गरीब चपरासी और भूतिया स्कूल ☠️| School horor story

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School horror story

  यह बात सन 2009 की है जब मैं लखनऊ के एक गर्ल्स स्कूल में गार्ड की नौकरी के लिए आया था, यह मेरी ड्यूटी की पहली ही रात थी, रात के वही कुछ 11:15 बज रहे थे जब मैं किचन में गया और एक कप चाय बनाने लगा, मैंने देखा कि क्लास-रूम की तरफ जाने वाली गैलरी का दरवाजा खुला हुआ है, मुझे हैरानी हुई कि शाम को तो मैंने दरवाजा बंद कर दिया था उसके बाद स्कूल में कोई आया भी नहीं तो फिर यह दरवाजा कैसे खुला..?

मैंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और आगे बढ़ कर वह दरवाजा बंद कर दिया और फिर आकर अपनी चाय बनाने लगा, चाय लेकर मैं बीच सहन में अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया, गर्मी का मौसम था मेरे सामने एक टेबल फैन रखा चल रहा था उसी की आवाज गूंज रही थी_ अचानक मुझे महसूस हुआ कि जैसे टेबल फैन की हवा मेरी तरफ आना बिल्कुल बंद हो गई है..

मैंने मुड़कर पंखे को देखा लेकिन वह तो अभी भी बहुत तेज चल रहा था लेकिन इसकी हवा मुझ तक क्यों नहीं आ रही है..? मैं उसके पास गया और उसे बंद करके फिर से खोला_ एकदम एक हवा का झोंका लगा लेकिन फिर से ऐसा लगा मानो कोई उसके सामने खड़ा हो गया हो जिसकी वजह से मेरी तरफ हवा नहीं आ रही थी_ मैं देख रहा था कि उसकी हवा कट कट के पास की झाड़ियों पर पड़ रही थी जिसकी वजह से पत्तियां हिल रही थी..

मैं बड़ा परेशान हुआ_ देखते देखते अचानक वह पंखा जमीन पर ऐसे गिरा जैसे किसी ने उस पर लात मारी हो, मैं बहुत डर गया और उठकर पंखे को देखा_ उसके पर टूट चुके थे.. स्कूल में हर तरफ सन्नाटा फैला हुआ था…

मैं परेशान होकर अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गया_ गर्मी बहुत तेज हो रही थी_ तभी मुझे महसूस हुआ जैसे किचन में किसी ने डिब्बे ऊपर से नीचे गिरा दिए हैं, मैं डरते हुए किचन की तरफ गया तो वहां सारे डिब्बे जमीन पर बिखरे पड़े थे.. मैं परेशान होकर वापस लौटने लगा तभी मेरी नजर गैलरी वाले दरवाजे पर पड़ी वो फिर से खुला हुआ था_ मुझे दूर गैलरी में कोई चलता हुआ नजर आ रहा था शायद वो कोई औरत थी उसने एक काली चादर ओढ़ रखी थी कम रोशनी में सिर्फ उसका धुंधला सा साया नजर आ रहा था…

यह देख मैं बहुत डर गया क्योंकि स्कूल में मेरे अलावा तो और कोई नहीं था, तभी मुझे ऐसा लगा जैसे कोई छत की तरफ दौड़ता हुआ गया है, मैंने सोचा मुझे इस मामले की जांच करनी चाहिए क्योंकि हो सकता है ये किसी इंसान का काम हो जो कि मुझे डराने की कोशिश कर रहा है..

मुझे वो साया सीढ़ियों पर चढ़ता नजर आ रहा था, मैं उसके पीछे सीढ़ियों पर चढ़ता हुआ जा रहा था, मुझे वो साया अभी भी नजर आ रहा था_ वह धीरे-धीरे छत की तरफ ऊपर जा रहा था_ मैं चढ़ते चढ़ते छत पर पहुंच गया लेकिन वहां तो कोई भी नहीं था मैंने आवाज लगाई कि “कौन हो तुम..?” लेकिन कोई जवाब नहीं आया, मायूस होकर मैं नीचे की तरफ जाने लगा तभी अचानक मुझे किसी ने पीछे से बहुत तेज धक्का दिया और मैं मुंह के बल सीढ़ियों पर गिरा_ मेरी किस्मत अच्छी थी कि मैं बीच सीढ़ियों पर ही एक गमले की वजह से रुक गया वरना शायद आज मेरी मौत ही हो जाती.. जैसे तैसे वो रात गुजरी…

सुबह मैंने स्कूल के एक टीचर को अपनी रात की आपबीती बताई और उनसे इस स्कूल के बारे में पूछा कि आखिर यहां आज तक कोई भी गार्ड एक हफ्ते से ज्यादा क्यों नहीं रुक पाया है…?, पहले-पहल तो उस टीचर ने इन सारी बातों का इनकार किया और इसे मेरा भ्रम ठहराया_ लेकिन जब मैंने बहुत ज्यादा जिद की तो उन्होंने मुझे सबकुछ बता दिया.. आगे की कहानी उन्हीं की जुबानी आपको सुना रहा हूं..

“कुछ समय पहले की बात है दोपहर 11:00 बजे क्लास से दो बच्चियां वॉशरूम गई, थोड़ी देर के बाद अचानक उनमें से एक बच्ची दौड़ती हुई क्लास में आई और बेहोश होकर गिर पड़ी, टीचर्स ने जल्दी-जल्दी उस पर पानी डाला_ जब वो होश में आई तो उससे पूछा कि क्या हुआ था तुम्हारे साथ और वो दूसरी बच्ची कहां है जो तुम्हारे साथ गई थी…? उसने रोते हुए वॉशरूम की तरफ इशारा किया और कहने लगी कि जब मेरी सहेली वाशरूम में अंदर गई थी तो बहुत देर तक बाहर नहीं आई, मैंने दरवाजा खटखटाया और उसको पुकारा, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई..

बहुत देर पुकारने के बाद अचानक अंदर से एक अजीब भारी सी आवाज आई कि ” भाग जाओ यहां से_ वरना इसके साथ तुमको भी जान से मार देंगे..”, मैंने देखा कि मेरे पैरों की तरफ वाशरूम के अंदर से खून बहता हुआ आ रहा है, मैं वहां से डर कर भागी तो मुझे किसी ने पीछे से बहुत तेज धक्का दिया और मैं सामने दीवार से टकराकर गिर पड़ी, लेकिन मैं फिर से हिम्मत करके भागी और क्लास रूम में आकर ही दम लिया_ मेरी वो सहेली अभी भी वाशरूम में किसी मुसीबत में है आप लोग उसे बचा लीजिए…

हम सारे टीचर्स और बच्चे जल्दी से वॉशरूम तक गए, वहां बिल्कुल सन्नाटा था वॉशरूम का दरवाजा बंद था, मैंने वॉशरूम का दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई खून अभी भी अंदर से बहता हुआ बाहर की तरफ आ रहा था मैंने छत की तरफ से अंदर फांदने की कोशिश की लेकिन प्रिंसिपल ने मुझे मना कर दिया..

मैंने प्रिंसिपल से बहुत जिद की और कहा कि उस बच्ची की जान को खतरा हो सकता है इसलिए आप मुझे जाने दें, बहुत ज्यादा कहने के बाद प्रिंसिपल ने कहा : ठीक है लेकिन बहुत संभल कर जाना..; मैं ऊपर की तरफ से वॉशरूम के अंदर फांद गया वो बच्ची जमीन पर बेहोश पड़ी थी उसके चेहरे पर नाखून से नोचने के निशान बने हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे किसी जानवर ने अपने पंजों से हमला किया हो…

मैंने अंदर से दरवाजा खोलना चाहा लेकिन पता नहीं क्यों दरवाजा नहीं खुल रहा था, मैंने बहुत कोशिश की लेकिन दरवाजा नहीं खुला_ दरवाजा पुराना था मैंने अपनी लातों से उसे मार मार के तोड़ दिया, जब मैं बच्ची को उठाकर बाहर ले जा रहा था तो अचानक किसी ने बहुत तेज हमें धक्का दिया मैं बच्ची को लेकर दूर जाकर गिरा, सारे लोग हमें स्कूल के एक कमरे में लेकर आएं..

बच्ची की हालत बहुत खराब थी_ मेरे भी हाथ पैरों में चोट के निशान थें, शाम तक हम दोनों को हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया गया, मैं तो दो-चार दिन के बाद ठीक हो गया लेकिन उस बच्ची की हालत अभी भी बहुत खराब थी, डॉक्टर का कहना था कि इस बच्ची के जिस्म में अजीब से वायरस मिले हैं जो शायद किसी अनजान जीव के लगते हैं_ लेकिन फिर भी घबराने की जरूरत नहीं है इस बच्ची का इलाज चल रहा है और ये जल्दी ठीक हो जाएगी…

12 दिनों बाद बच्ची ठीक हो गई, हम लोगों ने उस बच्ची से पूछा कि तुम्हारे साथ वॉशरूम में क्या हुआ था..? उसने बताया जब मैं वाशरूम के अंदर गई तो पहले तो सब नॉर्मल था लेकिन थोड़ी देर के बाद मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे पीछे खड़ा है..! जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई_ ये किसी औरत का साया था जिसने काली चादर ओढ़ रखी थी_ उसका साया ऊपर छत को छू रहा था_ उसके पैर नहीं थे उसके चेहरे पर सिर्फ दो हरी हरी चमकती आंखें नजर आ रही थी उसके लंबे लंबे नाखून किसी जानवर के पंजों की तरह थे..

उसने मुझे तेजी से जकड़ लिया_ वो बराबर मुझसे कहे जा रही थी कि मुझे तुम्हारा खून पीना है_ अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे सर पर कोई बड़ा सा पत्थर मार दिया हो_ मैं बेहोश होकर गिर पड़ी_ फिर मुझे कुछ नहीं पता कि मेरे साथ क्या हुआ, जब मुझे होश आया तो मैं यहां हॉस्पिटल में थी..

मैंने जब स्कूल टीचर से ये कहानी सुनी तो मुझे रात वाला वही काला साया याद आ गया जो किसी औरत का था और धीरे-धीरे ऊपर छत की तरफ जा रहा था.. मैंने सोच लिया कि अब मुझे इस स्कूल में नहीं रहना है, मैंने उसी दिन प्रिंसिपल से साफ कह दिया कि मैं इस स्कूल में गार्ड की नौकरी नहीं कर सकता आप मुझे माफ करें, उसी दिन शाम को मैंने वह स्कूल छोड़ दिया…

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