एक बूढ़ी माँ की दर्द भरी कहानी |Sad Mother Story|read now

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Sad Mother Story

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मैं खुद को दुनिया का सबसे बदकिस्मत इंसान समझता हूंँ क्योंकि जब तक मेरी मांँ ज़िंदा रही मैंने कभी उसकी क़दर ना की, उसे बहुत तकलीफे दी, आज वो मुझे छोड़कर जा चुकी है_ मुझे हर वक्त उसकी याद आती है, सारी दुनिया मेरे लिए वीरान हो चुकी है…

मैं बचपन से ही बहुत ज़िद्दी रहा हूंँ_ कभी स्कूल जाते हुए ज़िद करना_ कभी खाना खाते हुए नखरे करना कि मुझे ये नहीं खाना है वो नहीं खाना है,

मुझे याद नहीं कि 8वीं क्लास तक मैंने कभी अपने हाथों से खाना खाया, या अपने हाथों से कपड़े पहने_ यहांँ तक कि जूतों की डोरी भी मैं अपने हाथों से नहीं बांधता था_ मेरी माँ ही मेरे सारे नखरे देखती थी..

मेरी सारी फैमिली में एक मेरी माँ ही थी, भाई बहन कोई नहीं था _ बाप का साया तो बचपन से ही मेरे सिर से उठ गया था…

12वीं क्लास तक मेरी यही हालत रही_ मेरे कपड़े, बिस्तर स्कूल का बैग, किताबें सब इधर-उधर बिखरी पड़ी रहती थीं और मैं ऐसे ही रात में लेटकर सो जाता था, लेकिन सुबह उठते ही मैं देखता कि कमरा बिल्कुल साफ होता, मेरे कपड़े अलमारी में अच्छी तरह रखे होतें, और मेरा बैग भी खूंटी पर टंगा होता…

मेरी मांँ रोजाना मुझसे कहा करती थी कि बेटा ! रात में दूध पीकर सोना, ऐसे मत सोना_ लेकिन मैं उनकी एक ना सुनता और यूं ही सो जाता, लेकिन सुबह मुझे अपने मुंह का मजा बदला हुआ मालूम होता_ मेरी मांँ सोते हुए मुझे रात में दूध पिला दिया करती थी…

रात में अगर कभी बारिश होने लगती तो मैं सुबह देखता कि मेरे ऊपर कोई मोटा कंबल पड़ा हुआ है ताकि मुझे सर्दी ना लग सके…

मुझे घर में हमेशा दो चीजों से बहुत ज्यादा चिढ़ थी _ एक उस सिलाई मशीन की ” खट खट ” की आवाज़ से जो अक्सर 12-12 घंटे तक चला करती थी _ और दूसरा रोटी के किनारों पर अक्सर घी लगने से रह जाता था तो मैं गुस्से में रोटी छोड़कर बाहर चला जाता था.. मुझे इन दो चीजों से हमेशा से चिढ़ रही थी,

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मुझे जब भी ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती तो मैं घर आकर माँ से कह देता कि मुझे इतने पैसों की जरूरत है_ और फिर क्या देखता कि जो सिलाई मशीन की आवाज अभी तक 12 घंटे तक आती थी वो बढ़कर 18 घंटों तक आने लगती..

मुझे आज भी वो दिन याद है जब स्कूल में एडमिशन के लिए मास्टर जी ने मुझसे कहा था कि 15 सौ रुपए तुम्हारी एडमिशन फीस लगेगी_ शाम को मैं घर वापस आया और अपनी मांँ से कहा कि मुझे कल 15 सौ रुपए चाहिए वरना स्कूल में मेरा एडमिशन नहीं हो पाएगा_ इतना कहकर मैं अपने कमरे में जाकर सो गया…

उसी रात 2:00 बजे मेरी आंख खुली तो घर के बरामदे से मुझे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी, मैं उठकर बाहर गया तो क्या देखता हूंँ कि मेरी मांँ मोटे शीशों का चश्मा लगाए बहुत देर से मशीन की सुई में धागा डालने की कोशिश कर रही है और उसकी आंखों से आंसू भी बहे जा रहे हैं…

मांँ की ये हालत देखकर मेरी तो रूह कांप गई, मैंने मांँ से कहा कि मांँ ! इतनी रात हो रही है आप अभी तक काम कर रही हो ?_ मेरी आवाज़ सुनकर मांँ एकदम से चौककर मेरी तरफ देखने लगी और दुपट्टे से आंसू साफ करते हुए मुझसे मुस्कुरा कर कहने लगी : ” अरे बेटा ! वो सामने वाली जो तुम्हारी काजल आंटी हैं उनके यहांँ कल शादी है, उन्होंने कहा था कि अगर मैं उन्हें दो सूट कल तक सिलकर दे दूं तो वो मुझे 15 सौ रुपए देंगी_ लेकिन देखो ये कमबख्त धागा सुई में जा ही नहीं रहा है मैं बहुत देर से परेशान हूंँ…

माँ की ये हालत देखकर मैं उससे जाकर लिपट गया और जो़र-जोर से रोने लगा _ मेरी मांँ ने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा : बेटा ! तुम परेशान ना हो मैं तुम्हारे पैसों का इंतज़ाम ज़रूर कर दूंगी…

उस दिन के बाद से मैंने सोच लिया कि अब मुझे भी पढ़ाई के साथ साथ कोई काम करना चाहिए ताकि मैं भी अपनी मांँ का सहारा बन सकूं..

इधर मेरी पढ़ाई मुकम्मल हुई तो मुझे एक अच्छी नौकरी मिल गई_ मैंने जब घर आकर अपनी मांँ को नौकरी के बारे में बताया तो वो बहुत ज़्यादा खुश हुई और फिर चीनी के डिब्बे से 20 रुपए निकाल कर मुझे दिएं और कहा बेटा ! जाओ जल्दी से इन पैसों से मिठाई ले आओ मैं आज अपने हाथों से तुझे मिठाई खिलाऊंगी…

एक दिन मुझे ऑफिस में बहुत ज्यादा काम पड़ गया और मैं रात में बहुत थका हुआ घर आया_ मैं जूते पहने पहने ही बिस्तर पर लेट गया और फिर मेरी आंख लग गई…

जब सुबह उठा तो मैं बड़ा हैरान हुआ क्योंकि रोजाना रात में जूते उतार दिए जाते थें लेकिन आज मेरे पैरों से जूते नहीं उतरे थें_ मैं किचन में गया तो देखा आज खाना भी बना हुआ नहीं था_

मैं माँ को पुकारने लगा : ” मांँ- माँ_ तुम कहांँ हो माँ, देखो आज मेरा टिफिन भी तैयार नहीं हुआ है _ जल्दी करो माँ_ मुझे देर हो रही है..” लेकिन पता नहीं क्यों माँ का कोई जवाब नहीं आ रहा था…

मैं मांँ के कमरे में गया तो देखा मांँ आराम से बिस्तर पर सो रही है_ मैं उसके पैरों को दबाकर उसे उठाने लगा, लेकिन माँ उठ नहीं रही थी_ मैं उसके सर के पास गया और सर को दबाकर उठाने लगा_ मैं बार-बार उसे पुकार कर कह रहा था कि ” मांँ ! जल्दी उठो मुझे भूख लगी है_ रात में मैंने खाना भी नहीं खाया था_ मेरा टिफिन भी तैयार नहीं हुआ है_ जल्दी से उठो माँ..”

लेकिन पता नहीं मेरी मांँ को क्या हो गया था कि वो उठने का नाम ही नहीं ले रही थी, बहुत देर के बाद मुझे मालूम हुआ कि आज रात मेरी मांँ उठने के लिए नहीं सोई थी बल्कि वो हमेशा के लिए सो चुकी थी_ मेरी मांँ मुझे छोड़कर जा चुकी थी, मैं वहीं खड़ा चीख चीखकर रोने लगा..

मेरी सारी दुनिया लुट चुकी थी क्योंकि मेरा मेरी मांँ के सिवा कोई नहीं था, माँ के बगैर वो घर मुझे काटने दौड़ता था इसलिए कुछ दिनों के बाद मैंने वो घर भी छोड़ दिया..

आज मेरी मांँ को मरे 3 साल हो चुके हैं _ अब मुझे अपने कपड़े खुद धोना पड़ता है_ खाना खुद ही बनाना पड़ता है, अगर रात भूखा सो जाऊं तो कोई मुझसे पूछने वाला नहीं कि बेटा भूखे क्यों सोए थें….


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