पुरानी हवेली की मोहब्बत 💔- Hindi horror story | Purani Haweli ki muhabbat

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hindi horror story

…ये आज से 15 साल पुरानी बात है जब मेरा दोस्त जीशान अस्पताल में अपनी जिंदगी की आखिरी सांसे ले रहा था उसने खुद मुझे अपनी आपबीती सुनाई, वो बताने लगा :-

6 महीने पहले की बात है मैं पुरानी हवेली वाले रास्ते से अपने स्कूल जाया करता था मेरे पास एक बहुत पुरानी साइकिल थी.. पिताजी की कमाई बहुत कम थी, मैं घर पर हमेशा जिद किया करता था कि मुझे नई साइकिल दिला कर दो ; लेकिन पिताजी हमेशा इस बात को टाल देते थे और कहते ” बेटा ! अगले साल तुमको एक नई साइकिल दिलवा देंगे_ इस साल किसी तरह इसी साइकिल से स्कूल जाया करो..

मेरे स्कूल जाने के दो रास्ते थे_ एक रास्ता मेन सड़क का था लेकिन वह बहुत लंबा रास्ता था, एक बार मैं उस रास्ते से गया था लेकिन मुझे स्कूल पहुंचते-पहुंचते 2 घंटे गए थे ; और दूसरा रास्ता पुरानी हवेली वाला रास्ता था जो घने जंगल से होकर के निकलता था, उस रास्ते पर बहुत सन्नाटा रहता था..

पुरानी हवेली की मोहब्बत

मैं रोजाना हवेली वाले रास्ते ही से स्कूल जाया करता था.. जब भी मैं हवेली के पास पहुंचता तो वहां मुझे अजीब सा डर लगता था, मैं वहां पहुंचते ही साइकिल की स्पीड तेज कर देता.. वो हवेली एक पुराने खंडरात में बदल चुकी थी, रात में लोग उस रास्ते पर आते डरते थे…

एक दिन जब मैं स्कूल से वापस लौट रहा था तो अचानक उसी हवेली के सामने मेरी साइकिल की चैन टूट गई ; मैं बहुत परेशान हो गया_ क्योंकि घर बहुत दूर था और इतनी दूर पैदल चलना मुमकिन नहीं था, मैंने साइकिल को देखा चैन टूटने की वजह से वो बिल्कुल चलने के काबिल नहीं थी..

मैं उसे लेकर पैदल घर की तरफ चलने लगा_ अचानक मुझे अपने पीछे से एक आहट सी महसूस हुई जैसे कोई मेरे पीछे से दौड़ता हुआ गुजरा है, मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो वहां तो हर तरफ सन्नाटा मचा था बस एक काला कौवा पेड़ पर बैठा तेज तेज चिल्ला रहा था जैसे उसने किसी को देख लिया हो.. मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि वो जंगल था और वहां चिड़िया कौवों का बोलना कोई नई बात नहीं थी.. मैं आगे चल पड़ा, मुझे घर पहुंचते देर हो गई _मैंने साइकिल खड़ी की और हाथ मुंह धो कर सीधे अपने कमरे चला गया…

मम्मी ने कमरे में खाना लगाते हुए पूछा कि ” बेटा ! आज इतनी देर क्यों हो गई…? मैं गुस्से से चिल्लाने लगा कि मुझे नई साइकिल खरीद कर दो_ रोजाना इसकी चैन रास्ते में टूट जाती है मैं इतनी दूर इसे पैदल घसीट कर लाया हूंँ..” मम्मी ने कहा : “ठीक है बेटा मैं तुम्हारे पापा से बात करती हूंँ_ तुम परेशान ना हो_ लो खाना खा लो..

Purani Haweli ki muhabbat

एक दिन की बात है जब मैं स्कूल से वापस आ रहा था तो उसी हवेली के सामने रास्ते पर मुझे एक गुलाब का फूल पड़ा मिला.. वो गुलाब एक कागज के ऊपर रखा हुआ था, मैंने साइकिल रोकी और गुलाब का फूल उठा लिया; तभी मेरी नजर कागज पर पड़ी, मैंने उसे उठाया.. उस पर लिखा हुआ था ..”जीशान ! तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो_ क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे…?”

ये देखकर मैं बड़ा हैरान हुआ कि ऐसे मुझे रास्ते में कौन ये लेटर दे सकता है_? वहांँ तो दूर-दूर तक सन्नाटा मचा हुआ था.. मैंने वो लेटर और गुलाब अपने साथ लिया और घर की तरफ चल दिया..

उस रात जब मैं सोया तो सपने में नजर आया कि मैं उसी पुरानी हवेली के सामने खड़ा हूं_ उस हवेली के अंदर से एक औरत बाहर आई_ उसकी शक्ल बहुत डरावनी थी—-काले कपड़े पहन रखे थे— लंबे लंबे बाल —- आंखों और मुंह से खून टपक रहा था— उसने एक डरावनी सूरत में मुस्कुराते हुए कहा ” जीशान ! मेरे पास आओ_ तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो_ क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे..?”..

उसकी गरजदार आवाज की वजह से मेरी आंख खुल गई.. मैं पूरा पसीने में तर था_ डर की वजह से कांप रहा था, मैं तेजी से उठा और अलमारी से वो लेटर निकाला जो दोपहर मुझे उसी हवेली के सामने मिला था.. मैंने लेटर खोल कर पढ़ा तो उसमें वही बातें लिखी थी जो अभी ख्वाब में वो डरावनी औरत कह रही था..

Real Horror story

अब मुझे पुरानी हवेली से और ज्यादा डर लगने लगा था, सुबह उस हवेली वाले रास्ते से जाने की हिम्मत नहीं हुई और मैं पक्की सड़क से स्कूल की तरफ चल दिया, लेकिन स्कूल पहुंचते-पहुंचते मुझे 2 घंटे लग गए, मुझे काफी देर हो गई थी, पुरानी साइकिल इतनी दूर चलाने की वजह से मेरे पूरे जिस्म में दर्द हो रहा था और साथ-साथ लेट आने पर स्कूल टीचर ने भी मुझे बहुत डांटा..

मैंने किसी को कुछ भी नहीं बताया था.. जब दोपहर स्कूल में छुट्टी हुई तो मैं साइकिल लिए स्कूल के बाहर खड़ा था_ और सोच रहा था कि मैं किस रास्ते से अपने घर जाऊं, सड़क वाला रास्ता बहुत लंबा था उधर जाने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी_ क्योंकि मेरे पूरे जिस्म में दर्द हो रहा था..आखिर मैंने अपने दिल को मजबूत किया और उसी हवेली वाले रास्ते पर निकल पड़ा..

आज मेरे साथ जो हुआ उसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था… अभी थोड़ी दूर ही चला था कि मुझे दूर से एक लड़की रास्ते पर चलती नजर आई, उसने काले कपड़े पहन रखे थे, वो धीरे-धीरे रास्ते पर चलती जा रही थी..

मेरे दिल में ख्याल आया कि ये चुड़ैल होगी ; क्योंकि आज तक मैंने उस रास्ते पर कभी किसी लड़की को नहीं देखा.. चलते चलते वो लड़की हवेली की तरफ मुड़ गई, मैं साइकिल से आगे बढ़ा, मैंने देखा वो वह धीरे-धीरे हवेली के अंदर चली गई.. मैं बड़ा हैरान था कि आखिर इस हवेली में कौन रहता है..?

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मैं साइकिल चलाता हुआ घर की तरफ जा रहा था और इसी सोच में मगन था_ वो लड़की कौन थी_ वो हवेली में क्यों गई..?

रात जब मैं अपने बिस्तर पर सो रहा था तो मेरे सर के नीचे से तकिया बार बार खिसक रहा था_ मैं नींद में ही तकिये को खींचकर सर के नीचे करता लेकिन वो फिर खिसक जाता, अचानक मुझे किसी ने तेजी से पकड़कर हिलाया_” जीशान उठो मुझसे बात करो..” कानों में ये आवाज पड़ते ही मेरी आंख खुल गई फिर जो मैंने देखा तो मेरी चीखें निकल पड़ी..

मुझे दो लाल लाल आंखें हवा में तैरती हुई नजर आई.. मैं बहुत तेज चिल्लाया और बेड के नीचे गिर पड़ा.. मैं इतनी तेज चिल्लाया था कि सारे घर वाले उठकर मेरे कमरे में आ गए थे, सब पूछने लगे_ जीशान क्या हुआ..? मैं कमरे के कोने में सिमट कर बैठा हुआ था..

मम्मी ने मुझे गले लगाते हुए कहां कि मैं दो-तीन दिनों से अपने बच्चे को कुछ परेशान देख रही हूंँ_ मेरे बच्चे तुमको क्या हो गया है_ मैं तुम्हारी मांँ हूंँ_मुझे बताओ अभी कमरे में तुम्हारे साथ क्या हुआ था..? मुझे मालूम है कि तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो रहा है..

मैंने कहा : “कुछ नहीं मम्मा ! एक डरावना ख्वाब देखा था इसीलिए चिल्लाया था..” मैंने अपने घर वालों को कुछ नहीं बताया कि कहीं मेरे साथ उन पर कोई मुसीबत ना जाए, क्योंकि मैं समझ चुका था कि ये जिन्नातों का मामला है जो मुझे परेशान कर रहे हैं.. मैंने मम्मी से कहा कि आप मेरे साथ कमरे में लेट जाए मुझे डर लग रहा है.. मम्मी मेरे साथ कमरे में लेट गई, मम्मी मेरे बालों में हाथ फेर रही थी ; फिर मुझे कब नींद आ गई मुझे नहीं पता..

हॉरर स्टोरी सच्ची घटना

अगले दिन जब मैं स्कूल जाते हुए उस हवेली के पास पहुंचा तो मैंने हवेली के सामने साइकिल रोक दी और खड़े होकर दूर से हवेली को देखने लगा कि आखिर इस हवेली में क्या है? कोई तो ऐसी चीज इस हवेली में जरूर है जो मुझे परेशान कर रही है? मैंने उसका क्या बिगाड़ा है_?..

मैं खड़ा यही सोच रहा था कि अचानक मुझे हवेली के अंदर से एक लड़की बाहर आती नजर आई मैंने साइकिल तेजी से भगाई_ थोड़ी दूर जाकर पीछे मुड़कर देखा तो वो लड़की अभी भी चलते हुए मेरी तरफ आ रही थी.. मैं साइकिल भगाता हुआ स्कूल पहुंच गया.. ‌ मैं सोच में पड़ा था कि आखिर वो लड़की कौन थी_? कहीं वो चुड़ैल तो नहीं थी..?

जब स्कूल का लंच हुआ तो मैं अपना लंच का खाना लेकर ग्राउंड में जा बैठा, मैं उसी हवेली वाली लड़की के बारे में सोच रहा था_ उस वक्त मेरी आंखें फटी की फटी रह गई जब मैंने देखा कि सामने से वही हवेली वाली लड़की चलती हुई ग्राउंड की तरफ आ रही है, वो मुझसे थोड़ी ही दूर पर आकर बैठ गई, उसने हमारे ही स्कूल का यूनिफार्म पहन रखा था..

उसने ग्राउंड में बैठते हुए एक खाने का डिब्बा खोला और उसमें से कुछ खाने लगी ; मैं उठकर तेजी से उसके पास गया उसके सामने खड़े होकर फटी फटी नजरों से उसे देखने लगा..जिसको मैं चुड़ैल समझ रहा था वो एक बहुत खूबसूरत लड़की थी और हमारे स्कूल के गर्ल्स ब्रांच में पढ़ती थी.. उसने मेरी तरफ देखते हुए पूछा : ” क्या चाहिए..?

त..तुम जंगल की पुरानी हवेली में रहती हो..? मैंने हकलाते हुए उससे पूछा, उसने मुझे घूरकर देखा और कहा ; हांँ लेकिन क्यों..? मैंने कहा कुछ नहीं क्योंकि मैं रोजाना आपको उधर से आता हुआ देखता हूं.. उसने एक रुखे लहजे में “अच्छा” कहा और मुंह झुकाकर कर लंच खाने में बिजी हो गई, मैं उसके पास से वापस चला आया, क्योंकि मुझे महसूस हो गया था कि वो मुझसे ज्यादा बात नहीं करना चाहती है…

दोपहर जब मैं उसी जंगल के रास्ते से घर वापस जा रहा था तो मुझे दूर से वही लड़की रास्ते में बैठी नजर आई.. जब मैं पास पहुंचा तो देखा वो वोमिटिंग कर रही थी, मैंने जल्दी से बैग से बोतल निकाली और उसकी तरफ बढ़ा दी, उसने शुक्रिया कहते हुए बोतल लीऔर एक दो घूंट पानी पीकर मुझसे कहा कि आप मुझे हवेली तक छोड़ देंगे_ मेरी तबीयत ठीक नहीं है…

वो मेरा बैग पकड़कर साइकिल पर पीछे बैठ गई, मैं साइकिल चला तो रहा था लेकिन बहुत डर भी रहा था, धीरे-धीरे मैं हवेली के पास पहुंच गया उसने कहा बस यही रोक दो, वो उतरी और तेजी से हवेली की तरफ चल दी, मैं खड़ा उसे देख रहा था, वो बहुत खूबसूरत थी…

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अगले दिन मैं हवेली के पास साइकिल लेकर बहुत देर खड़ा रहा और उसका इंतजार करता रहा, लेकिन वो ना आई; मैं पूरा दिन उसका इंतजार करता रहा, उस दिन मैं स्कूल नहीं गया और दोपहर को वापस घर लौट आया.. मैं उसकी खूबसूरत आंखें भुला नहीं पा रहा था.. शायद मुझे उससे कुछ बहुत मुहब्बत हो गई थी..

अगले दिन सुबह मैं फिर से साइकिल लेकर हवेली पहुंच गया लेकिन आज भी बहुत ज्यादा इंतजार करने के बाद वो नहीं आई, मैंने सोचा की हवेली के अंदर जाकर देखूं_ लेकिन मुझे फिर से वही डरावना ख्वाब याद आ गया और मेरे चलते कदम रुक गए.. मैं मायूस होकर स्कूल की तरफ जाने लगा_ जब दोपहर की छुट्टी हुई और मैं घर वापस लौट रहा था तो अचानक मुझे वही लड़की रास्ते में वापस जाते हुए मिली..

उसे देखकर मैं साइकिल तेज कदमों से चलाने लगा और उसके पास पहुंचकर रफ्तार धीरे कर ली और थोड़ा सा आगे जाकर साइकिल रोककर खड़ा हो गया, ये इस बात का इशारा था कि वो मेरे साथ साइकिल पर बैठ सकती है ; वो पास आई और मेरा बैग पकड़ कर साइकिल पर पीछे बैठ गई..

मैं साइकिल चला रहा था, बहुत दूर तक हम लोग खामोश ही रहें, लेकिन थोड़ी देर के बाद उसने खामोशी तोड़ते हुए मुझसे पूछा : “तुम्हारा नाम जीशान है..” उसकी इस बात से मुझे एक झटका सा लगा_ मैंने कहा— हाँ— लेकिन तुमको कैसे पता…? उसने जवाब दिया ; “मैंने अभी आपकी नोटबुक खोल कर देखी है_ उसमें आपने बहुत कुछ लिख रखा है.. मैंने पीछे मुड़ कर देखा वह मुस्कुरा रही थी_ मेरी नोटबुक उसके हाथ में थी..

मैं पुरानी हवेली के पास पहुंच चुका था, वह उतरी और हवेली की तरफ जाने लगी_ मैंने उसे पुकार कर पूछा : तुम्हारा नाम क्या है..? उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया “अनीता”…

एक ही मुलाकात में मैं अनीता से बहुत मोहब्बत करने लगा था क्योंकि वह बहुत ज्यादा खूबसूरत थी मैं रात में लेटा उसी के बारे में सोचा करता था.. रोजाना हमारी आते जाते इसी तरह मुलाकात होती थी_ हम लोग ढेर सारी बातें करते थे..

एक दिन मुझे अनीता हवेली के अंदर ले गई, और सामने पड़ी एक पुरानी बेंच पर बिठाकर वो मेरी गोद में बैठ गई, मैंने उससे पूछा कि तुम इसी हवेली में रहती हो..? उसने कहा ; नहीं, इस हवेली के पीछे से एक रास्ता मेरे गांव को जाता है मैं वहांँ रहती हूंँ..

हम दोनों वहीं बैठे मोहब्बत भरी बातें कर रहे थे, बातों बातों में मैंने अनीता के गाल पर चूमते हुए पूछा कि हम अपनी इस पहली मोहब्बत को क्या नाम देंगे..? अनीता थोड़ी देर सोचती रही और फिर उसने जवाब दिया : जीशान ! हम लोग रोजाना इसी हवेली में मिलते हैं इसलिए हम अपनी इस मोहब्बत को इसी हवेली का नाम देंगे मतलब..

” हवेली की मोहब्बत..”

अनीता उठी और उसने दीवार पर एक धारदार चीज से लिख दिया ” हवेली की मोहब्बत..”, मेरी प्यारी अनीता मुझसे बहुत मोहब्बत करती थी_ मैं भी उसको दिलो जान से चाहता था…

एक दिन की बात है मैं घर में रात में लेटा उसी के बारे में सोच रहा था कि अचानक मेरे कमरे का दरवाजा खुला और वही डरावनी आत्मा जिसको मैंने पुरानी हवेली वाले ख्वाब में देखा था मेरे कमरे के अंदर आई, उसके मुंह और आंखों से खून बह रहा था… मैं डर के मारे सहम सा गया, उसने मेरे पास आते हुए कहा :” अनीता से दूर रहना वरना अनीता के साथ अच्छा नहीं होगा…” इतना कहकर वह वापस मुड़ी और दरवाजे के बाहर निकल गई, मैं बहुत डर गया था कि ये सब मेरे साथ क्या हो रहा है..

मैंने सोचा कल मैं अनीता को सब कुछ बता दूंगा.. जब सुबह हुई तो मैं साइकिल लेकर जल्दी से हवेली के सामने पहुंच गया और अनीता का इंतजार करने लगा, बहुत देर गुजर गई अनीता नहीं आई_ मैं खड़ा वही इंतजार कर रहा था_ सुबह से दोपहर हो गई, मैं मायूस होकर के घर की तरफ जाने लगा तभी मुझे अपने पीछे से एक आवाज सुनाई दी..”जीशान.. जीशान..!

मै ये आवाज पहचानता था, ये मेरी प्यारी अनीता की आवाज थी ; मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो अनीता तेजी से हवेली की तरफ से दौड़ती हुई आ रही थी.. मेरे पास पहुंचकर उसने कहा कि आज मुझे बहुत देर हो गई_ गुस्सा मत होना.. मैंने कहा : तुमको पता भी है मैं सुबह से यहां तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.. उसने कहा मेरे पिताजी की तबीयत बहुत खराब थी इसलिए मैं नहीं आ सकी_ प्लीज गुस्सा थूक दो_ अब तुम्हारी अनीता आ चुकी है_ एक बार मेरे लिए मुस्कुरा दो प्लीज़ मेरी जान..! मैंने मुस्कुराते हुए उसके गाल पर चूमा और उसको गले से लगाकर छलकते आंसुओं से कहने लगा : “अनीता ! मैं तुमको कुछ बताना चाहता हूं मैं बहुत परेशान हूं…

उस दिन मुझे अनीता का बर्ताव कुछ बदला बदला सा लग रहा था_ वो मुझे लेकर हवेली की तरफ चल दी और हम लोग उसी पुरानी बेंच पर बैठ गए, मैं उसे बताने लगा…”अनीता ! रात में मेरे कमरे में एक डरावनी आत्मा आई थी मैंने कुछ दिन पहले इसी हवेली का ख्वाब देखा था वह डरावनी आत्मा मुझे इसी हवेली में नजर आई थी..

अनीता उस दिन मुझसे चेहरा नहीं मिला रही थी बल्कि उसने अपना चेहरा दीवार की तरफ कर रखा था, मैं देख रहा था कि जैसे जैसे मैं अनीता को ये बातें बता रहा था उसके चेहरे की रंगत बदलती जा रही थी, लेकिन मैं बोलता रहा..

अचानक अनीता ने मेरी बात काटते हुए कहा : अरे छोड़ो ये सब बातें_ अब तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं होगा.. मैं बड़ा हैरान था कि आज ये अनीता कैसी बातें कर रही है, मैं अपनी अनीता को अच्छी तरह जानता था वो ऐसी नहीं थी.. अनीता बोले जा रही थी और मैं उसके पीछे बैठा सब सुन रहा था, उसका चेहरा अभी भी दीवार ही की तरफ था..

मुझे पास के कमरे से अजीब अजीब आवाजें आ रही थी, मैं उठा और चुपके से उस कमरे की तरफ चल दिया, अनीता को इसकी कोई भनक नहीं थी वो अपनी बातों में मगन थी, कमरे के अंदर जाकर जो मैंने देखा तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए.. अनीता की लाश एक रस्सी से बंधी छत से लटक रही थी और ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने उसको अभी-अभी मारा है..

अनीता की ये हालत देखकर मेरी आंखों से आंसू बहने लगे लेकिन मैं हैरान था कि अगर ये अनीता है तो फिर वो लड़की कौन है जो बाहर बेंच पर बैठी है…? मैं जब कमरे से बाहर निकला तो अनीता सामने बेंच पर बैठी थी..

मैं उसके सामने जाकर खड़ा हो गया और गुस्से में उससे पूछा : ” तुम कौन हो..? मेरी अनीता को तुमने क्यों मार दिया..? ” अचानक वो बहुत जोर जोर से हंसने लगी और उसका चेहरा एक डरावनी शक्ल में बदलने लगा ; ये वही आत्मा थी जो मुझे ख्वाबों में नजर आती थी…

उसने भयानक आवाज में दहाड़ते हुए कहा : “मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करती हूंँ_ ये अनीता मेरी और तुम्हारी मोहब्बत के बीच में आ गई थी तो मैंने इसे तुम्हारा रूप धारण करके मार दिया_ मैं ही तुम्हारे ख्वाबों में आती हूं लेकिन तुम हमेशा मुझे देख कर डर जाते हो_ मैंने ही तुमको वो गुलाब का फूल और लेटर दिया था_ उस रात मैं ही तुम्हारे पास आई थी जब तुमने दो लाल लाल आंखें देखी थी_ मैं तुमसे बात करना चाहती हूंँ लेकिन तुम हर बार मुझसे डर जाते हो.. मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करती हूं आओ मेरे पास आओ…

मैं जमीन पर घुटने टेक कर बैठ गया और जोर जोर से रोने लगा.. क्यों मारा तुमने मेरी अनीता को..? उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था..? मैं जोर जोर से जमीन पर हाथ मारने लगा, जमीन पर पड़े कांच के टुकड़ो से मेरे हाथों से खून बहने लगा, उस जिन्नात औरत ने मेरी तरफ बढ़ते हुए कहा : जीशान ! तुम्हे चोट लगी है… मैंने कहा ; वही रुक जाओ आगे आने की जरूरत नहीं है… मैं ये कहते हुए उठा और हवेली से बाहर जाने लगा और मैं उससे कह रहा था कि मैं अपनी अनीता का बदला तुमसे जरूर लूंगा मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा…

मैं एक मौलवी साहब से मिला और उनसे पूछा कि किसी जिन्नात को मारना हो तो क्या करना पड़ता है…? उन्होंने मुझे एक तरीका बताया और कहा कि बेटा ! ये बहुत ज्यादा खतरे वाला काम है.. मैंने कहा : “कोई नहीं, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया.. मैं पूरी रात बैठकर वह चीजें सीखता रहा और सुबह हवेली पहुंच गया..

उसी पुरानी बेंच पर वही जिन्नात औरत अनीता की शक्ल में बैठी थी, मुझे देखकर कहने लगी : जीशान ! मुझे पता था कि तुम जरूर आओगे… मैंने वो चीजें पढ़ना शुरू कर दी और वो जिन्नात औरत तड़पने लगी, वो चीख चीखकर मुझसे कह रही थी कि मुझे छोड़ दो मुझे मत मारो.. मैं पढ़ता गया थोड़ी देर के बाद वो पूरी तरह जलकर खत्म हो गई, उसकी बदबू पूरी हवेली में फैल रही थी..

मैं उस कमरे की तरफ गया जिसमें उस चुड़ैल ने मेरी प्यारी अनीता को तड़पा तड़पा कर मार डाला था.. मैं उसकी लाश से लिपट कर रो रहा था, मुझे उसका साइकिल पर पीछे बैठना और हंस हंसकर मुझसे मजाक करना याद आ रहा था, मेरी अनीता मुझे छोड़ कर जा चुकी थी..

मैं उठकर बाहर आया तो मुझे बाहर दीवार पर अनीता के हाथों से लिखी तहरीर नजर आई….. ” हवेली की मोहब्बत..” जिसे मेरी अनीता ने बड़े प्यार से लिखा था_ मैं उसे देखकर बहुत जोर जोर रोने लगा और वहीं पर बेहोश होकर के गिर पड़ा…

जब मुझे होश आया तो मैंने खुद को अस्पताल में पाया, मेरे मम्मी पापा और बहन मेरे आस-पास खड़े थे..

…जीशान अपनी कहानी सुना रहा था और मैं उसके पास बैठा गौर से उसकी बातें सुन रहा था, थोड़ी देर के बाद जीशान ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और कहा : संदीप भाई ! मैं तुमको एक राज की बात बताऊं..? मैंने कहा ; हाँ बताओ.. उसने कहा : आज सुबह मुझे मेरी प्यारी अनीता नजर आई थी_ वो मुझसे कह रही थी कि जीशान मुझे यहांँ तुम्हारे बगैर बिल्कुल अच्छा नहीं लगता_ तुम मेरे पास आ जाओ_ मैंने उससे कहा था_” मेरी प्यारी अनीता मैं आज ही तुम्हारे पास आ जाऊंगा…”

मैंने जीशान की इस आखिरी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, और उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा : दोस्त ! तुम परेशान ना हो_ सब ठीक हो जाएगा…

मैंने उससे कहा : यार ! मुझे थोड़ा कुछ जरूरी काम से जाना है मैं जल्द ही वो काम पूरा करके वापस आ रहा हूंँ… इतना कहकर मैं वापस चला आया, शाम को मुझे जीशान की बहन का फोन आया वह बहुत तेज तेज रो रही थी और कह रही थी : संदीप भाई ! जीशान हम सब को छोड़ कर चले गए…

मैं जल्दी से अस्पताल पहुंचा तो देखा जीशान मर चुका था, उसके सीने पर वही दो कंगन रखे हुए थे जिनको दिखा कर उसने मुझसे कहा था कि ” ये मेरी प्यारी अनीता के कंगन हैं..



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