चार लोगों कि रमज़ान में भी मग़फिरत नहीं होती | Ramzan ki fazeelat

4.5/5 - (8 votes)

चार लोगों कि रमज़ान में भी मग़फिरत नहीं होती | Ramzan ki fazeelat :-

Ramzan ki fazeelat

   दोस्तों ! रमज़ान की बहुत सी फजीलतें हदीस की किताबों में मिलती हैं यहां तक कि एक हदीस में आता है कि रमज़ान के महीने में हर मुसलमान की मग़फिरत कर दी जाती है लेकिन चार लोग ऐसे हैं कि जिनकी रमजान में भी मग़फिरत नहीं होती…

1. एक वो शख्स जो शराब पीता हो_

2. दूसरा वो शख्स जो अपने मां बाप की नाफरमानी करता हो_

3. तीसरा वो शख्स जो रिश्तेदारी को तोड़ता हो_

4. चौथा वो शख्स जो अपने दिल में किसी के लिए नफरत रखता हो..

इसी हदीस का एक और हिस्सा नीचे लिखा जाता है_ उसे ज़रूर पढ़ें…

 ” अल्लाह ताला रमज़ान के महीने में हर रोज इफ्तार के वक्त ऐसे हजा़रों इंसानों को जहन्नुम से नजात देते हैं जो जहन्नुम में जाने के मुस्तहिक़ हो चुके होते हैं और जब रमज़ान का आखिरी दिन आता है तो पहले रमज़ान से आखिरी रमज़ान तक जितने भी लोग पूरे महीने में जहन्नुम से आजाद किए गए थें उन सब के बराबर रमजान के आखिरी दिन इतने लोगों को जहन्नुम से आजाद किया जाता है…

शबे- कद्र की रात में तो अल्लाह तआला हज़रत जिब्रील (अ.) से फरमाते हैं कि ऐ जिब्रील ! तुम जमीन पर उतरो_ तो हज़रत जिब्रील (अ.)फरिश्तों के एक बड़े लश्कर के साथ ज़मीन पर उतरते हैं, उनके हाथ में एक हरे रंग का झंडा होता है जिसको वो काबा शरीफ के ऊपर लाकर खड़ा कर देते हैं…

हज़रत जिब्रील (अ.) के सौ बाज़ू हैं, उन तमाम में से सिर्फ दो बाज़ू को वो शबे क़द्र की रात में खोलते हैं और वो दोनों बाज़ू इतने बड़े हैं कि पूरे आसमान को छाप लेते हैं फिर हज़रत जिब्रील (अ.) तमाम फरिश्तों से फरमाते हैं कि ” ऐ फरिश्तों ! आज की रात जो भी मुसलमान खड़ा या बैठा अल्लाह की इबादत कर रहा हो, नमाज़ें पढ़ रहा हो या अल्लाह का ज़िक्र कर रहा हो तुम लोग जाकर उसे सलाम करो और उससे मुसाफा करो और वो जो दुआएं मांगे उस पर आमीन कहो..

 सुबह तक यही हालत रहती है और जब सुबह हो जाती है तो हज़रत जिब्रील (अ.) फरिश्तों को आवाज़ देते हैं कि ऐ फरिश्तों ! अब वापस चलो_ फरिश्तें हज़रत जिब्रील(अ.) से पूछते हैं कि अल्लाह ताला ने हुज़ूर (स.अ.) की उम्मत के साथ क्या मामला फरमाया है ? तो हज़रत जिब्रील(अ.) इरशाद फरमाते हैं कि अल्लाह ताला ने उन तमाम मोमिनो के गुनाहों को माफ फरमा दिया है जिन्होंने इस महीने में रोज़े रखे और तरावीह की नमाज पढ़ी, लेकिन चार लोग ऐसे हैं कि उनके गुनाहों को माफ नहीं किया गया है…

ये सुनकर सहाबा इकराम ने हुज़ूर (स.अ.) से पूछा कि ऐ अल्लाह के नबी ! वो चार लोग कौन हैं कि जिनकी रमज़ान में भी मग़फिरत नहीं होती है_ ? हुज़ूर (स.अ.) ने फरमाया कि….

1. एक वो शख्स जो शराब पीता हो_

2. दूसरा वो शख्स जो अपने मां बाप की नाफरमानी करता हो_

3. तीसरा वो शख्स जो रिश्तेदारी को तोड़ता हो_

4. चौथा वो शख्स जो अपने दिल में किसी के लिए नफरत रखता हो..

  और फिर जब ईद की रात होती है तो उस रात का नाम आसमानों पर ” लैलतुल जाइजा़ ” ( यानी इनाम की रात ) रखा जाता है और ईद की सुबह अल्लाह ताला तमाम फरिश्तों को ज़मीन पर भेजते हैं.. वो फरिश्ते ज़मीन पर उतरकर शहरों की हर गलियों में और तमाम रास्तों पर आकर खड़े हो जाते हैं और एक ऐसी आवाज़ में ( जिसे जिन्नात और इंसान के अलावा हर मखलूक सुनती है) पुकारकर कहते हैं कि ” ऐ मोहम्मद (स.अ.)की उम्मत ! उस करीम रब की बारगाह की तरफ चलो जो बहुत ज़्यादा नवाज़ने वाला है और बड़े से बड़े गुनाह को माफ फरमा देता है…

 उसके बाद जब लोग ईदगाह की तरफ निकलते हैं तो अल्लाह ताला फरिश्तों से पूछते हैं कि ऐ फरिश्तों ! ज़रा बताओ कि उस इंसान का क्या बदला है जो अपने पूरे दिन की मज़दूरी पूरी कर चुका हो..? 

फरिश्ते जवाब देते हैं कि ऐ हमारे मालिक ! उस इंसान का बदला यही है शाम को उसकी पूरी की पूरी मज़दूरी उसे दे दी जाए, तो अल्लाह ताला फरमाते हैं कि ऐ मेरे फरिश्तों ! आज मैं तुम्हें गवाह बनाता हूं कि मैंने उन तमाम मोमिनो की रमज़ान के रोजे रखने की वजह से और तरावीह की नमाज़ पढ़ने की वजह से मग़फिरत फरमा दी है..

और फिर अल्लाह ताला अपने बंदों से फरमाते हैं कि ” ऐ मेरे बंदों ! तुम मुझसे दुआएं मांगा करो , मेरी इज्ज़त की कसम ! मेरे जलाल की कसम ! आज ईद के दिन तुम मुझसे अपनी आखिरत के बारे में जो भी सवाल करोगे मैं उसे पूरा कर दूंगा और दुनिया के बारे में जो भी मांगोगे उसमें में मैं जो चीज़ तुम्हारे लिए मुनासिब समझूंगा वो तुम्हें अता कर दूंगा_ मेरी इज्जत की कसम ! ऐ मेरे बंदों ! जब तक तुम मुझे याद रखोगे तो मैं तुम्हारे गुनाहों पर पर्दा डालता रहूंगा और उन्हें लोगों से छुपाता रहूंगा_ मेरी इज्ज़त की कसम ! मेरे जलाल की कसम ! ऐ मेरे मोमिन बंदों ! मैं कल कयामत के दिन तुम्हें काफिरों के सामने ज़लील व रुसवा नहीं करूंगा_ बस अब तुम सारे लोग अपने गुनाहों से पाक होकर अपने घरों को लौट जाओ, तुमने रमज़ान के रोज़े रखकर मुझे राज़ी कर लिया और मैं तुमसे राज़ी हो गया…

इसके बाद फरिश्ते हज़ूर (स.अ.) की उम्मत का सवाब देखकर जो उन्हें ईद के दिन मिलता है खुशियां मनाते हैं…


प्यारे दोस्तों ! अगर आपको मेरी ये post पसंद आई हो और आपको मेरी इस post से कुछ सीखने को मिला हो तो एक प्यारा सा कमेंट करके नीचे दिए गए Share बटन को दबाकर मेहरबानी करके इस post को ज़्यादा से ज़्यादा share करें_ शुक्रिया


Read more :

1 thought on “चार लोगों कि रमज़ान में भी मग़फिरत नहीं होती | Ramzan ki fazeelat”

Leave a Comment