एक अनाथ बच्चे की कहानी|Motivational Story | read now

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मैं अपने पति के साथ मिस्र के एक गांव में रहती थी, मेरे घर के पास एक अनाथ बच्चा रहता था,

अभी 2 साल पहले उसके मां-बाप की एक कार एक्सीडेंट से मौत हो गई थी,

वह लड़का अपने चाचा के साथ रहता था, वह 8 साल का था, और एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था।

उसका चाचा बहुत जालिम था, वह अपने भतीजे को खाना भी नहीं देता था और पूरा का पूरा दिन काम करवाता था।

फातिमा : एक दिन मैंने देखा वह फटे पुराने कपड़े पहने घर की कारों को धो रहा था…

वह बहुत परेशान नजर आ रहा था… मैंने उसे बुलाया और उससे पूछा :

बेटा ! “तुम इतना काम क्यों करते हो ?”…

“मेरा नाम अहमद है ” उसने जवाब दिया…

वह रोने लगा…

“मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है, मेरे मां-बाप की मौत हो गई है, मेरा चाचा मुझसे बहुत काम लेता है, और मुझे रूखी सूखी रोटी खाने को देता है, मुझे पेन पेंसिल खरीदने के भी पैसे नहीं देता है… “

” मैं पढ़ना चाहता हूं लेकिन मेरा चाचा मेरे स्कूल की फीस भी नहीं देता है “

फातिमा : मुझे उस बच्चे पर तरस आया, और मैंने उससे कहा :

” मेरे बच्चे ! अब तुमको परेशान होने की जरूरत नहीं है आज से मैं तुम्हारी माँ हूँ “

” मैं तुमको चुपके से स्कूल की फीस दे दूंगी, पेन पेंसिल खरीद दूंगी, तुम खूब मेहनत से पढ़ना और बहुत बड़े इंसान बनना, मेरे प्यारे बच्चे !’

” जब तुमको भूक लगे तो चुपके से मेरे पास आ जाना मैं तुमको खाना खिला दूंगी… “

” बेटा ! मैं तुम्हारी माँ हूँ… तुम आज से मुझे अपनी माँ बुलाना… अब कभी परेशान ना होना… “

फातिमा : मेरा पति बहुत सख्त था वह मुझे घर से बाहर भी नहीं जाने देता था…

लेकिन मैं छुप-छुपकर अहमद को खाना दे दिया करती थी…

मैं अहमद के साथ बहुत खुश थी, मैं उससे बहुत मोहब्बत करने लगी थी…

मैं नहीं चाहती थी कि वह मोहल्ले के गंदे बच्चों के साथ खेले और उसकी संगत ख़राब हो…

मैं चाहती थी कि वह खूब मेहनत से पढ़ाई करे और बहुत बड़ा इंसान बने…

कई साल गुजर गए, मैं अहमद को अपने बच्चे की तरह समझती थी…

कुछ दिनों के बाद मेरे पति ने इस गांव को छोड़ने का इरादा किया और मुझसे कहा :

” अब हम लोग शहर में जाकर रहेंगे, इस गांव को छोड़ देंगे “

यह सुनकर मेरे दिल की धड़कनें बढ़ गई, क्योंकि मैं अहमद से दूर नहीं होना चाहती थी…

मैं अहमद की जुदाई पर बहुत रोयी.. मैंने अहमद को अपना नंबर दिया…

” तुमको जो भी जरूरत हो मुझे कॉल करना मैं तुम्हारी माँ हूँ…”

उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे… वह बहुत खामोश और उदास था क्योंकि उसका दुनिया में मेरे अलावा कोई नहीं था…

मैंने अहमद से अलविदा कहा और अपने पति के साथ चल दी, मेरा दिल अहमद लिए टूटा जा रहा था…

कई साल गुजर गए, मेरा दिल अहमद के साथ लगा रहता था…

हर वक्त मैं ईश्वर से यह प्रार्थना करती…

“ईश्वर ! मेरे अहमद को मुसीबतों से बचाना”… मैं रातों में उठ उठ कर अहमद के लिए दुआएं करती…

दिन गुजरते गए, मेरे लड़के बड़े हो गए, मैंने अपनी तीन लड़कियों की शादी कर दी…

एक दिन मैं घर का कुछ काम कर रही थी, अचानक सीढ़ियों से मेरा पैर फिसल गया और मैं नीचे गिर गई…

मुझे बहुत चोट लगी और मैं बेहोश हो गई, मेरे सर से बहुत खून निकला…

मेरा बड़ा लड़का मुझे अस्पताल लेकर गया… ‌‌5 दिनों तक मेरा इलाज चला लेकिन मेरे सर का दर्द नहीं जा रहा था, ऐसा महसूस होता था कि दर्द की वजह से मेरा सर फट जाएगा…

डॉक्टरों ने कहा : ” हमें इलाज के लिए इस शहर के सबसे बड़े डॉक्टर को बुलाना होगा, क्या आप उसके लिए तैयार हैं ?… “

फातिमा : ठीक है…

शाम 4:00 बजे एक डॉक्टर मेरे कमरे में आता है, वो एक अच्छा, सुंदर, और खुशमिजाज डॉक्टर था…

“आपकी तबीयत कैसी है?” डॉक्टर ने पूछा…

फातिमा : “ठीक हूँ “

उसने मेरी फाइल खोली, फाइल में मेरी पूरी Biography लिखी हुई थी…

डॉक्टर : “आपका नाम फातिमा है … “

फातिमा : जी…

” क्या आप आज से 35 साल पहले मिस्र के “गिरिडीह” गाँव में रहती थी ?”

फातिमा : ” हाँ, लेकिन आप इतने घबराए हुए क्यों हैं? “

उसने मुझे पहचान लिया था लेकिन मैं उसे नहीं पहचान पाई थी…

उसकी आवाज बदल गई और वह मेरे पास आकर रोने लगा…

डॉक्टर : “आपने मुझे नहीं पहचाना ? मेरी माँ फातिमा ! “

फातिमा : “नहीं… खुदा की कसम “

डॉक्टर : ” मेरी माँ ! मैं अहमद हूँ… वही अनाथ बच्चा, जिसको आपने आज से 35 साल पहले रहम की नजरों से देखा था, पैसों से मदद की थी, और खाने के लिए रोटी दी थी … “

फातिमा : “अरे मेरा बच्चा अहमद !…

” मैंने तुमको बहुत तलाश किया, बहुत याद किया, रातों में तुम्हारे लिए दुआएं मांगी, मेरे बच्चे ! तुम कैसे हो ?…”

डॉक्टर : मैं ठीक हूं मेरी माँ, मैंने आपकी बात मान कर मोहल्ले के गंदे बच्चों के साथ खेलना बंद कर दिया था… मैंने खूब मेहनत से पढ़ाई की, आज मैं इस शहर का सबसे बड़ा डॉक्टर हूँ, इन सब के पीछे आप ही की मेहनत है…”

वह दोनों एक दूसरे को पकड़ कर रोने लगे और खुदा का शुक्र अदा करने लगे कि खुदा ने उनको इस दुनिया में मिला दिया,

डॉक्टर : ” यह मेरा नंबर है मेरी माँ फातिमा, आपको जिस चीज की भी जरूरत हो आप मुझे कॉल करना”

” यह मेरा अपना अस्पताल है, और मैंने ही इसकी शुरुआत की थी…..”

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