जादूगर बाबा और मासूम लड़की😱 | Horror Story in Hindi

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…शहनूर की नजर उस दुकान पर लगे बोर्ड पर पड़ी जिस पर लिखा हुआ था ” जादूगर बंगाली बाबा – सास बहू के झगड़े और घरेलू परेशानियों का हल गारंटी के साथ “..

शहनूर चलते हुए दुकान के अंदर दाखिल हो गई, उसने नकाब पहन रखी थी, दुकान के दरवाजे पर एक आदमी बैठा टोकन दे रहा था, वो हर टोकन के 500 रुपए लेता था, शहनूर ने उससे टोकन लिया और अंदर चली गई..

अंदर पहले ही से बहुत सी औरतें बैठी हुई थी जो अपनी अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं, शहनूर भी बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने लगी.. जब उसकी बारी आई तो वो अंदर गई, उसने देखा कमरे में बिल्कुल अंधेरा था, एक छोटा सा बल्ब जल रहा था, उस बंगाली बाबा का चेहरा अंधेरे में बहुत डरावना लग रहा था..

बंगाली बाबा ने शहनूर से बैठने को कहा, वो बैठ गई और अपनी परेशानियां सुनाने लगी कि ” बाबा मेरे पति मेरा ख्याल नहीं रखतेहमेशा अपनी अम्मा की मानते हैं सारी कमाई उन्हीं को देते हैं मुझे एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिलती”..

उस बाबा ने कहा : ” बेटा ! परेशान ना हो_ मैं तुमको एक वजीफा बताऊंगा _तुमको रोजाना वह करना है थोड़ा सा मुश्किल तो जरूर है लेकिन तुम्हारी परेशानी हल हो जाएगी.. शाहनूर ने कहा : “मुझे इसके लिए जो कुछ भी करना पड़े मैं वो करने के लिए तैयार हूंँ..” बाबा ने उसको एक जोकर के पुतले में कुछ सुईयां चुभोकर दी और उससे कहा कि रात 12:00 बजे कब्रिस्तान जाकर किसी कबर पर इसको दबा देना, यह काम तुमको आज ही रात करना है, उसके बाद तुम्हारी मुश्किल आसान हो जाएगी…

शहनूर नहीं जानती थी कि उसके साथ आज रात क्या होने वाला है..? वह जोकर का पुतला लेकर अपने घर वापस आ गई और रात का इंतजार करने लगी.. उसके पति असलम की उन दिनों नाइट ड्यूटी लगी हुई थी इसलिए जब रात के दस बजें तो घर में सब सो चुके थे.. हर तरफ सन्नाटा था, शाहनूर उठी और एक काली चादर पहनकर चुपके से घर से निकल गई..

दो – तीन गलियां पार करने के बाद एक बड़ा सा मैदान था उसी के पीछे कब्रिस्तान बना हुआ था, शहनूर कब्रिस्तान पहुंच गई और एक ताजा कबर के पास बैठ कर किसी चीज से कबर को खोदने लगी, अचानक उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा है.. उसने पीछे मुड़कर देखा तो वो कब्रिस्तान की रखवाली करने वाला “गोरकुन” था, उसने शहनूर का हाथ पकड़कर घसीटना शुरू कर दिया..

शहनूर ने हाथ छुड़ाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो छुड़ा ना सकी.. “गोरकुन” उसे तेजी से घसीटता हुआ कब्रिस्तान के पीछे बने एक कमरे में ले गया और उसे अंदर करके बाहर से ताला लगा दिया.. शहनूर अपने किए पर बहुत पछता रही थी..

एक घंटे के बाद उसे कदमों की चाप सुनाई दी और ताले में चाबी घूमने की आवाज आई, शहनूर डर के मारे कमरे में सिमटकर बैठ गई, उस कमरे में एक चारपाई के अलावा और कुछ नहीं था.. उस वक्त शहनूर की चीखें निकल पड़ी जब उसने देखा कि उस गोरकुन के साथ वही बंगाली बाबा कमरे में आया है…

शहनूर ने सोचा कि ये बंगाली बाबा उसे बचा लेगा.. वो दौड़कर बाबा के पैरों में गिर पड़ी और कहने लगी कि ” बाबा मैं आप ही का वजीफा करने कब्रिस्तान आई थी इस आदमी ने मुझे पकड़ कर यहाँ कमरे में बंद कर दिया है, आप मुझे बचा लो..

उस बाबा के चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट थी.. उसने शहनूर की मासूमियत का फायदा उठाकर उसके साथ एक साजिश रची थी ताकि उसके जिस्म का फायदा उठा सकें.. उसके बाद वहीं कुछ हुआ जिसकी शहनूर को कभी उम्मीद भी नहीं थी, वो बेचारी तो इस बाबा के पास अपनी मुश्किलें हल कराने आई थी लेकिन….

शहनूर चीख रही थी.. लेकिन यहां कब्रिस्तान में उसकी सुनने वाला कोई नहीं था, बाबा ने उसके सारे कपड़े फाड़ दिए थे और उसके जिस्म के साथ जानवरों की तरह खेल रहा था…

सुबह 5 बजे कमाल चाचा फज्र की अजान देने जा रहे थे उन्हें रास्ते में कूड़े के ढेर के पास एक लड़की पड़ी मिली, वो बेहोश थी ; चाचा ने फौरन अपने बेटे को फोन किया और दोनों बाप बेटे उसे अपने घर ले गए.. चाचा ने अपनी बीवी को सारी बातें बताई, जब शहनूर को होश आया तो वह बहुत ज्यादा सदमे में थी और अपना सब कुछ गंवा बैठी थी, उसने चाचा को रात में खुद पर गुजरी सारी बातें बता दीं..

सारी बातें सुनने के बाद चाचा उसके बताए हुए पते पर उसके घर पहुंचे ; मगर वहांँ तो किसी का मातम हो रहा था, सारे घर वालों का रो रो कर बुरा हाल हो रहा था, मालूम करने पर पता चला कि शाहनूर के पति “असलम” का कल रात कंपनी में बिजली का करंट लगने से मौत हो गई और उसकी लाश बीच आंगन में रखी हुई है.. सास और बहू का रो-रोकर बुरा हाल था..

चाचा जी ने वापस आकर जब शहनूर को ये खबर सुनाई, तो वो बेहोश होकर के गिर पड़ी, जब उसे होश आया तो वो अपने पति की लाश के पास बैठी हुई थी…

शहनूर पागल हो चुकी थी, वो भूल चुकी थी कि “मैं कौन हूँ”.. बस सारा दिन गलियों में कभी असलम को तलाश करती तो कभी छुरी लेकर उस बंगाली बाबा की खोज में निकल जाती.. मगर शायद उस पाखंडी बाबा ने शहर छोड़ दिया था जहांँ उसने शाहनूर जैसी और भी बहुत सी औरतों को अपना शिकार बनाया था..

दो महीने के बाद शहनूर की एक कार एक्सीडेंट से मौत हो गई… ये बताते हुए उसकी सास ने अपने दुपट्टे से आंसू पोछे और उठ कर अपने घर की तरफ चल दी…

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