छोटा बच्चा और जिन्न लड़की का इश्क😱 | Real horror story

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Real horror story

  सालिम एक 20 साल का नौजवान लड़का है उसके मां-बाप की बचपन ही में मौत हो गई थी, सिर्फ एक दादाजी ही थें लेकिन उनकी उम्र भी अब 70 साल हो चुकी थी और वो चारपाई पर लेटे रहते थें, उनके दादाजी अपने जमाने के बहुत बड़े जादूगर गुजरें थें उनके पास 40 से ज्यादा जिन्नात और आत्माएं कैद रहती थीं…

एक रात सालिम अपने कमरे में लेटा हुआ था तभी अचानक उसे डर सा महसूस होने लगा_ उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके पास खड़ा उसे देख रहा है, उसने डरकर आंखें खोल दी_ हर तरफ सन्नाटा था, दादा जी अपने कमरे में सोए हुए थें, वो उठकर कमरे से बाहर गया किचन में जाकर पानी पिया और फिर अपने कमरे की तरफ वापस आने लगा..

लेकिन तभी उसकी नजर कमरे की दीवारों पर पड़ी_ वहांँ किसी औरत का साया सर के बल दीवारों पर चल रहा था, वो बहुत डरावना मंजर था_ ये देखकर सालिम के तो होश उड़ गएं, उसने आज से पहले कभी ऐसा डरावना मंजर नहीं देखा था डर के मारे उसके माथे से पसीना बहने लगा_ तभी उसकी नजर अपने बेड पर पड़ी जिस पर एक खूबसूरत लड़की दुल्हन का जोड़ा पहने बैठी हुई थी…

वो लड़की हाथों के इशारे से सालिम को अपने पास बुला रही थी और कुछ कहना चाह रही थी.. सालिम ने डरते हुए दूर ही से उससे पूछा : ” तुम कौन हो और मेरे कमरे में कैसे आ गई…? उस लड़की ने कोई जवाब ना दिया, जब सालिम ने दुबारा उससे सवाल किया तो वो लड़की जोर जोर से हंसने लगी_ उसका चेहरा किसी डरावनी शक्ल में बदलने लगा, उसका जिस्म ऐसा लग रहा था कि आग से जला दिया गया हो…

वो हंसती हुई सालिम के पास आकर खड़ी हो गई, डर के मारे सालिम का बुरा हाल हो रहा था_ उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वो उसे देखकर बेहोश हो जाएगा तभी उस चुड़ैल ने कहना शुरू किया : सालिम ! मैं 20 सालों से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं कि तुम बड़े हो जाओ फिर मैं तुमसे शादी करके अपनी जिंदगी बसा लूंगी_ मैं एक जिन्नात लड़की हूंँ जो आज से 20 साल पहले तुम्हारे दादा के पास कैद थी…

” सालिम ! बचपन में मैं ही तुम्हें झूला झुलाया करती थी तुम रोते थे तो मैं ही तुम्हे बहलाया करती थी_ शाम को तुम्हारे साथ मैं ही खेला करती थी_ तुम मुझे इंसान समझते थे लेकिन मैं इंसान नहीं थी बल्कि एक जिन्नात लड़की थी_ तुम्हारे दादा जी ने मुझे इस शर्त पर आजाद करने को कहा था कि मैं तुम्हारा तीन सालों तक हर तरह से ख्याल रखूं.. मैंने ये शर्त कबूल कर ली…

बचपन में मैं तुम्हारे साथ खेला करती थी और बहुत खुश रहती थी_ फिर पता नहीं कब मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई और मैं तुम्हारे बड़ा होने का इंतजार करने लगी, तीन साल के बाद मैं तो आजाद हो गई लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर नहीं गई थी_ आज तुम 20 साल के खूबसूरत नौजवान लड़के हो मैंने इस घड़ी का सदियों से इंतजार किया था कि जल्दी से तुम जवान हो जाओ और फिर मैं तुम्हें हासिल करके अपनी मुहब्बत में कामयाब हो जाऊं….

ये सुनकर सालिम के पैरों तले से जैसे जमीन निकल गई हो_ क्योंकि वो तो शहनूर से बहुत ज्यादा मोहब्बत करता था और कुछ दिनों में उससे शादी भी करने वाला था…

उस चुड़ैल ने कहा : सालिम ! मुझे मालूम है कि तुम शहनूर से बहुत मोहब्बत करते हो_ तुम उसे छोड़ दो वरना शहनूर के साथ अच्छा नहीं होगा.. सालिम ने कहा : मैं शहनूर को किसी कीमत पर भी नहीं छोड़ सकता वो मेरी जिंदगी है…

चुड़ैल ने जवाब दिया : अगर तुमने मेरी बात ना मानी तो बहुत पछताओगे_ मैं कोई इंसान नहीं हूंँ जो हार मान जाऊं, मैं तुम्हें तो कुछ नहीं करूंगी क्योंकि तुम मेरा प्यार हो लेकिन शहनूर को जान से मार डालूंगी.. सालिम ने कहा : तुम्हें जो भी दुश्मनी करनी हो हो मुझसे करो लेकिन मेरी शहनूर को कुछ मत करना…

वो चुड़ैल एक गरजदार आवाज में चिल्लाई और कहने लगी : सालिम ! अगर समझ जाओगे तो अच्छा होगा वरना मैं तुम्हारी शहनूर की ज़िंदगी बर्बाद कर दूंगी… इतना कहकर वो चुड़ैल गायब हो गई…

उसके जाने के बाद सालिम जल्दी से अपने दादाजी के कमरे में गया और उनको सारी बातें बता दीं, दादाजी भी ये सब सुनकर परेशान हो गए और कहने लगें : बेटा ! अब तो मेरे पास वो जादुई ताकतें भी नहीं बची हैं कि मैं उस चुड़ैल को सबक सिखा सकूं…

दादाजी ने कहा : बेटा ! मुझे इस मुसीबत का सिर्फ एक ही रास्ता नजर आता है वो ये कि जल्द से जल्द तुम शहनूर से शादी कर लो, अगर तुमने उससे शादी कर ली तो शायद वो चुड़ैल फिर मायूस होकर तुम्हारा पीछा छोड़ दे_ मैं आज ही शहनूर के बाप से बात करता हूंँ और जल्द से जल्द तुम दोनों की शादी का इंतजाम कराता हूंँ_ बेटा ! तुम परेशान ना हो मैं अपने जीते जी तुम पर कोई मुसीबत ना आने दूंगा… दादाजी की बातें सुनकर सालिम को बहुत सुकून मिला…

अगले दिन जब दादाजी ने शहनूर के बाप से बात की तो उन्होंने भी कह दिया कि भाई जान ! ये आपकी बेटी है आप जब चाहे इसे ब्याह कर ले जाएं_ आपके घर में हमारी बच्ची की शादी हो जाना हमारे लिए बड़ी इज्जत की बात है…

दादाजी ने सालिम को अपने कमरे में बुलाया और कहा कि बेटा ! शहनूर के बाप ने ” हांँ ” कर दी है हम लोग कल उनके घर जाकर मंगनी की अंगूठी लड़की को पहना आएंगे और फिर इसी महीने में तुम्हारी शहनूर से शादी कर दी जाएगी…

शाम को जब सालिम ऑफिस से घर आया और अपने कमरे में गया तो देखा वही चुड़ैल उसके बिस्तर पर बैठी है, वो आज बहुत भयानक शक्ल में आई थी_ सालिम उसे देखकर कांपने लगा.. वो गुर्राती हुई सालिम के पास आई और कहने लगी : मैंने मना किया था कि तुम शहनूर से दूर रहना लेकिन आज फिर से तुम उससे मिलने गए थें_ तुम उसे छोड़ दो वरना शहनूर के साथ अच्छा नहीं होगा…

सालिम ने उस चुड़ैल के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा : प्लीज ! मुझे माफ कर दो_ तुम एक चुड़ैल हो और मैं एक इंसान हूंँ हमारा- तुम्हारा रिश्ता कैसे हो सकता है_ और शहनूर मेरी मंगेतर है मैं उससे बहुत प्यार करता हूंँ और कल मैं उससे मंगनी करने भी जा रहा हूंँ और इसी महीने में हम दोनों शादी भी कर देंगे….

ये सुनकर वो चुड़ैल बौखला गई और गुस्से में खड़े होकर कहने लगी : कुछ भी हो जाए मैं शहनूर को तुम्हारी पत्नी नहीं बनने दूंगी_ तुम सिर्फ मेरे हो_ मेरे अलावा किसी का तुम पर कोई अधिकार नहीं_ अगर तुम शहनूर को अंगूठी पहनाने गए तो मैं शहनूर को जान से मार डालूंगी…

इतना कहकर उस चुड़ैल ने कमरे का सामान इधर-उधर फेंकना शुरू कर दिया_ यहांँ तक कि उसने कमरे में रखी टेबल सालिम पर बहुत जोर से फेंककर मारी, सालिम दीवार से जाकर टकराया और बेहोश होकर गिर पड़ा…

जब उसे होश आया तो दिन के 10:00 बज रहे थें, दादा जी उसके पास ही खड़े थें, चाचा- चाची भी आ गए थें_ सालिम की ये हालत देखकर सब बहुत परेशान थे कि आज तो हमें उसकी मंगनी के लिए जाना था और ये उसकी इतनी बुरी हालत किसने बना दी है..? दादाजी सबकुछ समझ गए थें उन्होंने सालिम से कहा : बेटा ! कुछ भी हो अब देर मत करो आज ही मंगनी के साथ हम शहनूर से तुम्हारी शादी भी करा देंगे, आज शाम को शहनूर इस घर में बहू बनकर आएगी_ अब जल्दी से उठकर तैयार हो जाओ…

सालिम उठकर अपने कमरे में चला गया और अलमारी से नए कपड़े निकाल कर पहनने लगा, तभी उसे अपने पीछे किसी की आहट महसूस हुई, उसने पीछे मुड़कर देखा तो वही चुड़ैल उसके सामने खड़ी थी_ गुस्से की वजह से उसकी आंखों से आग निकल रही थी_ वो कह रही थी कि सालिम ! मेरे मना करने के बावजूद तुम शहनूर से मंगनी करने जा रहे हो_ अब देखना मैं शहनूर की क्या हालत करती हूंँ.. इतना कहकर वो चुड़ैल धुआ बनकर कमरे से उड़ गई…

⭐⭐⭐

इधर शहनूर अपने घर के ड्रेसिंग रूम में बैठी तैयार हो रही थी_ उसकी बहनें भी तैयार होने में उसकी मदद कर रही थीं_ कि तभी अचानक शहनूर की नाक से खून बहने लगा और वह बिल्लियों की तरह गुर्राते हुए खड़ी हो गई और चिल्ला चिल्ला कर कहने लगी : मुझे ये शादी नहीं करनी है सालिम किसी और लड़की से मोहब्बत करता है मुझे ये शादी नहीं करनी…

सारे घरवाले शहनूर को देखकर हैरान थें कि उसे क्या हो गया है_? उसकी मांँ उसके पास आई और कहने लगी : बेटी ! ये तुम क्या कह रही हो सालिम बहुत अच्छा लड़का है वो तो तुमसे बहुत प्यार करता है… लेकिन अगले ही पल शहनूर ने अपनी मां की गर्दन पकड़ ली और उसे उछाल कर दूर फेंक दिया..

वो चुड़ैल आत्मा शहनूर के अंदर समा चुकी थी और उससे यह सब गलत काम करवा रही थी_ शहनूर ने अपने कपड़े भी फाड़ना शुरू कर दिए थें, जो भी उसे रोकने की कोशिश करता वो उसे उठाकर दूर फेंक देती.. तभी वहांँ सालिम भी अपने दादाजी के साथ पहुंच गया…

शहनूर ने जब सालिम को आता देखा तो तेज आवाज में हंसते हुए कहा : मैंने तुझसे कहा था कि इस लड़की से शादी मत करना वरना मैं इसे जान से मार डालूंगी_ अब देख मैं कैसे इसे सीढ़ियों से गिरा कर मरती हूंँ, इतना कहकर शहनूर सीढ़ियों पर चढ़ने लगी…

दादाजी ने सालिम से कहा : बेटा ! मेरी बात बहुत गौर से सुनो_ अगर तुम अपनी शहनूर को बचाना चाहते हो तो तुम्हें ये काम करना होगा.. सालिम ने चीखती हुई आवाज़ में कहा : दादा जी ! मैं अपनी शहनूर के लिए अपनी जान भी देने के लिए तैयार हूंँ_ आप सिर्फ तरीका बताएं कि मैं इस चुड़ैल को कैसे मार सकता हूंँ..?

दादाजी ने बताया : बेटा ! आज से 15 साल पहले मैंने तुम्हारे खून पर एक ऐसा जादू कर दिया था कि कोई चुड़ैल- आत्मा तुम्हारे अंदर समा नहीं सकती है_ इसलिए किसी धारदार चीज से अपने हाथों को काटो और उससे गिरने वाले खून की पहली बूंद शहनूर पर फेंक दों_ इस तरह वो चुड़ैल तुम्हारी शहनूर को छोड़ देगी और फिर कभी वापस नहीं आएगी…

इधर वो चुड़ैल शहनूर को लेकर तीसरी मंजिल की छत पर पहुंचने ही वाली थी कि सालिम ने घर के दूसरे रास्ते से छत की तरफ दौड़ लगा दी_ उस चुड़ैल की नजर सालिम पर नहीं थी.. वो चुड़ैल छत पर पहुंच चुकी थी और बहुत जोर जोर से हंसकर कह रही थी कि देखो सालिम ! कैसे मैं तुम्हारी शहनूर को छत से नीचे गिराकर मारती हूंँ..”

वो शहनूर को नीचे फेंकने ही वाली थी कि तभी पीछे से सालिम भी छत पर पहुंच गया और जल्दी से एक चाकू से अपना हाथ काटते हुए उसका खून शहनूर के चेहरे पर फेंक दिया.. शहनूर के चेहरे पर खून की बूंद पड़ते ही वो बहुत जोर जोर से चीखने लगी और फिर बेहोश होकर गिर पड़ी.. सालिम ने शहनूर को गोद में उठा रखा था…

सारे लोग छत पर पहुंच चुके थें, दादाजी ने पीछे से सालिम के सर पर हाथ फेरते हुए कहा : बेटा ! तुम अपनी मोहब्बत में कामयाब हो चुके हो_ तुम्हारी शहनूर बिल्कुल ठीक है और वो चुड़ैल हमेशा हमेशा के लिए तुम्हें छोड़कर जा चुकी है….

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