई कि अब बच्चे की पैदाइश होने वाली है_ उन्होंने दाई शिफा को आवाज़ देकर कहा कि मुझे दर्द हो रहा है…

एक घंटा बच्चे की पैदाइश में गुज़रा और फिर सुबह होने से कुछ पहले हमारे हुज़ूर (स.अ.) इस दुनिया में तशरीफ लाएं.. हुज़ूर (स.अ.) की पैदाइश पर तीन बातें बड़ी अजीब हुईं जिन्हें देखकर दाई शिफा भी हैरान रह गई_ पहली चीज़ कि जब बच्चा पैदा होता है तो उसकी नाफ मां की आंत से जुड़ी होती है लेकिन हमारे हुज़ूर (स.अ.) की नाफ़ मां की आंत से बिल्कुल अलग थी…

दूसरी चीज़ कि जब बच्चा पैदा होता है तो उसके साथ बहुत ज़्यादा खून निकलता है, लेकिन हमारे हुज़ूर (स.अ.) जब पैदा हुए तो अंदर से खून का एक कतरा भी नहीं निकला_ तीसरी चीज़ कि जब लड़का पैदा होता है तो उसका ख़तना नहीं हुआ होता है लेकिन हमारे हुजूर जब पैदा हुएं तो आपका मां की पेट के अंदर ही से ख़तना हुआ था, दुनिया में आपका ख़तना नहीं किया गया…

ये तीन चीज़ें देखकर दाई शिफा घबरा गई और हज़रत आमिना से कहने लगीं कि ऐ आमिना ! मैंने अपनी सारी ज़िंदगी में ऐसा बच्चा नहीं देखा_ हज़रत शिफा ने हुज़ूर (स.अ.) को अपनी गोद में लेकर एक तरफ ज़मीन पर लिटा दिया…

दाई शिफा ने जैसे ही हुज़ूर (स.अ.) को ज़मीन पर लिटाया तो हुज़ूर (स.अ.) ने एक झटके से करवट बदली और घुटने टेक कर सीधे सजदे में चले गए_ यह देख हज़रत आमिना की हैरानी की इंतिहा ना रही_ पूरे 15 मिनट तक हुज़ूर (स.अ.) सजदे में रहें और फिर अपना सर उठा कर आसमान की तरफ उंगली से इशारा किया और सारी दुनिया को बता दिया कि ” ऐ लोगों ! इस दुनिया को पैदा करने वाली ज़ात सिर्फ एक अल्लाह की है..

हज़रत आमिना फरमाती हैं कि मैंने अपने बच्चे को अपनी गोद में लिया तो अचानक क्या देखती हूं कि आसमान के तारे ज़मीन के करीब होते चले आ रहे हैं और फिर अचानक एक बादल का साया मेरे कमरे के अंदर आया और फिर मेरी गोद से मेरा बच्चा उस बादल के साया में गायब हो गया, उस बादल के अंदर से एक आवाज़ आने लगी कि ” ऐ जिब्रील ! इस बच्चे को सारी दुनिया का चक्कर लगाओ, सारे नबियों की खूबियां दो_ इसे यूसुफ की खूबसूरती दो_ इसे अय्यूब का सब्र दो_ इसे इब्राहिम की दोस्ती दो_ इसे दाऊद की मीठी जुबान दो…

और फिर हज़रत आमिना फरमाती हैं कि थोड़ी देर के बाद वो बादल का साया ख़त्म हो गया और मैं देखती हूं कि मेरा बच्चा मेरी गोद में लेटा हुआ था..

सुबह होने वाली थी_ दाई शिफा ने बाहर निकलकर हुज़ूर के दादा अब्दुल मुत्तलिब को खुशखबरी सुनाई और कहा कि ऐ अब्दुल मुत्तलिब ! तुझे पोता मुबारक हो.. यह सुनकर रात भर के जागे अब्दुल मुत्तलिब की सारी थकन जैसे एक पल में खत्म हो गई हो और वो इतना ज़्यादा खुश हुएं कि उनकी आंखों से आंसू बहने लगें और दाई शिफा से कहा कि जल्दी से मुझे मेरा पोता लाकर दो_ दाई शिफा जैसे ही हुज़ूर (स.अ.) को बाहर लेकर के आई तो नज़र पड़ते ही सबके होश उड़ गएं कि इस क़दर खूबसूरत बच्चा आमिना के घर पैदा हुआ है…?

सारे चाचा भी अपने भतीजे को देखकर बहुत ज़्यादा खुश हुएं _ यहां तक कि जब अबू लहब की बांदी ” सुवैबा ” ने अबू लहब को जाकर खुशखबरी सुनाई कि ऐ अबू लहब ! तुझे भतीजा मुबारक हो_ तो ये सुनकर अबू लहब इतना ज़्यादा खुश हुआ कि उसने अपनी बांदी सुवैबा से कहा कि ” जा ! मैंने तुझे भतीजे की खुशी में आज़ाद कर दिया..”

हज़रत अब्दुल मुत्तलिब बहुत बूढ़े हो चुके थें लेकिन फिर भी मारे खुशी के अपने पोते को गोद में लिए क़ाबा की तरफ दौड़ते जा रहे थें , सारे मक्का वाले भी खुशी से नारा लगाते हुए हज़रत अब्दुल मुत्तलिब के पीछे चल रहे थें_ काबे के पास पहुंचकर अब्दुल मुत्तलिब ने अल्लाह से दुआ मांगी कि ” ऐ अल्लाह ! मेरे पोते को सलामत रखना और उसे ज़िंदगी में बहुत बड़ा इंसान बनाना_”

शायद अब्दुल मुत्तलिब को पता ही नहीं था कि उनका पोता तो वो इंसान है जिसकी खातिर इस दुनिया को बनाया गया है, उनका पोता इतना बड़ा इंसान है कि अल्लाह ने मेराज के मौके़ पर उसे जमीन से उठाकर सातवें आसमान पर अपने सामने बिठाया और उससे बातें की, उनका पोता तो वो इंसान है कि जिसे मायूस देखकर और उसकी आंखों में आंसू देखकर आसमानों पर तहलका मच जाता था…

हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने काबे का गिलाफ़ पकड़कर अपने पोते के लिए दुआएं मांगी और फिर उन्होंने अपने पोते का नाम ” मोहम्मद ” रखा ( मोहम्मद का मतलब होता है कि ‘ जिस इंसान की बहुत ज़्यादा तारीफ की जाए ‘ )__ ये नाम सुनकर मक्का वाले कहने लगें कि ऐ अब्दुल मुत्तलिब ! ये कैसा अजीब सा नाम तुमने अपने पोते का रख दिया है, हमने तो आज तक ऐसा नाम नहीं सुना.. तो हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने जवाब दिया कि ” ऐ मक्का वालों ! तुम्हें क्या पता कि मेरे इस बच्चे की एक दिन कैसी शान होगी, लोग इसके पीछे चलेंगे..?

एक बार हुज़ूर (स.अ.) मदीना में अपने सहाबा इकराम के साथ बैठे हुए थें तो हुज़ूर (स.अ.) के चाचा हज़रत अब्बास ने फरमाया कि ” ऐ अल्लाह के रसूल ! मुझे बचपन ही में मालूम हो गया था कि आप बड़े होकर कोई बहुत बड़े इंसान बनोगे..” हुज़ूर (स.अ.) ने पूछा कि ऐ चचा जान ! आपको कैसे पता चला..? तो हज़रत अब्बास (रज़ि°)ने फरमाया कि ऐ अल्लाह के रसूल ! जब आप दो महीने के थें तो एक रात मैंने आपको देखा कि आप चारपाई पर अकेले लेटे रो रहे थें, मैंने आपको चुप कराने की कोशिश की लेकिन आपने मेरी तरफ नहीं देखा बल्कि अचानक आसमान की तरफ देखकर मुस्कुराने लगें, मैं हैरान रह गया और फिर मैंने भी आसमान की तरफ देखा तो मेरी नजरें फटी की फटी रह गई, मैंने देखा कि चांद आपकी उंगली के इशारे पर नाच रहा है आप जिधर उंगली ले जातें चांद उधर दौड़ता है , ये मंज़र देखकर मैं समझ गया कि आप कोई आम इंसान नहीं हैं, हुज़ूर (स.अ.) ने फरमाया कि हां मेरे चाचा जान ! आप सही फरमा रहे हैं..
ان القمر يناغيني ويحاكيني ويمنعني من البكاء..

कि बचपन में चांद मुझे कहानियां सुनाता था, मेरे साथ खेलता था, और मुझे रोने नहीं देता था_ सुब्हानल्लाह ! ऐसे थें हमारे नबी, कि जिनके घर में इतनी गरीबी थी कि उनकी मां अपने इस यतीम बच्चे के लिए एक खिलौना तक नहीं खरीद सकती थी, तो अल्लाह ने चांद ही को हुकुम दे दिया कि ऐ चांद ! तुम मेरे महबूब के लिए खिलौना बन जाओ और उसे रोने मत देना …

हुज़ूर (स.अ.) की जिस दिन पैदाइश हुई तो उस दिन दुनिया में जितने भी बुत थें वो सब ज़मीन पर औंधे मुंह गिर पड़ें_ ईरान के बादशाह के दरबार में एक हज़ार साल से एक आग जल रही थी, वो लोग आग की पूजा किया करते थें, हुज़ूर (स.अ.) की जिस वक्त पैदाइश हुई तो एकदम वो आग बुझ गई और उस बादशाह ने अपने महल में अपनी शक्ल की चौदह लाटें बनवा रखी थी_ हुज़ूर (स.अ.) की पैदाइश पर वो सारी लाटें धड़ाम से ज़मीन पर जाकर गिरी…

अगले दिन दोपहर के वक्त एक यहूदी आदमी अपना कुछ सामान बेचने के लिए मक्का आया हुआ था, तो उसने आसमानों पर देखा तो उसे वो सारी निशानियां दिखने लगी जो आखरी नबी के पैदा होने की निशानियां थी, तो उसने मक्का वालों से पूछा कि ” क्या आज किसी के यहां कोई बच्चा पैदा हुआ है..?” तो लोगों ने बताया कि हां, फलां फलां औरत के यहां लड़का हुआ है_ उस यहूदी ने कहा कि ” नहीं, ऐसा बच्चा कि जिसका बाप ना हो_” तो लोगों ने बताया कि हां, अब्दुल मुत्तलिब का पोता पैदा हुआ है.. उस यहूदी ने कहा कि मुझे चलकर दिखाओ, मैं उस बच्चे को देखना चाहता हूं..

फिर वो यहूदी हज़रत आमिना के घर पहुंचा और हुज़ूर (स.अ.) को अपनी गोद में लिया और फिर पलट कर हुज़ूर (स.अ.) की पीठ को देखा तो उसकी चीखें निकल पड़ी, क्योंकि हुज़ूर (स.अ.) की पीठ पर नबी होने की मुहर लगी हुई थी_ जब उस यहूदी ने नबुव्वत की मुहर देखी तो वो रोता हुआ कहने लगा कि ” हाय अफसोस ! आज यहूदियों के हाथ से नबुव्वत निकल गई अब उनकी बर्बादी बहुत करीब है…

(जारी है)


Read more : –

Leave a Comment